
अगले तीन वर्षों में अपना एमएसएमई कारोबार दोगुना करेगा टाटा एआईजी
- उत्तर प्रदेश के लिए विशेष एमएसएमई अंडरराइटिंग और क्लेम टीमों के साथ समर्पित ज़ोन की स्थापना
- वित्त वर्ष 2025 में एमएसएमई सेगमेंट में ₹1200 करोड़ से अधिक का ग्रॉस रिटन प्रीमियम, जिसमें राज्य का मजबूत योगदान
- इंजीनियरिंग, लेदर, रिटेल, शिक्षा, कोल्ड स्टोरेज और हार्ड प्लास्टिक सेक्टर में विस्तार पर फोकस
लखनऊ । टाटा एआईजी जनरल इंश्योरेंस, जो एक अग्रणी सामान्य बीमा कंपनी है, ने उत्तर प्रदेश में सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों (एमएसएमई) के लिए जोखिम सुरक्षा को मजबूत करने की अपनी प्रतिबद्धता दोहराई है। कंपनी का विशेष फोकस कानपुर, आगरा, लखनऊ और मुरादाबाद जैसे औद्योगिक केंद्रों पर रहेगा, जिससे एनसीआर में अपनी मौजूदा उपस्थिति को और विस्तार दिया जा सके।
पिछले पांच वर्षों में उत्तर प्रदेश भारत के सबसे तेजी से बढ़ते एमएसएमई इकोसिस्टम के रूप में उभरा है, जहां हर साल औसतन लगभग 13 लाख नए एमएसएमई पंजीकृत हुए हैं। इस वृद्धि को दर्शाते हुए, टाटा एआईजी की राज्य में जारी की गई एसएमई पॉलिसियों की हिस्सेदारी राष्ट्रीय औसत से अधिक है। कंपनी के कुल एसएमई पोर्टफोलियो में उत्तर प्रदेश की हिस्सेदारी लगभग 9% है, जबकि उद्योग स्तर पर यह आंकड़ा लगभग 5% है।
इस बढ़ती मांग को समर्थन देने के लिए, टाटा एआईजी ने वित्त वर्ष 2026 में लखनऊ में उत्तर प्रदेश के लिए एक समर्पित कमर्शियल लाइन्स ज़ोन की स्थापना की है, जिसमें विशेष एसएमई अंडरराइटर्स और क्लेम प्रोफेशनल्स की टीम तैनात की गई है। इसका उद्देश्य राज्य भर के व्यवसायों को तेज़ जोखिम मूल्यांकन, अनुकूलित कवरेज और प्रभावी क्लेम सहायता प्रदान करना है।
उत्तर प्रदेश में लगभग 99% पॉलिसियों की सेवा डिजिटल माध्यम से की जा रही है, जिसमें न्यूनतम या शून्य मैनुअल हस्तक्षेप होता है। यह राज्य के व्यवसायों में बढ़ती तकनीकी स्वीकार्यता को दर्शाता है।
टाटा एआईजी की एसएमई बीमा योजनाएं बदलते जोखिमों को ध्यान में रखते हुए व्यापक और मॉड्यूलर बीमा समाधान प्रदान करती हैं। कंपनी उत्तर प्रदेश के अधिकांश उद्योगों के लिए एमएसएमई पैकेज पॉलिसियां उपलब्ध कराती है, जिनमें लेदर, प्लास्टिक और इंजीनियरिंग वर्कशॉप शामिल हैं। इन पॉलिसियों के तहत एक ही ढांचे में कई जोखिमों को कवर किया जाता है, जैसे – आग, चोरी, नकदी, फिडेलिटी, देयता (लायबिलिटी) और व्यक्तिगत दुर्घटना बीमा।
इसके अलावा कर्मचारियों के मुआवजे, मरीन और ग्रुप हेल्थ इंश्योरेंस के लिए कस्टमाइज्ड पॉलिसियां भी उपलब्ध कराई जाती हैं। ये सभी समाधान प्री-अंडरराइटेड प्रोडक्ट्स, डिजिटल पॉलिसी जारी करने की सुविधा और उन्नत एनालिटिक्स द्वारा समर्थित हैं, जिससे तेजी और सटीकता सुनिश्चित होती है।
इस पहल पर टिप्पणी करते हुए, टाटा एआईजी जनरल इंश्योरेंस के एसएमई प्रमुख श्री प्रणय शाह ने कहा,
“भारत की एमएसएमई विकास गाथा में उत्तर प्रदेश की महत्वपूर्ण भूमिका है। हमारा फोकस राज्य भर के उद्यमों के सामने आने वाले बदलते जोखिमों को समझना और उन्हें भरोसेमंद व आसानी से उपलब्ध बीमा समाधान प्रदान करना है। अपनी उपस्थिति को मजबूत कर और विशेष टीमों में निवेश करके हम एमएसएमई को मजबूती देने, आजीविका की सुरक्षा करने और व्यापार की निरंतरता सुनिश्चित करने का लक्ष्य रखते हैं।
वित्त वर्ष 2025 में, टाटा एआईजी ने पूरे भारत में 7.75 लाख से अधिक एमएसएमई पॉलिसियों का अंडरराइटिंग किया, ग्रुप हेल्थ, ग्रुप एक्सीडेंट और कर्मचारी मुआवजा योजनाओं के तहत 20 लाख से अधिक लोगों को कवर किया और कमर्शियल लाइन्स में 96.7% का क्लेम सेटलमेंट रेशियो हासिल किया।
उत्तर प्रदेश के एमएसएमई समुदाय के लिए हाल की आग की घटनाएं और जलवायु संबंधी व्यवधान व्यापक जोखिम कवरेज के महत्व को रेखांकित करते हैं। घनी औद्योगिक और व्यावसायिक क्लस्टरों में काम कर रहे उद्यमों के लिए अब बीमा एक वैकल्पिक खर्च नहीं, बल्कि वित्तीय तैयारी का एक अनिवार्य स्तंभ बनता जा रहा है।
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