जॉब कार्ड में उम्र और फोटो का खेल! 70 साल के बुजुर्ग को दिखाया 45 का, भुगतान पर उठे सवाल

आजमगढ़। ग्रामीणों को रोजगार उपलब्ध कराने और मजदूरी का भुगतान सुनिश्चित करने के लिए चलाई जा रही वीबी-जी रामजी योजना के तहत जॉब कार्ड बनाने की प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़े हुए हैं। उत्तर प्रदेश के आजमगढ़ जिले में जॉब कार्डों में फोटो और उम्र से जुड़ी कथित अनियमितताएं सामने आई हैं। कहीं एक ही तस्वीर का इस्तेमाल कई जॉब कार्डों पर किया गया, तो कहीं महिला के कार्ड पर पुरुष की फोटो लगाई गई। एक मामले में 70 वर्षीय बुजुर्ग की उम्र जॉब कार्ड में 45 वर्ष दर्ज होने की बात सामने आई है। इन कार्डों पर मजदूरी की हाजिरी और भुगतान दर्ज होने से सत्यापन व्यवस्था पर सवाल उठ रहे हैं।
एक फोटो, कई जॉब कार्ड; खातों में हजारों रुपये का भुगतान
अमर उजाला की रिपोर्ट के मुताबिक, आजमगढ़ के ठेकमा विकासखंड की अवदह खास ग्राम पंचायत में सुनीता और रेनू के जॉब कार्डों पर पति के स्थान पर एक ही तस्वीर लगी मिली। दोनों के नाम पर 37-37 दिन की हाजिरी दर्ज होने और करीब 11-11 हजार रुपये भुगतान का उल्लेख है।
इसी ग्राम पंचायत में लीला के जॉब कार्ड पर किसी पुरुष की फोटो लगी होने की बात सामने आई। रिपोर्ट के अनुसार, इस कार्ड पर 38 दिन की हाजिरी दर्ज कर 11,400 रुपये का भुगतान किया गया। पिंटू के जॉब कार्ड पर भी वही तस्वीर होने की जानकारी दी गई है, जो अन्य कार्डों में इस्तेमाल हुई थी।
इन मामलों में यह जांच का विषय है कि फोटो किसने अपलोड की, हाजिरी किस आधार पर दर्ज हुई और भुगतान की प्रक्रिया में किन स्तरों पर सत्यापन किया गया।
70 साल के बुजुर्ग की उम्र 45 वर्ष दर्ज
रिपोर्ट में आजमगढ़ के कुडिहर गांव के जुथु का मामला भी सामने आया है। बताया गया है कि उनकी वास्तविक उम्र करीब 70 वर्ष है, जबकि जॉब कार्ड में उम्र 45 वर्ष दर्ज की गई। इस कार्ड पर 73 दिन की हाजिरी और 21,900 रुपये भुगतान का उल्लेख है।
इसी तरह अन्य ग्राम पंचायतों में भी उम्र और फोटो में अंतर होने के मामले सामने आए हैं। कुछ कार्डों पर दर्ज उम्र और तस्वीरों के बीच स्पष्ट अंतर होने की बात कही गई है। हालांकि, प्रत्येक मामले में वास्तविक उम्र, काम किए जाने और भुगतान की पुष्टि संबंधित सरकारी रिकॉर्ड के सत्यापन से ही हो सकेगी।
महिला के कार्ड पर पुरुष की फोटो, उम्र में भी हेरफेर के आरोप
आजमगढ़ के तरवां विकासखंड की ऐरा खुर्द ग्राम पंचायत में प्रियंका कुमारी के जॉब कार्ड पर किसी पुरुष की फोटो होने की जानकारी सामने आई है। रिपोर्ट में उषा और उनके बेटे रोशन गुप्ता की उम्र के विवरण के साथ 70 दिन की हाजिरी और 21 हजार रुपये भुगतान का भी उल्लेख है।
बनगांव में आशा नाम की बुजुर्ग महिला को जॉब कार्ड पर 19 वर्ष का दिखाए जाने और 54 दिन की हाजिरी के आधार पर 16,200 रुपये भुगतान की बात कही गई है। पवई विकासखंड की समइसा ग्राम पंचायत में भी उम्र से जुड़ी गड़बड़ियों का जिक्र किया गया है।
आजमगढ़ से मऊ तक उठे सवाल
जॉब कार्डों में उम्र और फोटो से जुड़ी अनियमितताओं की रिपोर्ट मऊ जिले से भी सामने आई है। रानीपुर विकासखंड की चकिया ग्राम पंचायत में एक लाभार्थी की उम्र 80 वर्ष दर्ज होने, जबकि दूसरे व्यक्ति की उम्र वास्तविक उम्र से कम दर्शाए जाने की जानकारी दी गई है।
इन मामलों से योजना के तहत लाभार्थियों की पहचान, जॉब कार्ड जारी करने और मजदूरी भुगतान से पहले होने वाले सत्यापन की प्रक्रिया पर सवाल उठ रहे हैं।
अधिकारियों ने क्या कहा?
