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Most of the focus at the United Nations Climate Change Conference in Paris is on working toward agreements on how to address climate change, and what a changing planet might mean for humans.

But CBC Radio science columnist Torah Kachur has been following the conference and exploring new research about tiny water-dwelling plants called phytoplankton — which are being used to measure the effects of our warming world.

What are phytoplankton?

Phytoplankton are a large family of microscopic marine algae that perform photosynthesis, just like land-based plants do.  

They use energy from the sun and convert it into food for the entire food chain. This makes them the primary producers of biomass in the oceans — pretty much all the edible carbon in the ocean comes from the action of these small creatures.

Why are they important for understanding climate change?

For starters, they absorb just as much carbon dioxide as all the tropical rainforests on land. 

You've likely heard that one of the major drivers of climate change and increased carbon dioxide levels is deforestation, because we have lost plants that use up carbon dioxide in the air.

Phytoplankton's ability to mop up carbon dioxide dissolved in the ocean can remove some of that greenhouse gas from circulation.

Not only that, but they are primary producers — which means if they are affected by rising ocean temperatures or acidity, the entire ecosystem will feel the impact.

What does the latest research say about the effect of climate change on phytoplankton?

That's been the focus of three papers, just published in the past week.

The first was published in the journal Science, and looked at data from the past 50 years. The paper's authors found one particular species of phytoplankton from the North Atlantic has thrived. In fact, its population has increased almost tenfold since 1965. 

That's an incredibly surprising finding for the researchers. It has long been thought that organisms like these would be particularly sensitive to the increase in acidity that is measured in the oceans today.

That's because they have hard shells made from chalk, which doesn't form as well when acidity is higher.

But it turns out they haven't been impacted by the higher acid content in the oceans — or at least not yet.

Scientists also know phytoplankton populations bloomed like this during Earth's interglacial periods. Based on that, the authors suggest a big climactic shift is already underway, and that is not likely to be good for us.

Does that mean good news for phytoplankton, bad news for humans?

Maybe, but these little creatures continue to surprise us. Just like it was believed rising acidity would strongly affect their survival, it was also thought that rising temperatures would be especially damaging to these cells.

Most of our understanding of climate change comes from empirical and experimental evidence, used together with theoretical modeling to try to put it all together.

And some other recent research on phytoplankton may influence that modelling.

In another study also published this week, researchers like Daniel Padfield from the University of Exeter explored temperature adaptations of plankton. And he says they adapted quickly.

"At 33 degrees centigrade, which is the highest temperature where they were stressed out, they initially grew below what we would expect," he said.

"However, after just 45 days, they evolved increased growth rates. So essentially, they increased their thermal tolerance, so the range of temperatures in which they're capable of surviving, after only 45 days."

Now the researchers are trying to figure out how exactly they do that. 

But it bodes well for the future — or at least a future where average temperatures rise by no more than two degrees — because the phytoplankton will still be around to produce oxygen.

Now climatologists can incorporate this hard evidence into their models to put together a cohesive picture. And most importantly, they can make better predictions of the effects changing climate will have on the planet.

Could phytoplankton's ability to adapt be an ally in efforts to curb the effects of climate change?

Only up to a point. In a third study published this week, in the Bulletin of Mathematical Biology, researchers from the University of Leicester predicted that a six-degree rise in ocean temperature will prevent phytoplankton from surviving. That would mean the loss of the oxygen they produce through photosynthesis.  

Two-thirds of our atmospheric oxygen comes from the photosynthesis of marine life, so if the phytoplankton die, it's fairly likely we do too.

However, that six-degree rise in global ocean temperature is beyond most of the predictions from existing climate models. And the researchers may have chosen it to illustrate the most extreme consequences.

But it does show that there are limits to what phytoplankton can do for us. So while nature constantly can make us marvel at its ability to adapt, science shows that we can't count on phytoplankton to fix the problem.

 

आमतौर पर कैंसर बीमारी का नाम सुनकर पीडि़त व्यक्ति ही नहीं बल्कि रोगी के परिजन भी भयभीत हो जाते हैं। सच तो यह है कि कैंसर एक गंभीर बीमारी है, लेकिन आधुनिक मेडिकल साइंस में हुई प्रगति के कारण समय रहते विभिन्न प्रकार के कैंसरों का कारगर इलाज संभव है। वल्र्ड कैंसर डे (4 फरवरी) पर विशेष...

