JA Teline V - шаблон joomla Форекс

आनंदी बाई जोशी : पहली भारतीय महिला डॉक्‍टर: गूगल ने दी श्रद्धांजलि

World
Typography

नई दिल्ली। पूना शहर में जन्मी आनंदीबाई जोशी पहली भारतीय महिला थीं, जिन्होंने डॉक्टरी की डिग्री ली थी। जिस दौर में महिलाओं की शिक्षा भी दूभर थी, ऐसे में विदेश जाकर डॉक्टरी की डिग्री हासिल करना अपने-आप में एक मिसाल है। उनका विवाह नौ साल की अल्पायु में उनसे करीब 20 साल बड़े गोपालराव से हो गया था।

जब 14 साल की उम्र में वे माँ बनीं और उनकी एकमात्र संतान की मृत्यु 10 दिनों में ही गई तो उन्हें बहुत बड़ा आघात लगा। अपनी संतान को खो देने के बाद उन्होंने यह प्रण किया कि वह एक दिन डॉक्टर बनेंगी और ऐसी असमय मौत को रोकने का प्रयास करेंगी। उनके पति गोपालराव ने भी उनको भरपूर सहयोग दिया और उनकी हौसलाअफजाई की।

आनंदीबाई जोशी का व्यक्तित्व महिलाओं के लिए प्रेरणास्त्रोत है। उन्होंने सन् 1886 में अपने सपने को साकार रूप दिया। जब उन्होंने यह निर्णय लिया था, उनके समाज में काफी आलोचना हुई थी कि एक शादीशुदा हिंदू स्त्री विदेश (पेनिसिल्वेनिया) जाकर डॉक्टरी की पढ़ाई करे। लेकिन आनंदीबाई एक दृढ़निश्चयी महिला थीं और उन्होंने उन आलोचनाओं की तनिक भी परवाह नहीं की। यही वजह है कि उन्हें पहली भारतीय महिला डॉक्टर होने का गौरव प्राप्त हुआ।

गूगल इंडिया ने बुधवार को डूडल के जरिए पहली भारतीय महिला डॉक्टर रुखमाबाई को उनके 153वीं जयंती पर श्रद्धांजलि अर्पित की है। डूडल पर गूगल के ब्लॉग पोस्ट ने बताया, ‘आज का डूडल डिजायनर श्रेया गुप्ता ने बनाया है। उन्होंने ओजस्वी महिला के तौर पर रुख्माबाई को चित्रित किया है। और उनके आस-पास मरीजों की सेवा में लगे कर्मचारियों को भी दिखाया गया है।‘ रुख्माबाई भारत की पहली महिला डॉक्टर थीं। डॉक्टर रखमाबाई का जन्म 22 नवंबर 1864 को हुआ था। मात्र 11 साल की उम्र में ही उनकी शादी दादाजी भीकाजी से कर दी गई थी। बाद में 1884 में उनके पति ने बॉम्बे हाई कोर्ट में याचिका दायर कर दी। कोर्ट ने रुख्माबाई से कहा कि वह या तो अपने पति के साथ रहें या जेल जाएं। रुख्माबाई ने जवाब दिया कि वह जेल जाना ज्यादा उचित समझती हैं। लगातार विभिन्न पत्रों में लिखने वाली रुख्माबाई ने इच्छा जताई कि वह चिकित्सा की पढ़ाई करना चाहती हैं तो उनके लिए फंड की व्यवस्था की गई और वह लंदन के स्कूल ऑफ मेडिसिन से योग्य फिजिशियन बनकर लौटीं। एक डॉक्टर के अलावा उन्होंने समाजसेवी के रूप में भी समाज के हित के लिए काम किए।