लखनऊ में 265 करोड़ से बनेगा आधुनिक बस टर्मिनल, 18 शहरों में चलेंगी इलेक्ट्रिक बसें

नगर विकास मंत्री ए.के. शर्मा ने कैबिनेट फैसलों की दी जानकारी, नगर पालिकाओं में भी लागू होंगी भवन निर्माण एवं विकास उपविधियां-2025
लखनऊ। उत्तर प्रदेश में नगरीय परिवहन व्यवस्था को मजबूत करने और शहरी विकास को व्यवस्थित बनाने के लिए कैबिनेट ने कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए हैं। नगर विकास एवं ऊर्जा मंत्री ए.के. शर्मा ने कैबिनेट बैठक के बाद प्रेस वार्ता में बताया कि लखनऊ की वृंदावन योजना में पीपीपी मॉडल पर आधुनिक बस टर्मिनल और वाणिज्यिक क्षेत्र विकसित किया जाएगा। इसके साथ ही प्रदेश के 18 शहरों में ग्रॉस कॉस्ट कॉन्ट्रैक्ट (जीसीसी) मॉडल पर इलेक्ट्रिक बसें चलाई जाएंगी। नगर पालिकाओं और नगर पंचायतों में भवन निर्माण एवं विकास उपविधियां-2025 लागू करने का भी निर्णय लिया गया है।
वृंदावन योजना में 265 करोड़ रुपये से बनेगा बस टर्मिनल
ए.के. शर्मा के अनुसार, लखनऊ की वृंदावन योजना स्थित पी-4 पार्किंग में लगभग सात एकड़ क्षेत्रफल पर एकीकृत सिटी बस टर्मिनल और वाणिज्यिक क्षेत्र विकसित किया जाएगा। इस परियोजना पर करीब 265 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है और इसे सार्वजनिक-निजी भागीदारी (पीपीपी) मॉडल पर तैयार किया जाएगा।
इस परियोजना का उद्देश्य नगरीय परिवहन व्यवस्था को सुदृढ़ करना, यातायात प्रबंधन में सुधार करना और यात्रियों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराना है।
प्रदेश के 18 शहरों में चलेंगी इलेक्ट्रिक बसें
कैबिनेट के फैसले के तहत प्रदेश के 18 शहरों में जीसीसी मॉडल पर इलेक्ट्रिक बसों का संचालन किया जाएगा। इनमें आगरा, अलीगढ़, अयोध्या, बरेली, फिरोजाबाद, गाजियाबाद, गोरखपुर, झांसी, कानपुर, लखनऊ, मथुरा-वृंदावन, मेरठ, मुरादाबाद, प्रयागराज, शाहजहांपुर, सहारनपुर, वाराणसी और नोएडा (जेवर) शामिल हैं।
इस मॉडल के तहत वाणिज्यिक संचालन शुरू होने के बाद अनुबंध की अवधि 12 वर्ष होगी। बसों के किराये और उपयोगकर्ता शुल्क का निर्धारण सरकार करेगी। इस व्यवस्था से नगरीय सार्वजनिक परिवहन को बढ़ावा देने और इलेक्ट्रिक बसों के संचालन को व्यवस्थित करने का लक्ष्य है।
नगर पालिकाओं में लागू होंगी भवन निर्माण उपविधियां-2025
नगर विकास मंत्री ने बताया कि विकास प्राधिकरणों के बाहर स्थित नगर पालिकाओं और नगर पंचायतों में भवन निर्माण एवं विकास संबंधी उपविधियां लागू नहीं होने से अनियोजित विकास और अनधिकृत निर्माण जैसी समस्याएं सामने आती हैं।
इन समस्याओं को दूर करने के लिए उत्तर प्रदेश नगर पालिका अधिनियम, 1916 में संशोधन के माध्यम से नगर पालिकाओं को भूमि उपयोग, मास्टर प्लान, भवन अनुज्ञा और विकास नियंत्रण से जुड़ी शक्तियां देने का निर्णय लिया गया है। इसके साथ ही विकास प्राधिकरणों में लागू भवन निर्माण एवं विकास उपविधियां-2025 को नगर पालिकाओं और नगर पंचायतों में भी लागू किया जाएगा।
सुनियोजित शहरी विकास पर जोर
सरकार के अनुसार, इन फैसलों से नगर पालिका क्षेत्रों में भवन निर्माण और विकास संबंधी गतिविधियों को नियमानुसार संचालित करने में मदद मिलेगी। साथ ही, शहरी परिवहन सुविधाओं में सुधार और नगरीय क्षेत्रों में बेहतर बुनियादी सुविधाओं के विकास का रास्ता खुलेगा।
लेखक के बारे में
Ashutosh Kumar Sharma
मूल रूप से वाराणसी, उत्तर प्रदेश के रहने वाले आशुतोष कुमार शर्मा पेशे से स्कूल प्रधानाचार्य हैं। पिछले 8 वर्षों से पत्रकारिता एवं मीडिया क्षेत्र से जुड़े श्री शर्मा की डिजिटल मीडिया, नई तकनीकों और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स में विशेष रुचि है। उनका मानना है कि तकनीक और मीडिया का समन्वय ही भविष्य की पत्रकारिता की दिशा तय करेगा। मीडिया को समाज का चौथा स्तंभ मानते हुए वे सच्चाई, तथ्यपरकता और जनसरोकार से जुड़े मुद्दों को सामने लाने के लिए प्रतिबद्ध हैं। Ashutosh Kumar Sharma की सभी खबरें देखें →
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