सरकार और जनता के बीच पारदर्शी संवाद से अफवाहों और गलतफहमियों पर लगेगी रोक: विशाल सिंह

लखनऊ। सूचना निदेशक विशाल सिंह ने कहा कि सरकार और जनता के बीच संवाद जितना पारदर्शी और प्रभावी होगा, अफवाहों और गलतफहमियों के लिए जगह उतनी ही कम होगी। सूचना के इस दौर में केवल तेजी नहीं, तथ्य भी जरूरी हैं। सोशल मीडिया पर किसी खबर या वीडियो को साझा करने से पहले उसकी सत्यता को जरूर जांच लेना चाहिए। सिंह शनिवार को नेशनल यूनियन ऑफ़ जर्नलिस्ट की ओर से आयोजित कार्यशाला को बतौर मुख्य अतिथि संबोधित कर रहे थे।
सूचना एंव जनसम्पर्क विभाग के सभागार में ‘‘पत्रकारों में पत्रकारीय समझ‘‘ विषय पर आयोजित इस कार्यशाला को सम्बोधित करते हुए उन्होंने बांगलादेश, नेपाल और फ्रांस के संदर्भ में सोशल मीडिया के दुरुपयोग पर प्रकाश डालते हुए कहा कि ऐसी घटनाओं के वीडियो प्रसारित किए जाने जिनकी वास्तविकता संदिग्ध थी, और FOMO (पीछे छूट जाने का डर) के कारण लोगों की बढ़ती भागीदारी के कारण ऐसी स्थिति उत्पन्न हुई। उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि सरकार और जनता के बीच कम्युनिकेशन गैप ऐसी परिस्थितियों को गंभीर बनाने में भूमिका निभा सकता है।
कार्यक्रम के विशिष्ट अतिथि आईटी विशेषज्ञ एवं टीसीएस के प्रोग्राम डायरेक्टर डॉ. अजय सिंह ने भारत की अर्थव्यवस्था में सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी (ICT) क्षेत्र के योगदान को रेखांकित किया। सिंह ने कहा कि सोशल मीडिया के वैश्विक परिदृश्य में भारत की भागीदारी लगातार महत्वपूर्ण होती जा रही है। दुनिया में यूट्यूब के करीब 265 करोड़ सब्सक्राइबर हैं, जिनमें लगभग 50 करोड़ भारतीय हैं। यानी वैश्विक यूट्यूब सब्सक्राइबर आधार में भारत की हिस्सेदारी करीब 19 प्रतिशत है। इसी तरह, फेसबुक के दुनियाभर में लगभग 300 करोड़ यूजर हैं, जिनमें करीब 40 करोड़ भारतीय हैं। इस प्रकार वैश्विक फेसबुक यूजर आधार में भारत की हिस्सेदारी लगभग 13 प्रतिशत है। वहीं, इंस्टाग्राम के कुल यूजर में भी भारतीयों की हिस्सेदारी करीब 16 प्रतिशत बताई जाती है।

उन्होंने कहा कि ये आंकड़े दर्शाते हैं कि भारत सोशल मीडिया के क्षेत्र में एक बड़े यूजर बेस और डेटा स्रोत के रूप में उभर रहा है। यह स्थिति केवल डिजिटल पहुंच तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके साथ आर्थिक क्षमता और व्यापक जनसंपर्क की संभावनाएं भी जुड़ी हैं। सोशल मीडिया पर भारतीय यूजर्स की बड़ी संख्या देश को डिजिटल अर्थव्यवस्था, ऑनलाइन कारोबार और वैश्विक स्तर पर संचार के लिहाज से महत्वपूर्ण बनाती है। उन्होंने ने कहा कि पत्रकारों के सामने बोलना आसान नहीं है। इसकी दो वजहें हैं। पहली, पत्रकारों का जानकार और अध्ययनशील होना, और दूसरी, उनका सवाल पूछने का स्वाभाविक कौशल। उन्होंने कहा कि पत्रकारिता की बुनियादी ताकत कौन, क्या, कब, कहां, क्यों और कैसे जैसे सवालों के जरिए किसी विषय की गहराई तक पहुंचने में है। पत्रकारों की जिज्ञासा और सवाल पूछने की क्षमता ही उन्हें तथ्यों की तह तक जाने के लिए प्रेरित करती है।