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6000cr का कर्ज लेकर माल्या ने यहां लगा दिया

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नई दिल्ली। लंदन में छिपे कारोबारी विजय माल्या ने कथित रूप से एसबीआई के नेतृत्व वाले बैंकों के समूह से लिए गए 6000 करोड़ रुपये के कर्ज का अधिकांश हिस्सा हेराफेरी कर ठिकाने लगा दिया। यह बात सीबीआई और ईडी की एक जांच में सामने आई है। अब माल्या के खिलाफ सीबीआई और ईडी जल्द एक नई चार्जशीट दाखिल करेगी।

जांच में पता चला कि रकम को कथित तौर पर लगभग सात देशों की शेल (मुखौटा) कंपनियों में ट्रांसफर किया गया। आईडीबीआई से लिए गए 900 करोड़ रुपये के लोन के मामले में दोनों जांच एजेंसियों ने इसी साल पहली चार्जशीट फाइल की थी। अब इससे भी बड़े मामले में नई चार्जशीट से माल्या के प्रत्यर्पण में मदद मिल सकती है। प्रत्यर्पण मामले पर अभी ब्रिटेन की वेस्टमिंस्टर कोर्ट में सुनवाई हो रही है। घटनाक्रम की जानकारी रखने वाले एक सीनियर अधिकारी ने बताया, ‘हम दूसरी प्रॉसिक्यूशन कंप्लेंट फाइल करने वाले हैं।

इस मामले में हमारी जांच से पता चला कि बैंकों ने किंगफिशर एयरलाइंस को जो लोन दिया था, उसे माल्या और उसके सहयोगियों ने शेल कंपनियों में भेज दिया। हमने अमेरिका, ब्रिटेन, फ्रांस और आयरलैंड को लेटर्स रोगेटरी भेजे हैं और जल्द जवाब मिलने की उम्मीद कर रहे हैं।’ दोनों ही जांच एजेंसियों ने इस संबंध में हमारे सहयोगी ईटी के ईमेल से भेजे गए सवालों के जवाब नहीं दिए। पैसों की कथित हेराफेरी पर सवाल-जवाब के लिए माल्या से भारत आने को कहा गया है।

इस नए मनी लॉन्ड्रिंग केस के दायरे में करीब 6027 करोड़ रुपये का लोन है। यह लोन एसबीआई की अगुवाई में एक दर्जन से ज्यादा बैंकों ने 2005 से 2010 के बीच माल्या की किंगफिशर एयरलाइंस को दिया था। ब्याज के साथ लोन की रकम अभी 9000 करोड़ रुपये से ज्यादा है। लोन न चुकाने और आपराधिक षडयंत्र के आरोप में पिछले साल एक एफआईआर दर्ज की गई थी। आईडीबीआई बैंक ने लोन फ्रॉड के आरोप में जो मामला दर्ज कराया था, उसमें माल्या को भगोड़ा घोषित किया जा चुका है और जांच एजेंसियां उसे लंदन से भारत लाने की कोशिश में हैं।

मई में दाखिल चार्जशीट में जांच एजेंसियों ने दावा किया था कि भगोड़े बिजनेसमैन ने आईडीबीआई बैंक से लिए गए लोन का लगभग आधा हिस्सा कई कंपनियां बनाकर इधर-उधर कर दिया और उन कंपनियों में ऐसे लोगों को डॉयरेक्टर नॉमिनेट कर दिया, जो पहले उसके पर्सनल स्टाफ थे या कंपनी के रिटायर अधिकारी थे। एक अन्य अधिकारी ने कहा, ‘सीबीआई एक महीने में नया मनी लॉन्ड्रिंग केस फाइल करेगी। उसमें माल्या की ओर से किए गए पैसे के हेरफेर की जानकारी होगी।’ दोनों देशों के बीच प्रत्यर्पण संधि के मुताबिक, माल्या की कथित गतिविधियों के बारे में ‘डुअल क्रिमिनलिटी’ क्लॉज साबित करना होगा साथ ही, भारत में सरकारी बैंकों को चूना लगाने के माल्या के इरादे और उसके बाद की गई मनी लॉन्ड्रिंग को भी ब्रिटिश कानून की नजरों में ‘अपराध’ साबित करना होगा।