IAS की कुर्सी छोड़ अब राजनीति में उतरेंगी दिव्या मित्तल, बोलीं- यूपी मेरी कर्मभूमि, यहीं से शुरू करूंगी नई पारी

लखनऊ। हाल ही में IAS पद से इस्तीफ़ा देकर कर मीडिया की सुर्खियों में आई दिव्या मित्तल अपने अगले कदम का ऐलान कर दिया है। मंगलवार को सुबह 8.33 बजे उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक वीडियो साझा कर इस्तीफे के बाद से लगातार उठ रहे सवालों का उन्होंने जवाब दिया। उन्होंने साफ कहा है कि वह राजनीति में कदम रखेंगी, लेकिन किसी राजनीतिक दल का हिस्सा नहीं बनेंगी। उनका कहना है कि वह आम लोगों के साथ मिलकर राजनीति का ऐसा मंच खड़ा करना चाहती हैं, जिसमें जनता के सवाल और उसकी समस्याएं केंद्र में हों।
करीब 13 साल तक प्रशासनिक सेवा में रहने के बाद IAS पद से इस्तीफा देने वालीं दिव्या मित्तल के इस्तीफा देने के बाद स्वाभाविक रूप से लोगों के मन में यह सवाल था कि आखिर अब वह क्या करेंगी? क्या विदेश जाएंगी, नौकरी करेंगी, पढ़ाएंगी या राजनीति में आएंगी? उन्होंने बताया कि इस सवाल का जवाब देने में उन्हें थोड़ा समय लगा, क्योंकि वह खुद भी अपने नए रास्ते को लेकर तैयारी कर रही थीं। अब उन्होंने अपनी दिशा साफ कर दी है।
यूपी मेरे कर्मभूमि
दिव्या मित्तल ने उत्तर प्रदेश को अपनी कर्मभूमि बताते हुए कहा कि यह प्रदेश उनके लिए महज एक पोस्टिंग या नौकरी करने की जगह नहीं रहा। एक अधिकारी के रूप में जब वह यूपी आई थीं तो यहां के लोगों ने उन्हें परिवार के सदस्य की तरह अपनाया। इसी जुड़ाव की वजह से उन्होंने अपनी राजनीतिक यात्रा की शुरुआत भी उत्तर प्रदेश से करने का फैसला किया है।
https://x.com/divyamittal_ias/status/2104769086446280938?s=46
उन्होंने यूपी के सामाजिक और राजनीतिक इतिहास का उल्लेख करते हुए कहा कि इस प्रदेश ने कई बार देश को दिशा दी है। उनके मुताबिक बदलाव केवल किसी एक व्यक्ति के आने से नहीं होगा। इसके लिए आम लोगों को भी अपनी भूमिका निभानी होगी।
राजनीति क्यों? प्रशासन में देखे कई सवाल
दिव्या मित्तल ने कहा कि उनके लिए राजनीति किसी पद या सत्ता तक पहुंचने का माध्यम नहीं है। वह उन लोगों की आवाज उठाना चाहती हैं, जिनकी बात सरकारी दफ्तरों तक नहीं पहुंच पाती और अगर पहुंच भी जाए तो कई बार सुनी नहीं जाती।
अपने प्रशासनिक अनुभवों को साझा करते हुए उन्होंने कई उदाहरण दिए। उन्होंने मिर्जापुर के लहुरियादह इलाके की एक महिला का जिक्र किया। वहां पानी पहुंचाने के काम के दौरान महिला उनसे मिली थी। दिव्या मित्तल के मुताबिक उन्हें लगा कि महिला पानी, पेंशन या आवास जैसी कोई मांग रखेगी, लेकिन उसने गांव में स्कूल की अगली कक्षा शुरू कराने की बात कही।

महिला ने बताया कि गांव में स्कूल पांचवीं कक्षा तक है और उसके बाद बच्चों की पढ़ाई जारी रखना मुश्किल हो जाता है। दिव्या मित्तल ने बताया कि उन्होंने इस मामले को देखा तो स्कूल के लिए जरूरी प्रक्रिया पूरी होने के बावजूद काम आगे नहीं बढ़ पाया था। उनके मुताबिक, इससे उनके सामने यह सवाल आया कि जब नियम और मंजूरी मौजूद हैं तो फिर काम जमीन पर क्यों नहीं उतरता।
‘समस्या संसाधनों की नहीं, इरादे की भी हो सकती है’
दिव्या मित्तल ने अपने राजस्व विभाग के कार्यकाल का एक और अनुभव साझा किया। उन्होंने बताया कि एक व्यक्ति सरकारी जमीन के पट्टे से जुड़े कागज लेकर उनके पास आया था। पट्टा उसके नाम था, लेकिन जमीन पर उसका वास्तविक कब्जा नहीं था।
