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असली चाय बागानों की खूबसूरती है यहां

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चाय का सबसे महत्वपूर्ण उत्पादक होने के कारण भारत को अपने प्रभावशाली चाय बागानों पर गर्व है। यह बागान देश के विभिन्न राज्यों में फैले हुए हैं। विदेशी पर्यटक भी भारत आकर चाय बागान जाना नहीं भूलते। पर्यटक इन बागानों में हरियाली का मजा उठा सकते हैं। इस बार चलते हैं कुछ ऐसे ही चाय बागानों की सैर पर।

 

दार्जिलिंग- पश्चिम बंगाल

प्राकृतिक सुंदरता है सबसे खास

भारत में सबसे ज्यादा घूमा जाने वाला हिल स्टेशन दार्जीलिंग चाय के बागानों के लिए मशहूर है। यहां भारत की करीबन 25 फीसदी चाय का उत्पादन होता है। मौसम और प्राकृतिक सुंदरता के कारण दार्जिलिंग को भारत का सबसे अच्छा चाय बागान क्षेत्र माना जाता है।

यहां जाने का सही समय मार्च से नवंबर के बीच का है।

बेहतरीन खुशबू के बागान

भारत में यह जगह इसलिए मशहूर है क्योंकि करीबन 100 साल से यहां चाय पैदा की जा रही है। नीलगिरी पहाड़ पर कई तरह की चाय के पौधे हैं, जिनकी खुशबू बेहतरीन है। नीलगिरि के पास है कुनूर, जहां पर पर्यटक कई सुंदर चाय बागानों का मजा ले सकते हैं। यहां हर साल लाखों पर्यटक आते हैं।

मनाते हैं चाय महोत्सव

असम की चाय पूरे विश्व में अपने चमकदार रंग और अच्छे फ्लेवर के लिए मशहूर है। इसे देश का सबसे बड़ा चाय उत्पादक क्षेत्र माना जाता है। यहां के जोरहाट में हर साल एक चाय महोत्सव का आयोजन होता है। जोरहाट और उसके आसपास के इलाके में लगभग 135 से ज्यादा चाय के बागान स्थित है।

चाय का इतिहास

केरल का मशहूर हिल स्टेशन, जहां दूर-दूर तक हरे-भरे चाय के बागान देखे जा सकते हैं। यहां टाटा की चाय की एक बड़ी मैनूफैक्चरिंग कंपनी भी है। यहां इंडिया का पहला टी म्यूजियम नालाथन्नी इस्टेट में है। जहां मुन्नार में शुरु हुए चाय की खेती के पुराने इतिहास के बारे में जानने का मौका मिलता है। यहां घूमने की प्लानिंग कर रहे हैंतो सोमवार को न आएं क्योंकि इस दिन ये बंद होता है। कुंडेल टी प्लांटेशन जो झील से बीचों-बीच स्थित है घूमने की शानदार जगहों में से एक है। ठहरने के लिए टी सेंचुयरी की सुविधा अवेलेबल है। 

यहां आने का सही समय मई से अगस्त होता है। दिसंबर और जनवरी में कड़ाके की ठंड होती है।यहां चाय के साथ ही और भी कई जरूरी चीजों की खेती की जाती है। मसालों से लेकर कॉफी तक का प्रोडक्शन यहां होता है। वैसे ज्यादातर चाय के बागान कालपेट्टा में देखने को मिलते हैं। जहां चेमब्रा पीक से होते हुए इस जगह पर पहुंचा जा सकता है। 4.025 एकड़ में फैले टी इस्टेट में रुकने की सुविधा मिलती है। इसके अलावा टी टूर, टी फैक्ट्री देखना, ट्रैकिंग जैसी एक्टिविटीज को भी एन्जॉय किया जा सकता है।

यहां जाने का सही समय अप्रैल से सितंबर होता है। बरसात के दिनों में प्लानिंग अवॉयड करें।