सहज शब्दों में कहें, तो कैंसर शरीर में कोशिकाओं की अनियंत्रित वृद्धि का एक समूह है। कैंसर शरीर के अंग विशेष से अन्य भागों में भी फैल सकता है। अगर शरीर में तेजी से बढऩे वाली कोई गांठ हैं, तो वह कैंसर हो सकती है। वहीं जो गांठ तेजी से नहीं बढ़ती, उसमें कैंसर होने की आशंका कम होती है। मस्तिष्क में तेजी से बढऩे वाली गांठें ट्यूमर कहलाती हैं। ध्यान दें कि हर गांठ कैंसर नहीं होती।

कारण

कैंसर होने के तमाम कारण हैं। विभिन्न प्रकार केकैंसरों के कारण भी विभिन्न होते हैं। जेनेटिक कारणों से भी कैंसर होता है। इसके अलावा अस्वास्थ्यकर जीवन-शैली और पर्यावरण संबंधी कारण भी कैंसर के लिए उत्तरदायी है। जो लोग धूम्रपान करते हैं, उनमें अन्य स्वस्थ व्यक्तियों की तुलना में फेफड़ों का कैंसर होने की आशंकाएं कहीं ज्यादा बढ़ जाती हैं। तंबाकू उत्पादों को चबाने वाले लोगों में मुंह का कैंसर होने का जोखिम बढ़ जाता है। इसी तरह जो लोग शराब का अत्यधिक सेवन करते हैं, उनमें लिवर या पाचन संस्थान से संबंधित या अन्य प्रकार के कैंसर होने का जोखिम बढ़ जाता है। शरीर में दो तरह के जीन्स होते हैं। पहला, कैंसर प्रमोटर जीन्स और दूसरा, कैंसर सप्रेशन जीन्स। एक स्वस्थ व्यक्ति में इन दोनों जीन्स के मध्य संतुलन और तालमेल कायम रहता है, लेकिन अगर इन दोनों के मध्य संतुलन बिगड़ जाता है, तो कैंसर होने की आशंकाएं बढ़ जाती हैं।

 

लक्षण

विभिन्न प्रकार के कैंसरों के लक्षण भी विभिन्न होते हैं। जैसे जो लोग भोजन नली (ईसोफेगस) के कैंसर से ग्रस्त होते हैं, उन्हें किसी भी वस्तु या तरल पदार्थ को निगलने में तकलीफ होती है। कहने का आशय यह है कि कैंसर ने जिस अंग या भाग को प्रभावित कर रखा है, उससे संबंधित कार्यप्रणाली बाधित होने लगती है। अगर कैंसर फेफड़े का है, तो इससे फेफड़ों की कार्यप्रणाली प्रभावित होती है।

 

जांचें और नई तकनीकें

कैंसर रोग की पहचान (डायग्नोसिस) और अवस्था (स्टेज) का पता करने के लिये पैट सी.टी.स्कैन अत्यंत लाभकारी सिद्ध हुआ है। बॉयोप्सी जांच से भी कैंसर का पता चलता है, लेकिन पैट. सी. टी. परीक्षण से शरीर के किसी भी अंग में(मस्तिष्क को छोड़कर) कैंसर का सटीक पता लगाया जा सकता है। वस्तुत: दिमाग के कैंसरग्रस्त भाग के परीक्षण में एमआरआई परीक्षण अधिक कारगर सिद्ध हुआ है। पैट सी.टी.स्कैन लिम्फोमा, फेफड़े के कैंसर, खाने की नली के कैंसर और गर्भाशय के मुख के कैंसर (सर्वाइकल कैंसर) का पता लगाने के लिए एक सटीक व प्रमुख जांच है। इससे कैंसर पीडि़त व्यक्ति के रोग की वास्तविक अवस्था का पता लग जाता है और सही इलाज की दिशा मिल जाती है। इलाज के बाद इस जांच के द्वारा यह भी पता चल जाता है कि कैंसर के अंश शरीर में हैं या नहीं। इस जांच से कैंसरग्रस्त भाग के 5 मि.मी. तक की स्थिति का पता चल जाता है। इसेदुर्भाग्य ही कहेंगे कि देश में अनेक लोग कैंसर की तीसरी व चौथी अवस्था के दौरान अस्पतालों में इलाज के लिये पहुंचते हैं।

 