मामले की जांच कराई गई तो रिपोर्ट में गड़बड़ी सामने आई। उन्होंने बताया कि संबंधित अधिकारी से बात की गई, रिपोर्ट वापस कराई गई और रिपोर्ट तैयार करने वाले के खिलाफ कार्रवाई भी की गई। उन्होंने यह सवाल भी उठाया कि किसी नागरिक को अपने अधिकार के लिए किसी बड़े व्यक्ति की सिफारिश या फोन की जरूरत क्यों पड़नी चाहिए।
सड़क-पुल और हादसों पर भी उठाए सवाल
पूर्व IAS अधिकारी ने गांवों में सड़क और पुल जैसी बुनियादी सुविधाओं का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने कहा कि आज भी ऐसे अनेक गांव हैं जहां लोगों को सड़क या पुल जैसी सुविधाओं के लिए लंबे समय तक इंतजार करना पड़ता है।
बरसात में संपर्क टूटने और खराब सड़कों के कारण होने वाली दुर्घटनाओं का जिक्र करते हुए उन्होंने सवाल उठाया कि सिर्फ हादसा कहकर जिम्मेदारी खत्म नहीं होनी चाहिए। उनके मुताबिक व्यवस्था में जवाबदेही तय करना जरूरी है।

पेपर लीक से AI तक, युवाओं के भविष्य की चिंता
दिव्या मित्तल ने युवाओं और शिक्षा के मुद्दे को भी अपने राजनीतिक एजेंडे का महत्वपूर्ण हिस्सा बताया। उन्होंने कहा कि एक सामान्य परिवार की लड़की के रूप में उन्हें शिक्षा के जरिए आगे बढ़ने का अवसर मिला, लेकिन आज के युवाओं के सामने कई नई चुनौतियां हैं।
उन्होंने प्रतियोगी परीक्षाओं में पेपर लीक जैसी घटनाओं का उल्लेख करते हुए कहा कि युवा वर्षों तक तैयारी करते हैं और परीक्षा प्रक्रिया में गड़बड़ी होने पर उनकी मेहनत प्रभावित होती है।
इसके साथ ही उन्होंने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी AI के तेजी से बढ़ते प्रभाव का जिक्र किया। उनका सवाल है कि आने वाले समय में जब तकनीक कई तरह के कामों का स्वरूप बदल सकती है तो युवाओं के रोजगार और भविष्य को लेकर अभी से गंभीर चर्चा क्यों नहीं होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि वह दो बेटियों की मां हैं, इसलिए आने वाली पीढ़ी के भविष्य को लेकर उनकी चिंता स्वाभाविक है।
‘किसी एक नेता को बदलना नहीं, राजनीति का तरीका बदलना है’
दिव्या मित्तल ने अपने राजनीतिक उद्देश्य को केवल किसी एक व्यक्ति या नेता को बदलने तक सीमित नहीं बताया। उन्होंने कहा कि उनकी कोशिश राजनीति के काम करने के तरीके में बदलाव की होगी।
उन्होंने अपनी सोच को चार शब्दों में रखा—इरादा, न्याय, फिक्र और सोच।
उनके मुताबिक राजनीति में जनता की समस्याओं को सुनना और उन्हें केवल चुनावी आंकड़ों के रूप में नहीं देखना जरूरी है। उन्होंने स्पष्ट किया कि वह किसी मौजूदा राजनीतिक दल में शामिल नहीं होंगी। उनका कहना है कि आगे की राजनीति का स्वरूप और उसका ढांचा भी जनता के साथ मिलकर तय किया जाएगा।
https://x.com/visuallive_in/status/2104780307501400232?s=46
इस्तीफे के बाद हुई चर्चाओं पर भी बोलीं
दिव्या मित्तल ने अपने इस्तीफे के बाद सोशल मीडिया पर हुई चर्चाओं का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि इस्तीफे के कुछ ही समय बाद एक राजनीतिक दल के प्रदेश प्रवक्ता की ओर से उनके बारे में ऐसी मुलाकात का दावा किया गया, जो उनके अनुसार हुई ही नहीं थी।
