यूपी में सियासी वीडियो वॉर : BJP-सपा की IT सेल आमने-सामने, अखिलेश का वीडियो से पलटवार

लखनऊ। उत्तर प्रदेश की सियासी जंग अब सड़कों, रैलियों और प्रेस कॉन्फ्रेंस से आगे निकलकर सोशल मीडिया के डिजिटल समरांगण में पहुंच चुकी है। एक्स (X) पर भारतीय जनता पार्टी और समाजवादी पार्टी की आईटी सेल के बीच नैरेटिव की लड़ाई लगातार तेज होती जा रही है। मीम्स, पुराने वीडियो, एडिटेड क्लिप्स, एनिमेशन और एआई-जनरेटेड कंटेंट के जरिए दोनों खेमे एक-दूसरे की राजनीतिक छवि पर लगातार हमला कर रहे हैं। इस डिजिटल लड़ाई में जहां मुद्दों की धार दिखाई देती है, वहीं कई बार व्यक्तिगत हमले और आरोप-प्रत्यारोप भी हावी होते नजर आते हैं।

इसी बढ़ते डिजिटल टकराव के बीच समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने बीजेपी की सोशल मीडिया रणनीति पर सीधे निशाना साधा। लखनऊ में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में अखिलेश यादव ने बीजेपी आईटी सेल से जुड़े बताए जा रहे एक वीडियो को मीडिया के सामने दिखाया और उसके जवाब में अपनी टीम की ओर से तैयार किया गया वीडियो भी चलवाया। खास बात यह रही कि अखिलेश ने जवाबी वीडियो को एक बार नहीं, बल्कि लगातार कई बार दिखाया, ताकि उसमें दिए गए संदेश और सपा के पक्ष को मीडिया के सामने स्पष्ट किया जा सके।
पुराने विवादों से लेकर ‘बुलडोजर मॉडल’ तक
उत्तर प्रदेश में बीजेपी और सपा के बीच डिजिटल लड़ाई कोई नई बात नहीं है, लेकिन चुनावी माहौल के करीब आते ही इसकी आक्रामकता बढ़ती दिखाई दे रही है। बीजेपी समर्थित सोशल मीडिया हैंडल अखिलेश यादव और उनकी सरकार के पुराने फैसलों और विवादों को दोबारा चर्चा में लाने की कोशिश कर रहे हैं।