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए वरिष्ठ पत्रकार प्रभात रंजन दीन ने कहा कि पत्रकारिता में केवल तकनीकी दक्षता और सूचनाओं का संकलन पर्याप्त नहीं है, बल्कि पत्रकारीय चेतना को भी जागृत करना जरूरी है। इसके लिए पत्रकारों को अपनी संवेदनशीलता, वैचारिक गहराई और समाज को समझने की क्षमता विकसित करनी होगी। उन्होंने टेलीपैथी के माध्यम से पत्रकारीय चेतना को जागृत करने की बात कहते हुए पत्रकारिता में अंतर्मन की सजगता और विचारों की स्पष्टता के महत्व पर जोर दिया।
उन्होंने पत्रकारिता की तुलना शास्त्रीय संगीत से करते हुए कहा कि जिस तरह शास्त्रीय संगीत में निपुणता हासिल करने के लिए नियमित रियाज, अनुशासन और निरंतर साधना की आवश्यकता होती है, उसी तरह पत्रकारिता में भी लगातार अध्ययन, अभ्यास और आत्ममंथन जरूरी है। पत्रकारिता केवल खबर लिखने या सूचनाएं प्रसारित करने का माध्यम नहीं, बल्कि एक ऐसी साधना है, जिसमें तथ्यों की समझ, भाषा पर पकड़, सामाजिक सरोकार और निष्पक्ष दृष्टिकोण की अहम भूमिका होती है।
प्रभात रंजन दीन ने कहा कि पत्रकारिता की समझ विकसित करना केवल पत्रकारों की ही जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि संपादकों को भी इसके प्रति गंभीर और सजग रहना चाहिए। संपादकों का दायित्व है कि वे पत्रकारिता के मूल्यों, उसकी वैचारिक प्रतिबद्धता और सामाजिक जिम्मेदारियों को समझें तथा अपनी टीम को सही दिशा दें। उन्होंने पत्रकारिता में निरंतर सीखने, चिंतन करने और पेशेवर जिम्मेदारियों के प्रति सजग रहने की आवश्यकता पर बल दिया। कार्यक्रम को एआई विशेषज्ञ व आईआईटी कानपुर के एलुमनी अम्बरीश श्रीवास्तव, पूर्व सूचना आयुक्त वीरेन्द्र सक्सेना, वरिष्ठ पत्रकार प्रमोद गोस्वामी, एनयूजे के प्रदेश अध्यक्ष सुरेन्द्र दुबे, ने सम्बोधित किया।
लेखक के बारे में
Santosh Kumar Singh
श्री सिंह ‘विजुअल लाइव’ मासिक पत्रिका एवं न्यूज पोर्टल के संपादक के रूप में पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। वर्ष 2004 से उन्होंने प्रिंट और डिजिटल मीडिया में अपनी सेवाएं देते हुए पत्रकारिता का लंबा अनुभव अर्जित किया है। लखनऊ से प्रकाशित हिन्दी दैनिक राष्ट्रीय सहारा, डेली न्यूज एक्टिविस्ट, राष्ट्रीय स्वरूप और भारत प्रतिदिन सहित विभिन्न मीडिया संस्थानों के लिए उन्होंने रिपोर्टिंग की है। प्रधानमंत्री और राष्ट्रपति के लखनऊ आगमन से लेकर राजनीति, प्रशासन, जनसरोकार और शहर की महत्वपूर्ण घटनाओं की रिपोर्टिंग में उनकी सक्रिय भूमिका रही है। श्री सिंह की विशेष रुचि खोजी पत्रकारिता और डिजिटल माध्यमों के प्रभावी इस्तेमाल में है। इंटरनेट आधारित शोध, सूचना के स्रोतों की पड़ताल और खबर की बारीकियों तक पहुंचने की उनकी कार्यशैली उन्हें अलग पहचान देती है। बदलते मीडिया परिदृश्य में वे तथ्यपरक, विश्वसनीय और जनसरोकार से जुड़ी पत्रकारिता को प्राथमिकता देते हैं। पत्रकारिता के साथ उन्हें संगीत और यात्रा में विशेष रुचि है। उनका मानना है कि एक पत्रकार के लिए जिज्ञासा, निरंतर सीखने की प्रवृत्ति और तथ्यों के प्रति ईमानदारी सबसे महत्वपूर्ण गुण हैं। Santosh Kumar Singh की सभी खबरें देखें →
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