लखनऊ सहित प्रदेश के भिन्न-भिन्न जनपदों में किया गया श्रद्धांजलि सभा का आयोजन
लखनऊ। उत्तर प्रदेश पावर कॉरपोरेशन निविदा/संविदा कर्मचारी संघ के प्रदेश महामंत्री देवेन्द्र कुमार पाण्डेय नें कहा कि उत्तर प्रदेश पावर कार्पोरेशन के अन्तर्गत आउटसोर्सिंग के माध्यम से कार्य कर रहे कर्मचारियों का 107 दिनों में 82 दुर्घटनाएं हुई जिसमें से 44 कर्मचारियों की मृत्यु एवं 38 गंभीर रूप से घायल हो गए जिसको ध्यान में रखकर संगठन द्वारा मृतक कर्मचारियों कि आत्मा कि शान्ति के लिए लखनऊ के इको गार्डन सहित प्रदेश के भिन्न-भिन्न जनपदों में श्रद्धांजलि सभा का आयोजन किया गया।
श्रद्धांजलि सभा को संबोधित करते हुए संगठन पदाधिकारियों ने कहा कि पावर कार्पोरेशन प्रबंधन द्वारा अपने स्वयं के आदेश दिनांक 15 मई 2017 का उलंघन कर लगभग 25000 बिजली आउटसोर्स कर्मचारियों कि छटनी कर दी गई है जिसके कारण कार्य कर रहे कर्मचारियों पर कार्य का अधिक भार पड़ने से जहां एक तरफ इन कर्मचारियों कि बड़े पैमाने पर दुर्घटनाओं में मौतें हो रही है, वहीं उपभोक्ताओं को बिजली संकट का सामना करना पड़ रहा है।जिस पर पावर कार्पोरेशन प्रबंधन व उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा ध्यान नहीं दिया जा रहा है जिससे कर्मचारियों में भारी आक्रोश व्याप्त है।
संगठन पदाधिकारियों ने कहा कि पावर कार्पोरेशन प्रबंधन द्वारा लेबर का अनुबंध कर लाइनमैन, उपकेंद्र परिचालन जैसे घातक व तकनीकी कार्य कराया जा रहा है तथा कर्मचारियों कि कमी के कारण अकुशल कर्मचारियों से नियम विरुद्ध लाइन का कार्य कराया जा रहा है।
संगठन पदाधिकारियों ने कहा कि उर्जा मंत्री के निर्देश पर पावर कार्पोरेशन प्रबन्धन द्वारा आदेश निर्गत किया गया था जिसमें आउटसोर्स कर्मचारियों का कार्य के अनुरूप अनुबंध करने, वेतन रुपया 18000 निर्धारित करने, घायल कर्मचारियों का कैशलेश इलाज कराने, घायल कर्मचारियों द्वारा उपचार में व्यय की गई धनराशि को संविदाकारों के बिल से काटकर कर भुगतान करने एवं मार्च 2023 में हटाए गए कर्मचारियों को कार्य पर वापस लेने कि बात कही गई है किन्तु पावर कार्पोरेशन प्रबन्धन द्वारा अपने स्वयं के आदेश का पालन नहीं किया जा रहा है। जिससे कर्मचारियों में भारी आक्रोश व्याप्त है।
संगठन पदाधिकारियों ने आरोप लगाया कि उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा नव गठित आउटसोर्स सेवा निगम में पावर कॉरपोरेशन प्रबन्धन द्वारा बिजली आउटसोर्स कर्मचारियों के शामिल होने का विरोध किया जा रहा है।
संगठन पदाधिकारियों ने कहा कि पावर कार्पोरेशन प्रबन्धन द्वारा महिला कर्मचारियों को उनके मूल भूत सुविधाओं से वंचित किया जा रहा है तथा श्रमायुक्त द्वारा निर्धारित अवकाश नहीं दिया जा रहा है।
संगठन पदाधिकारियों द्वारा मांग की गई कि आउटसोर्सिंग के माध्यम से कार्य कर रहे कर्मचारियों का कार्य के अनुरूप अनुबंध किया जाय, वेतन रुपया 18000 निर्धारित किया जाय या समान कार्य का समान वेतन दिया जाय, मानक के अनुरूप कर्मचारियों कि तैनाती किया जाए, दुर्घटनाओं पर प्रभावी अंकुश लगाया जाय, आउटसोर्स सेवा निगम में शामिल होने का विरोध न किया जाय, हटाए गए कर्मचारियों को कार्य पर वापस लिया जाए, घायल कर्मचारियों का कैशलेश इलाज कराया जाए, महिला कर्मचारियों को उनके मूल भूत सुविधाओं से वंचित न किया जाए, 60 वर्ष कि आयु तक कर्मचारियों को कार्य करने कि अनुमति दी जाय, श्रमायुक्त द्वारा निर्धारित अवकाश दिया जाय,मीटर रीडरों को अन्य आउटसोर्स कर्मचारियों कि भांति वेतन, ई पी एफ व ई एस आई का लाभ दिया जाए तथा कहा कि पावर कार्पोरेशन प्रबंधन द्वारा समय रहते समस्याओं का समाधान नहीं किया गया तो बड़े पैमाने पर संगठन को आंदोलन करने के लिए बाध्य होना पड़ेगा।
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