साइबर नाइफ

साइबर नाइफ एक आधुनिकतम तकनीक है, जिसके प्रयोग से बेहोश किये बगैर कैंसर का निदान किया जाता है।

वस्तुत: साइबर नाइफ रेडियो सर्जरी का एक अत्यंत कारगर 'टारगेट सिस्टमÓ है, जिसमें रोगी के शरीर के प्रभावित अंग पर सर्जरी किए बगैर कैंसर का इलाज संभव है। साइबर नाइफ रेडियो सर्जरी मस्तिष्क, रीढ़ की हड्डी, फेफड़ों, पैनक्रियाज और गुर्दे के कैंसर के इलाज में सफल साबित हुआ है। मुख व गले के कैंसर का साइबर नाइफ के जरिये इलाज संभव है।

भविष्य की आशा: प्रोटॉन थेरेपी

विकिरण चिकित्सा(रेडिएशन थेरेपी) कैंसर पर विजय पाने के लिये इलाज का एक अभिन्न अंग है। विकसित

पाश्चात्य देशों में प्रोटॉन थेरेपी द्वारा विकिरण चिकित्सा कैंसर के इलाज में चंद दशकों से प्रचलन में है। इस

तकनीक के इलाज से विकिरण ऊर्जा कैंसरग्रस्त भाग में ही डिपॉजिट की जाती है। इसके परिणामस्वरूप कैंसरग्रस्त भाग के आसपास स्थित अन्य स्वस्थ सामान्य ऊतक (नॉर्मल टिश्यू) पूरी तरह से बचा लिये जाते हैं।

बच्चों में होने वाले कैंसर और खोपड़ी (स्कल) में होने वाले कैंसर (जो सर्जरी से ठीक नहीं हो सकते है) के

मामलों में भी प्रोटॉन थेरेपी काफी कारगर सिद्ध हुई है।अभी प्रोटान थेरेपी देश में उपलब्ध नहीं है, लेकिन निकट भविष्य में मेदांता समेत देश के चुनिंदा अस्पतालों में इस थेरेपी की सुविधा उपलब्ध हो सकती है।

 

कैंसर और महिलाएं

महिलाओं में कैंसर के अधिकतर मामले गर्भाशय ग्रीवा या सर्वाइकल कैंसर से संबंधित होते हैं। इसके बाद उनमें स्तन या ब्रेस्ट कैंसर के मामले कहीं ज्यादा सामने आते हैं। सर्वाइकल कैंसर का सामान्य कारण ह्यूमैन पैपिलोमा वाइरस(एच पी वी) को माना जाता है। इस कैंसर में शारीरिक संपर्क के दौरान पीडि़त महिला को अत्यधिक दर्द होता है और प्रजनन अंग से रक्तस्राव भी हो सकता है। अगर युवा विवाहित महिलाएं स्त्री रोग विशेषज्ञ के परामर्श पर एच पी वी वैक्सीन लगवा लेती हैं, तो सर्वाइकल कैंसर की रोकथाम की जा सकती है। युवा विवाहित महिलाओं को स्त्री रोग विशेषज्ञ के परामर्श पर समय-समय पैप स्मियर जांच अवश्य करानी चाहिए।

अगर पैप स्मियर जांच रिपोर्ट असामान्य आती है, तो फिर कॉल्पोस्कोपी जांच जरूर करानी चाहिए।'' महिलाओं के स्तनों में होने वाली हर गांठ कैंसर नहीं होती। इसलिए अगर किसी महिला को गांठ सरीखा कुछ महसूस हो, तो उसे इस बारे में विशेषज्ञ डॉक्टर से संपर्क कर मैमोग्राफी नामक जांच करानी चाहिए। समय रहते सर्वाइकल कैंसर और ब्रेस्ट कैंसर का अब पूरी तरह से इलाज संभव है।

डॉ. निकिता स्त्री रोग विशेषज्ञ, लैप्रोस्कोपिक सर्जन. नई दिल्ली

 

पित्ताशय का कैंसर

संभव है कारगर इलाज पित्ताशय (गाल ब्लैडर)का कैंसर पित्त नली में होने वाला कैंसर है। पित्ताशय एक ऐसा अंग है जो पेट के ऊपरी भाग में लिवर के नीचे स्थित होता है। यह वसा (फैट) को पचाने के लिए लिवर के द्वारा बनाये गए एक तरल पदार्थ 'पित्त' का संग्रह करता है। भोजन करने के बाद जब पेट और आंतों में भोजन को बारीक बनाने की प्रक्रिया शुरू होती है, उस समय पित्ताशय से पित्त निकलता है, जो पाचन में मदद करता है।