उन्होंने इसे सार्वजनिक जीवन में महिलाओं को डराने की कोशिश के रूप में देखा और कहा कि वह ऐसी बातों से डरने वाली नहीं हैं। उनका कहना है कि सोशल मीडिया ट्रोलिंग या व्यक्तिगत आरोपों के जरिए किसी व्यक्ति को सार्वजनिक जीवन में आने से रोकने की कोशिश नहीं होनी चाहिए।
पैसा, बाहुबल और जातीय समीकरण पर भी साफ रुख
राजनीति में आने के साथ चुनाव लड़ने के लिए पैसे, बाहुबल और जातीय समीकरण की जरूरत जैसे सवालों पर भी दिव्या मित्तल ने अपनी बात रखी।
उन्होंने कहा कि उनके पास चुनावी राजनीति के लिए कोई बड़ा आर्थिक संसाधन या बाहुबल नहीं है। साथ ही उन्होंने जाति और धर्म के समीकरणों पर आधारित राजनीति से खुद को अलग रखने की बात कही।
उन्होंने चुनावों में खर्च होने वाले भारी-भरकम धन पर सवाल उठाते हुए कहा कि वह पैसा आखिरकार विकास के संसाधनों से आता है। उनका जोर इस बात पर है कि वही संसाधन सड़क, पुल, स्कूल और आम लोगों की जरूरतों पर खर्च हों।
उन्होंने यह भी कहा कि प्रशासनिक सेवा में रहते हुए उन्होंने किसी व्यक्ति का काम उसकी जाति या धर्म देखकर नहीं किया। राजनीति में भी वह इसी सोच के साथ आगे बढ़ना चाहती हैं।
13 साल की प्रशासनिक सेवा के बाद बदली राह
2013 बैच की उत्तर प्रदेश कैडर की IAS अधिकारी दिव्या मित्तल ने 30 अगस्त को सेवा से इस्तीफा देने की घोषणा की थी। उनका इस्तीफा 15 सितंबर 2026 से प्रभावी हुआ। इससे पहले वह उत्तर प्रदेश के विभिन्न जिलों में जिलाधिकारी की जिम्मेदारी संभाल चुकी थीं और राजस्व विभाग में विशेष सचिव के पद पर भी रहीं।
मिर्जापुर में जिलाधिकारी रहते हुए लहुरियादह गांव तक पेयजल पहुंचाने की पहल ने उन्हें व्यापक पहचान दिलाई थी। अब प्रशासनिक सेवा छोड़ने के बाद उनके नए राजनीतिक सफर की शुरुआत उत्तर प्रदेश से होगी।
हालांकि दिव्या मित्तल ने किसी राजनीतिक दल में शामिल होने के बजाय जनता के साथ मिलकर एक अलग राजनीतिक मंच खड़ा करने की बात कही है। ऐसे में उनकी आगे की राजनीतिक रणनीति और इस मंच का स्वरूप आने वाले दिनों में स्पष्ट होगा।
लेखक के बारे में
Santosh Kumar Singh
श्री सिंह ‘विजुअल लाइव’ मासिक पत्रिका एवं न्यूज पोर्टल के संपादक के रूप में पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। वर्ष 2004 से उन्होंने प्रिंट और डिजिटल मीडिया में अपनी सेवाएं देते हुए पत्रकारिता का लंबा अनुभव अर्जित किया है। लखनऊ से प्रकाशित हिन्दी दैनिक राष्ट्रीय सहारा, डेली न्यूज एक्टिविस्ट, राष्ट्रीय स्वरूप और भारत प्रतिदिन सहित विभिन्न मीडिया संस्थानों के लिए उन्होंने रिपोर्टिंग की है। प्रधानमंत्री और राष्ट्रपति के लखनऊ आगमन से लेकर राजनीति, प्रशासन, जनसरोकार और शहर की महत्वपूर्ण घटनाओं की रिपोर्टिंग में उनकी सक्रिय भूमिका रही है। श्री सिंह की विशेष रुचि खोजी पत्रकारिता और डिजिटल माध्यमों के प्रभावी इस्तेमाल में है। इंटरनेट आधारित शोध, सूचना के स्रोतों की पड़ताल और खबर की बारीकियों तक पहुंचने की उनकी कार्यशैली उन्हें अलग पहचान देती है। बदलते मीडिया परिदृश्य में वे तथ्यपरक, विश्वसनीय और जनसरोकार से जुड़ी पत्रकारिता को प्राथमिकता देते हैं। पत्रकारिता के साथ उन्हें संगीत और यात्रा में विशेष रुचि है। उनका मानना है कि एक पत्रकार के लिए जिज्ञासा, निरंतर सीखने की प्रवृत्ति और तथ्यों के प्रति ईमानदारी सबसे महत्वपूर्ण गुण हैं। Santosh Kumar Singh की सभी खबरें देखें →
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