रिपोर्ट के मुताबिक, पवई के खंड विकास अधिकारी संतोष कुमार ने कहा कि जॉब कार्डों का समय-समय पर सत्यापन कराया जाता है और फर्जी कार्डों को हटाया जाता है। यदि किसी ग्राम पंचायत में गड़बड़ी पाई जाती है, तो संबंधित कर्मचारी के खिलाफ जांच कर कार्रवाई की जाएगी।
संयुक्त विकास आयुक्त रामबाबू त्रिपाठी के अनुसार, जॉब कार्ड के लिए काम की मांग करने वाले पात्र व्यक्ति का पंजीकरण किया जाता है। कार्ड बनाते समय न्यूनतम आयु 18 वर्ष होनी चाहिए और अधिकतम आयु की सीमा निर्धारित नहीं है। उन्होंने कहा कि कार्ड आधार से जुड़े हैं और अनियमितता मिलने पर जांच कराई जाएगी।
जांच से सामने आएगी पूरी सच्चाई
जॉब कार्ड में गलत फोटो या उम्र दर्ज होना अपने आप में गंभीर मामला है, लेकिन यह तय करने के लिए कि जानबूझकर फर्जीवाड़ा किया गया या रिकॉर्ड तैयार करने में लापरवाही हुई, दस्तावेजों और भुगतान का सत्यापन जरूरी है। जांच में यह भी स्पष्ट होना चाहिए कि संबंधित लोगों ने वास्तव में काम किया था या नहीं, हाजिरी किसने दर्ज की और मजदूरी की रकम किस खाते में गई।
ग्रामीण रोजगार योजना में पारदर्शिता बनाए रखने के लिए जॉब कार्ड, श्रमिकों की पहचान, कार्यस्थल की उपस्थिति और बैंक भुगतान का मिलान महत्वपूर्ण है। अब निगाह इस बात पर रहेगी कि सामने आए मामलों की जांच कितनी तेजी से होती है और दोषी पाए जाने वालों पर क्या कार्रवाई की जाती है।
लेखक के बारे में
Anup Sharma
मूल रूप से वाराणसी, उत्तर प्रदेश के रहने वाले अनूप कुमार शर्मा पेशे से सॉफ्टवेयर इंजीनियर हैं और डिजिटल तकनीक एवं मीडिया के क्षेत्र में विशेष रुचि रखते हैं। तकनीकी दक्षता के साथ डिजिटल प्लेटफॉर्म की कार्यप्रणाली और बदलती मीडिया तकनीकों को समझने में उनकी गहरी दिलचस्पी है। डिजिटल मीडिया के तेजी से बदलते स्वरूप के बीच वे नई तकनीकों, वेब प्लेटफॉर्म, डिजिटल कंटेंट और ऑनलाइन मीडिया टूल्स को सीखने और उन्हें प्रभावी ढंग से इस्तेमाल करने के लिए निरंतर प्रयासरत रहते हैं। तकनीकी सोच और रचनात्मक दृष्टिकोण का बेहतर तालमेल उनकी कार्यशैली की प्रमुख विशेषता है। मीडिया और तकनीक के बीच बढ़ते संबंधों को वे भविष्य की पत्रकारिता का महत्वपूर्ण हिस्सा मानते हैं। तकनीकी नवाचारों के माध्यम से डिजिटल पत्रकारिता को अधिक तेज, प्रभावी और पाठक-केंद्रित बनाने में उनकी विशेष रुचि है। Anup Sharma की सभी खबरें देखें →
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