 

लक्षण

  • पीलिया (त्वचा का पीला पडऩा और आंखों का रंग सफेद होना)।
  • पेट में दर्द रहना।
  • मतली और उल्टी होना।
  • पेट में गांठ होना।
  • बुखार रहना।

जांचें

गॉल ब्लैडर के कैंसर से बचने के लिए या जल्दी डायग्नोस करने के लिए 30 साल की उम्र के बाद पेट का अल्ट्रासाउंड कराना चाहिए। इसके अलावा एंडोस्कोपिक अल्ट्रासाउंड (ईयूएस),सीटी स्कैन, एमआरआई आदि जांचे करायी जाती हैं।

इलाज

आम तौर पर पित्ताशय कैंसर से पीडि़त लोगों के लिए सबसे अच्छा इलाज सर्जरी के जरिये पित्ताशय को निकालकर उसके बाद रेडियेशन थेरेपी देना है। यदि कैंसर अधिक विकसित अवस्था में है, तो डॉक्टर

पित्ताशय के साथ- साथ लिवर और लिम्फ नोड्स के कुछ टिश्यूज को भी निकाल देते हैं।

डॉ. प्रवीण बंसल

वरिष्ठ कैंसर रोग विशेषज्ञ

एशियन इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज, फरीदाबाद

 

डॉ.अशोक वैद

सीनियर ऑनकोलॉजिस्ट

मेदांता दि मेडिसिटी, गुडग़ांव

Losing tummy fat in 10 days is not an impossible task. With the proper changes in the diet, lifestyle and exercise it is possible to get a flat tummy within 10 days. It is necessary to use specific dietary and exercise strategies which target the abdominal area to lose tummy fat. Elevating the metabolic rate is the key to reduce the fat deposits in the body. Follow the strategy given below to get flat tummy in 10 days.

Day 1

The first step in achieving flat tummy is to remove all the junk food from your house. Replace the junk food with nutrient packed and fiber rich food like fruits, vegetables, poultry, lean beef, whole grains, low-fat dairy products, beans, nuts, seeds etc. Do not store hot dogs or sausages or candy bars in your home. Avoid all carbohydrate food for the first day. Start drinking 10-12 glass of water to cleanse your system and to remove the fat from the body. You can also try fasting for one- to three days prior to starting the effort to get a flat tummy. During this fasting take only 3-5 apple cider vinegar drinks.

  • Mix 2 tablespoons of organic apple cider vinegar and one tablespoon of honey and 8 ounces of pure water
  • Take this 2- 3 times a day to jump start the fat reduction program.

Day 2

Take more of boiled or raw vegetables this day. You can use thin vegetable or chicken soup to reduce belly fat. Make sure that you consume something every two to three hours. This will increase your metabolic rate and stabilize the blood sugar. Taking five to six servings of fruits and vegetables will prevent cravings for food. Avoid high carb fruits like banana, apple etc. If you are a person who regularly does exercises, you can continue your exercises along with these changes in the diet. If you have not started exercising, start with mild exercises like walking for 20 minutes.

Day 3

Consume about 50 grams of carbohydrate for your breakfast. Low carb diets are important, if you want to lose fat faster. One cup of oatmeal has 50 grams of carbohydrate. For other meals of the day consume lean protein about the size of your fist. You can use whey protein, yoghurt, fresh fruits and vegetables as snacks. Limit the intake of fat to olive oil or fish oil. Avoid using mayonnaise, margarine, butter, other vegetable oils etc. You can start doing exercises like breathing squat to get rid of the belly fat.

  • Lower your bottom as far as possible in the squat position. Inhale while going down. Wait for a few minutes and come up exhaling slowly.
  • Repeat the exercise for 10 times.

Day 4

You can take omelet with three egg white and vegetables or spinach added to it for your breakfast. You can take snacks like boiled chicken with red pepper or cucumber with turkey breast as snacks. Include salads made of vegetables, chicken, olive oil etc for lunch. Do not take more than 150gms of chicken or turkey at one serving. You can also use a fistful of seeds or nuts when you feel hungry. This will reduce the craving. Start doing some crunches to mobilize the fat around the gut.

