यूपी की महिलाओं के हुनर की राखियों की ऑनलाइन धूम, 5 हजार स्वयं सहायता समूहों ने संभाला मोर्चा
ई-सरस समेत कई ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म पर बढ़ी मांग, राखियों के जरिए ग्रामीण महिला उद्यमिता को मिल रही नई पहचान
लखनऊ। इस रक्षाबंधन भाइयों की कलाइयों पर सजेगी सिर्फ राखी नहीं, बल्कि उत्तर प्रदेश की ग्रामीण महिलाओं के हुनर, मेहनत और आत्मनिर्भरता की कहानी भी नजर आएगी। उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य के निर्देशों के क्रम में उत्तर प्रदेश राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन से जुड़ी करीब 5,000 स्वयं सहायता समूहों की महिलाएं आकर्षक और हस्तनिर्मित राखियों के निर्माण में जुटी हैं।
प्रदेश के प्रयागराज, वाराणसी, बागपत, बुलंदशहर, लखीमपुर खीरी, गोरखपुर, उन्नाव, शामली, जौनपुर और मिर्जापुर समेत लगभग सभी जिलों में महिलाएं पारंपरिक शिल्प और आधुनिक डिजाइनों को मिलाकर राखियां तैयार कर रही हैं। इन राखियों की स्थानीय बाजारों के साथ-साथ ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर भी अच्छी मांग देखने को मिल रही है।
राखी से बढ़ेगी महिलाओं की आमदनी
उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने कहा कि स्वयं सहायता समूहों की महिलाओं द्वारा राखी निर्माण से उनकी आय में वृद्धि और महिला उद्यमिता को बढ़ावा मिलेगा। साथ ही इन उत्पादों में ग्रामीण संस्कृति, भारतीय परंपरा और महिलाओं की रचनात्मकता की झलक भी देखने को मिलेगी।
उन्होंने कहा कि यह पहल सरकार के 'लोकल फॉर लोकल' के संकल्प को मजबूत करने के साथ-साथ आत्मनिर्भर उत्तर प्रदेश की दिशा में भी महत्वपूर्ण कदम है।
ई-सरस पर फर्रुखाबाद और नोएडा की राखियों की बढ़ी मांग
मिशन निदेशक अरुण कुमार ने बताया कि उत्तर प्रदेश राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन का फोकस स्वयं सहायता समूहों के उत्पादों को बेहतर और व्यापक बाजार उपलब्ध कराने पर है। इसके लिए ई-सरस समेत विभिन्न ई-कॉमर्स और डिजिटल प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल किया जा रहा है।
उन्होंने बताया कि विशेष रूप से फर्रुखाबाद और नोएडा के स्वयं सहायता समूहों द्वारा तैयार राखियों की ई-सरस पर लगातार अच्छी मांग मिल रही है।
पारंपरिक कला के साथ आधुनिक डिजाइन
वाराणसी, प्रयागराज, गोरखपुर, मिर्जापुर, अयोध्या, बाराबंकी, सीतापुर, कानपुर, आगरा, बरेली, झांसी, फर्रुखाबाद और नोएडा समेत कई जिलों की महिलाएं राखी निर्माण में जुटी हैं।
इन राखियों में स्थानीय कला, पारंपरिक शिल्प और आधुनिक रचनात्मकता का अनोखा मेल देखने को मिल रहा है। महिलाओं द्वारा तैयार किए जा रहे उत्पादों को बाजार की पसंद के अनुरूप आकर्षक डिजाइन, पैकेजिंग और ब्रांडिंग के साथ ग्राहकों तक पहुंचाया जा रहा है।
ऑनलाइन बाजार ने बढ़ाया दायरा
डिजिटल प्लेटफॉर्म से जुड़ने के बाद स्वयं सहायता समूहों के उत्पाद अब केवल स्थानीय बाजारों तक सीमित नहीं हैं। ई-सरस और अन्य ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म के माध्यम से महिलाएं प्रदेश के बाहर भी ग्राहकों तक पहुंच बना रही हैं।
ऑनलाइन बिक्री से महिलाओं को नए ग्राहक मिलने के साथ अपने उत्पादों की ब्रांडिंग, पैकेजिंग और मार्केटिंग को बेहतर करने का अवसर भी मिल रहा है। इससे ग्रामीण महिलाओं को अपने छोटे उद्यमों को बड़े कारोबार में बदलने की राह मिल रही है।
त्योहार बना रोजगार और उद्यमिता का अवसर
रक्षाबंधन जैसे त्योहार स्वयं सहायता समूहों की महिलाओं के लिए अपने पारंपरिक हुनर को आय और उद्यमिता के अवसर में बदलने का माध्यम बन रहे हैं। राखियों की बढ़ती मांग यह दिखाती है कि ग्रामीण महिलाओं के गुणवत्तापूर्ण उत्पादों में बड़े बाजार तक पहुंचने की क्षमता है।
राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन द्वारा समूहों के उत्पादों को ई-सरस, ई-कॉमर्स, डिजिटल और ऑफलाइन बाजारों से जोड़ने के लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। इससे महिलाओं को उत्पादन से लेकर पैकेजिंग, ब्रांडिंग और विपणन तक पूरी प्रक्रिया में आगे बढ़ने का अवसर मिल रहा है।
इस रक्षाबंधन स्वयं सहायता समूहों की महिलाओं के हाथों से तैयार राखियां भाई-बहन के प्रेम के साथ-साथ महिला सशक्तीकरण, आत्मनिर्भरता और ग्रामीण उद्यमिता की नई कहानी भी लिखेंगी।
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