सरकारी आवास खाली करने के बाद सामने आए ‘टोटी विवाद’ को लेकर पुराने वीडियो और मीम्स सोशल मीडिया पर फिर दिखाई दे रहे हैं। बीजेपी समर्थित डिजिटल नैरेटिव में इसे अखिलेश यादव के शासनकाल से जुड़े सवालों और कथित भ्रष्टाचार के आरोपों से जोड़कर पेश किया जाता है। इसके अलावा अखिलेश यादव के पुराने बयानों के चुनिंदा हिस्सों को छोटे वीडियो और क्लिप के रूप में प्रसारित कर सपा के राजनीतिक नैरेटिव को चुनौती देने की कोशिश की जा रही है।
दूसरी ओर समाजवादी पार्टी की डिजिटल टीम भी बीजेपी और योगी सरकार को घेरने के लिए बेरोजगारी, पेपर लीक, महंगाई, किसानों की समस्याओं और छुट्टा पशुओं जैसे मुद्दों को प्रमुखता से उठा रही है। योगी सरकार की ‘बुलडोजर नीति’ को लेकर सपा समर्थित सोशल मीडिया अकाउंट इसे कानून, संविधान और न्याय से जुड़े सवालों के साथ जोड़कर पेश करते हैं।
अखिलेश ने वीडियो के जरिए दिया जवाब
लखनऊ की प्रेस कॉन्फ्रेंस में अखिलेश यादव ने बीजेपी आईटी सेल की ओर से प्रसारित बताए जा रहे वीडियो को सामने रखते हुए आरोप लगाया कि सत्ता पक्ष वास्तविक मुद्दों से ध्यान हटाने के लिए सोशल मीडिया पर एडिटेड और एआई आधारित कंटेंट का इस्तेमाल कर रहा है।
अखिलेश यादव ने अपनी टीम द्वारा तैयार जवाबी वीडियो को मीडिया स्क्रीन पर लगातार कई बार चलवाया। उनका जोर इस बात पर था कि सोशल मीडिया पर बनाए जा रहे नैरेटिव को केवल वायरल होने के आधार पर सच नहीं माना जाना चाहिए और जनता को पूरे संदर्भ के साथ राजनीतिक दावों को देखना चाहिए।
सपा प्रमुख ने बीजेपी पर युवाओं की बेरोजगारी, पेपर लीक, महंगाई और प्रशासन से जुड़े सवालों का जवाब देने के बजाय सोशल मीडिया प्रचार पर ज्यादा जोर देने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि समाजवादी पार्टी जातीय जनगणना, रोजगार, किसानों और सामाजिक न्याय जैसे मुद्दों को लेकर अपनी लड़ाई जारी रखेगी।
वीडियो के जवाब में वीडियो’ की रणनीति
अखिलेश यादव का प्रेस कॉन्फ्रेंस में वीडियो दिखाकर पलटवार करना इस बदलती राजनीतिक रणनीति का अहम संकेत माना जा सकता है। अब राजनीतिक दल केवल बयान जारी करने या प्रेस कॉन्फ्रेंस तक सीमित नहीं हैं, बल्कि अपने विरोधी के डिजिटल कंटेंट का जवाब उसी भाषा और उसी प्लेटफॉर्म पर देने की कोशिश कर रहे हैं।
बीजेपी का डिजिटल नैरेटिव जहां अखिलेश सरकार के पुराने विवादों, कानून-व्यवस्था और राजनीतिक फैसलों को केंद्र में रखता है, वहीं सपा की डिजिटल रणनीति योगी सरकार के प्रशासनिक फैसलों, रोजगार, महंगाई और सामाजिक मुद्दों पर केंद्रित दिखाई देती है।
इस पूरी लड़ाई में ‘कौन सा वीडियो पहले वायरल हुआ’ और ‘किस नैरेटिव ने ज्यादा लोगों तक पहुंच बनाई’, यह भी राजनीतिक रणनीति का हिस्सा बन चुका है।
मुद्दों की लड़ाई या परसेप्शन वॉर?
सोशल मीडिया की यह जंग केवल लाइक, शेयर और ट्रेंड तक सीमित नहीं है। राजनीतिक दलों के लिए डिजिटल प्लेटफॉर्म मतदाताओं की धारणा बनाने का महत्वपूर्ण माध्यम बन चुके हैं। खासकर युवा मतदाताओं तक पहुंच बनाने के लिए वीडियो, मीम और शॉर्ट क्लिप्स का इस्तेमाल तेजी से बढ़ा है।
हालांकि इस डिजिटल प्रतिस्पर्धा का दूसरा पहलू भी है। पुराने वीडियो को नए संदर्भ में पेश करना, अधूरी क्लिप वायरल करना या एआई से तैयार सामग्री को वास्तविक घटना की तरह प्रस्तुत करना सोशल मीडिया पर भ्रम की स्थिति पैदा कर सकता है। ऐसे में राजनीतिक दावों और वायरल वीडियो की स्वतंत्र रूप से तथ्य-जांच करना बेहद जरूरी हो जाता है।
उत्तर प्रदेश की राजनीति में बीजेपी और सपा की यह डिजिटल भिड़ंत आने वाले दिनों में और तेज होने के संकेत दे रही है। फिलहाल दोनों दलों की आईटी सेल एक-दूसरे के नैरेटिव को काटने में जुटी हैं—बीजेपी पुराने विवादों और अखिलेश सरकार के रिकॉर्ड को मुद्दा बना रही है, तो सपा योगी सरकार के सामने रोजगार, महंगाई, किसान, छुट्टा पशु और बुलडोजर जैसे सवाल खड़े कर रही है।
यानी यूपी की सियासत में अब बयान का जवाब बयान से’ नहीं, बल्कि ‘वीडियो का जवाब वीडियो से’ देने का दौर तेजी से मजबूत होता दिखाई दे रहा है।
लेखक के बारे में
Santosh Kumar Singh
"विजुअल लाइव" मासिक पत्रिका/न्यूज पोर्टल के समूह सम्पादक के पद पर सुशोभित हैं। साथ ही श्री सिंह वी एल मीडिया प्राइवेट लिमिटेड में निदेशक भी हैं। वर्ष 2004 से ही श्री सिंह प्रिंट मीडिया के विभिन्न संस्थाओं में अपनी सेवाएं दे चुके हैं उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से प्रकाशित हिन्दी दैनिक राष्ट्रीय सहारा, डेली न्यूज एक्टिविस्ट, राष्ट्रीय स्वरूप, भारत प्रतिदिन के अलावा कई संस्थाओं के लिए रिपोर्टिंग की है। श्री सिंह ने प्रधानमंत्री, राष्ट्रपति के लखनऊ आगमन के अलावा रुटीन की विभिन्न खबरों को प्रमुखता से कवर किया है। वह खोजी पत्रकारिता के लिए इंटरनेट साधनों के इस्तेमाल के प्रति जुनून रखते हैं और बारीकियों पर उनकी नजर रहती है। काम के अलावा उन्हें संगीत, यात्रा करना बेहद पसंद है। Santosh Kumar Singh की सभी खबरें देखें →
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