  • Lie on your back with hands under your head, place the feet firmly on the floor with the knees bend.
  • Use the tummy muscles to crunch and raise your shoulders off the floor
  • Do at least three sets of crunches.

Day 5

You can consume low fat milk and fruits this day. If you want you can include one or two bananas. This provides the necessary carbohydrate for your body. You can take vegetable soups or salads to fill your stomach and to get all the nutrient supply. Drink plenty of water and add sit-ups to your exercise regime.

  • Lie on your back with the knees bent and feet on the floor. Extend your arms so that the fingers are pointed upwards.
  • Exhale and try to sit up slowly
  • Inhale and lower yourself to the start position.

Day 6

You can use green beans, scrambled eggs made with one whole egg and two egg whites and tomatoes for your breakfast. You can use cod fillet or grilled chicken breast as your snack. You can consume fish or lean meat in different forms. Do not forget to add five servings of fruits and vegetables. Do all the exercises from walking to sit ups.

  • You can increase the number of crunches and sit ups if you want faster fat removal.

Day 7

You can use grilled or boiled chicken or duck breast for your breakfast along with steamed spinach or grilled tomatoes. Use Brazil nuts or watermelon seeds or steamed broccoli as a snack. You can change the exercise to aerobic exercise today.

Changing the exercise will give a shock to the body and increases the metabolic rate effectively causing to lose fat from belly faster.

Do 30 minutes of aerobics exercise.

Day 8

Avoid food with low– nutrient content. You can opt for breakfast with whole wheat bread and omelet using the white of two eggs. Continue drinking 10-12 glass of water and select healthy snacks like soy crisps, fruit with yoghurt dip etc.

  • You can opt for swimming apart from the regular exercise regime.

Day 9

Again make this day the vegetarian day. Use all the vegetables which are less in calories throughout the day. This wills help to cleanse tour digestive system of the fat deposits. Include the most fibrous vegetables to get the best result.

  • Increase walking to 40 minutes
  • You can either opt for all the crunches and sit-ups or you can do only the swimming and aerobic exercise.

Day 10

You can have breakfast that includes whole grains food items and fruits. Continue the low –fat, high fiber snacks and soups as and when required. Try to add diversity to your workout by getting a jumping rope or adding leg tuck exercise. Continue with the low sugar, low carb diet to make the results last forever.

Do you want to reduce your tummy and give a flat look to it? Do you want to achieve the goal within 10 days? Follow the above diet and exercise plan to elevate the metabolic rate and to reduce the belly fat.

 

नई दिल्ली। बाबा रामदेव की कंपनी ‘पतंजलि आयुर्वेद लिमिटेड‘ पर उत्पादों के बारे में गलत जानकारी देने को लेकर 11 लाख रुपए का जुर्माना लगाया गया है। खबर के मुताबिक, पतंजलि के पांच उत्पादन यूनिटों को ब्रैंडिंग व उत्पाद को लेकर गलत जानकारी देने के दोषी पाए जाने पर हरिद्वार की कोर्ट ने जुर्माना लगाया है।

प्रेमेन्द्र श्रीवास्तव

लखनऊ जिनके खानदान में दूर-दूर तक बिजनेस का सिलसिला न हो,  जिनके घर के सभी सदस्य बड़े-बड़े ओहदे पर हों, जिन पर नौकरी करके जीवन संवारने का प्रेशर हो, ऐसे में बायोटेक से इंजीनियर बनने वाली तूबा सिद््दीकी की अपना बिजनेस स्थापित करने की जिद ने उन्हें कैसे-कैसे हालात से गुजरने को मजबूर किया, पर वे हिम्मत नहीं हारी आैर अपना मकसद पाने के लिए डटी रहीं। आज वे एक "मिट्टी से" नामक हर्बल प्रॉडक्ट्स बनाने वाली नेचर लैप प्राइवेट लिमिटेड कम्पनी की डायरेक्टर हैं। बैंगलोर मंे उनका मार्केटिंग आफिस है। उनका प्रोडेक्ट आज पूरे देश में अपनी पहचान बना रहा है। वे जरूरतमंद महिलाओं को स्वावलंबी बनाने के लिए भी प्रयत्नशील हैं। उन्होंने अपनी फैक्ट्री में केवल महिलाओं को ही मुलाजिम रखा है।

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