JA Teline V - шаблон joomla Форекс

इंडियन नेवी को मिली पहली स्कॉर्पिन सबमरीन कलवरी, जानें कुछ खास बातें

News
Typography

नयी दिल्ली। लंबे इंतजार के बाद नौसेना को स्कॉर्पिन सीरीज की पहली पनडुब्बी कलवरी मिल गयी है हिंद महासागर में चीन की बढ़ती हलचल के बीच नौसेना की मौजूदा पनडुब्बियां पुरानी पड़ रही हैं ऐसे में आधुनिक फीचर्स से लैस यह पनडुब्बी मिलना काफी अहम माना जा रहा है।

आइए जानते हैं पनडुब्बियों के बारे में कुछ खास...

  • मेक इन इंडिया के तहत बनी यह पनडुब्बी दुश्मन की नजरों से बचकर सटीक निशाना लगाने में सक्षम है।
  • यह टॉरपीडो और एंटी शिप मिसाइलों से हमले करने में सक्षम है अब स्कॉर्पिन सीरिज की कुल 6 पनडुब्बियां देश में बनाने का प्लान है।
  • कलवरी का नाम टाइगर शार्क पर रखा गया है कलवरी के बाद दूसरी पनडुब्बी खंदेरी की समुद्र में गतिविधि जून में शुरू हो चुकी है।
  • अगले साल कलवरी को भारतीय नौसेना में शामिल किया जाएगा तीसरी पनडुब्बी वेला को इसी साल पानी में उतारने का प्लान है अन्य पनडुब्बियों को 2020 तक शामिल करने का लक्ष्य रखा गया है।
  • भारत में 1999 में तैयार प्लान के मुताबिक 2029 तक 24 पनडुब्बियां बनाने का प्लान है।
  • पहले प्रोजेक्ट के तहत स्कॉर्पिन क्लास की 6 पनडुब्बियों का निर्माण शुरू हुआ।
  • अगले प्रोजेक्ट के तहत स्ट्रैटिजिक पार्टनरशिप मॉडल के दायरे में 6 पनडुब्बियां बनयी जायेंगी।
  • स्कॉर्पिन पनडुब्बियों का प्रोजेक्ट मुंबई स्थित मझगांव डॉक शिप बिल्डर्स लिमिटेड (एमडीएल) और फ्रांस की कंपनी नेवल ग्रुप (पूर्व में डीसीएनएस) के सहयोग से चलाया जा रहा है जो 5 साल लेट हो चुका है।
  • कलवरी को 2012 में ही नौसेना में शामिल करने का प्लान था सूत्रों की मानें तो नेवी अगले महीने एक बड़े समारोह में इसे अपने बेड़े में शामिल करने की तैयारी कर रही है।