पूर्वांचल से ओवैसी ने किया 2027 के चुनावी समर का शंखनाद, बोले- मोदी जी, नौजवानों के दिमाग और हौसलों को बंद नहीं कर सकते

आजमगढ़ में जनसभा के दौरान केंद्र सरकार पर साधा निशाना, चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति से लेकर मुस्लिम बेटियों के हिजाब तक उठाए सवाल
आजमगढ़। ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) के प्रमुख और सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने रविवार को आजमगढ़ के कोटिला के पास स्थित सिरसल क्लब ग्राउंड में आयोजित जनसभा को संबोधित करते हुए केंद्र सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि सरकार दिल्ली को बंद कर सकती है, ट्रेनों को रोक सकती है और युवाओं की आवाज दबाने की कोशिश कर सकती है, लेकिन नौजवानों के दिमाग, उनकी सोच और उनके हौसलों को कैद नहीं कर सकती। ओवैसी ने इसी सभा के जरिए उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव की सियासी जमीन तैयार करने का संदेश दिया।
ओवैसी ने अपने संबोधन में कहा, “मोदी जी, आप दिल्ली को बंद कर सकते हैं, लेकिन नौजवानों के दिमाग को बंद नहीं कर सकते। आप ट्रेन को बंद कर सकते हैं, लेकिन किसी की सोच और फिक्र को बंद नहीं कर सकते। आप बच्चों को उठाकर अपना मेहमान बना सकते हैं, लेकिन उनके हौसलों की उड़ान को कमजोर नहीं कर सकते।” उन्होंने आगे कहा कि हिजाब के कारण मुस्लिम बेटियों को रोकने की कोशिश की जा सकती है, लेकिन उनके जज्बे और हिम्मत को नहीं रोका जा सकता। ओवैसी ने दावा किया कि पुलिस की कार्रवाई भी उन्हें कमजोर नहीं कर पाएगी।
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मुस्लिम युवाओं और बेटियों के अधिकारों का उठाया मुद्दा
अपने भाषण में ओवैसी ने मुस्लिम युवाओं, बच्चों और बेटियों के अधिकारों का मुद्दा उठाते हुए कहा कि किसी भी समुदाय के लोगों की शिक्षा, सोच और आगे बढ़ने की आकांक्षा को सीमित नहीं किया जाना चाहिए। उन्होंने हिजाब का उल्लेख करते हुए मुस्लिम बेटियों के आत्मसम्मान, हिम्मत और शिक्षा के अधिकारों पर जोर दिया। उनके संबोधन का केंद्र यह संदेश रहा कि विरोध और दबाव के बावजूद युवाओं को अपने अधिकारों तथा भविष्य के लिए आवाज उठाते रहना चाहिए।

ओवैसी ने सरकार की नीतियों और पुलिस की कार्रवाई को लेकर भी सवाल उठाए। हालांकि, उनके संबोधन में बच्चों को हिरासत में लिए जाने और अन्य कार्रवाइयों से जुड़े संदर्भों का स्वतंत्र विवरण उपलब्ध नहीं है, इसलिए इन आरोपों की पुष्टि अलग से किए जाने की आवश्यकता है।
चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति के कानून पर भी उठाए सवाल
जनसभा में ओवैसी ने चुनाव आयोग की स्वतंत्रता और चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति प्रक्रिया का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने कहा कि वर्ष 2023 में जब मुख्य चुनाव आयुक्त और अन्य चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति से संबंधित कानून संसद में लाया गया था, तब उन्होंने सांसद इम्तियाज जलील के साथ मिलकर इसका विरोध किया था।
ओवैसी ने कहा कि चुनाव आयोग देश में स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव कराने वाली महत्वपूर्ण संवैधानिक संस्था है। ऐसे में इसकी नियुक्ति प्रक्रिया ऐसी होनी चाहिए, जिससे आयोग की निष्पक्षता और स्वतंत्रता पर सवाल न उठें। उन्होंने कहा कि यदि चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति में प्रधानमंत्री और केंद्र सरकार के मंत्रियों का प्रभाव अधिक रहेगा, तो सरकार के खिलाफ कार्रवाई करने और चुनावी प्रक्रिया की निष्पक्षता बनाए रखने को लेकर संदेह पैदा हो सकता है।

उन्होंने अपने तर्क के जरिए नियुक्ति प्रक्रिया में संतुलन और पारदर्शिता की आवश्यकता पर जोर दिया। ओवैसी की आपत्ति इस बात को लेकर है कि चुनाव आयोग जैसी संस्था के गठन में सरकार का प्रभाव कितना होना चाहिए और विपक्ष की भूमिका किस तरह सुनिश्चित की जानी चाहिए।
कीड़े हटाने के इशारे पर बोले- कीड़े-मकोड़ों के बीच रहने की आदत हो गई है
जनसभा के दौरान एक दिलचस्प वाकया भी सामने आया। बताया गया कि भाषण के बीच बरसाती कीड़े ओवैसी के आसपास आने लगे। इसी दौरान किसी ने उन्हें कीड़ा हटाने का इशारा किया। इस पर ओवैसी ने टिप्पणी करते हुए कहा, “हमें कीड़े-मकोड़ों के बीच रहने की आदत हो गई है, कोई फर्क नहीं पड़ता। उनकी इस टिप्पणी पर सभा में मौजूद लोगों का ध्यान आकर्षित हुआ।
आजमगढ़ से पूर्वांचल की सियासत पर नजर
अल्लामा शिब्ली नोमानी की ऐतिहासिक धरती आजमगढ़ में आयोजित इस जनसभा को AIMIM की आगामी राजनीतिक रणनीति के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव को देखते हुए ओवैसी ने अपने संबोधन में मुस्लिम समुदाय, युवाओं, बेटियों के अधिकारों और चुनाव आयोग की स्वतंत्रता जैसे मुद्दों को प्रमुखता दी। जनसभा के जरिए पार्टी ने पूर्वांचल में अपनी राजनीतिक मौजूदगी को मजबूत करने का संदेश देने की कोशिश की।
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