इन 3 तिथियों पर जरूर करें पितरों का स्मरण, जानें श्राद्ध की पूरी जानकारी

हिंदू धर्म में पितृ पक्ष का समय पूर्वजों के प्रति श्रद्धा और कृतज्ञता व्यक्त करने के लिए विशेष माना जाता है। इस दौरान परिवार के दिवंगत सदस्यों की मृत्यु तिथि के अनुसार श्राद्ध, तर्पण और पिंडदान जैसे कर्म किए जाते हैं। वर्ष 2026 में पितृ पक्ष का मुख्य क्रम 27 सितंबर से 10 अक्टूबर तक रहेगा और इसका समापन सर्वपितृ अमावस्या के साथ होगा।
पितृ पक्ष की हर तिथि का अपना धार्मिक महत्व है, लेकिन परंपराओं में कुछ तिथियों को विशेष रूप से महत्वपूर्ण माना जाता है। इनमें पंचमी, नवमी और सर्वपितृ अमावस्या प्रमुख हैं। हालांकि, किसी व्यक्ति के श्राद्ध के लिए उसकी मृत्यु की तिथि से संबंधित तिथि को प्राथमिकता दी जाती है।
पंचमी श्राद्ध – विशेष श्राद्ध तिथि
पंचमी तिथि को भी पितृ पक्ष की महत्वपूर्ण तिथियों में माना जाता है। 2026 में पंचमी श्राद्ध 30 सितंबर को पड़ रहा है। कुछ धार्मिक परंपराओं में इस दिन विशेष रूप से उन महिलाओं के लिए श्राद्ध करने की मान्यता है जिनकी मृत्यु विवाहित अवस्था में हुई हो। हालांकि, अलग-अलग परंपराओं और पंचांगों में इससे जुड़ी मान्यताओं में अंतर हो सकता है।
मातृ नवमी – माताओं के लिए विशेष दिन
पितृ पक्ष की नवमी तिथि को मातृ नवमी कहा जाता है। 2026 में यह तिथि 4 अक्टूबर को होगी। धार्मिक परंपरा में यह दिन विशेष रूप से माता और परिवार की दिवंगत महिला सदस्यों के श्राद्ध के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है। इस दिन लोग अपनी दिवंगत माताओं और मातृ पक्ष के पूर्वजों का स्मरण कर तर्पण एवं श्राद्ध कर्म करते हैं।
सर्वपितृ अमावस्या – सभी पितरों के लिए
पितृ पक्ष का अंतिम दिन सर्वपितृ अमावस्या होता है। 2026 में यह 10 अक्टूबर, शनिवार को पड़ेगी। इसे महालया अमावस्या भी कहा जाता है। यह दिन खास तौर पर उन पूर्वजों के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है जिनकी मृत्यु की तिथि ज्ञात नहीं है या जिनका श्राद्ध उनकी निर्धारित तिथि पर नहीं हो पाया। इस दिन ज्ञात-अज्ञात सभी पितरों के निमित्त श्राद्ध, तर्पण और पिंडदान करने की परंपरा है।
मृत्यु तिथि के अनुसार श्राद्ध करना प्रमुख
धार्मिक परंपरा के अनुसार पितृ पक्ष में जिस तिथि को किसी व्यक्ति का निधन हुआ हो, उसी तिथि पर उसका श्राद्ध करना प्रमुख माना जाता है। इसलिए केवल इन विशेष तिथियों पर ही श्राद्ध करना जरूरी नहीं है। यदि मृत्यु तिथि ज्ञात नहीं हो तो सर्वपितृ अमावस्या का महत्व बढ़ जाता है।
2026 में पितृ पक्ष की प्रमुख तिथियां
27 सितंबर – प्रतिपदा श्राद्ध
28 सितंबर – द्वितीया श्राद्ध
29 सितंबर – तृतीया श्राद्ध
30 सितंबर – चतुर्थी और पंचमी श्राद्ध
1 अक्टूबर – षष्ठी श्राद्ध
2 अक्टूबर – सप्तमी श्राद्ध
3 अक्टूबर – अष्टमी श्राद्ध
4 अक्टूबर – नवमी/मातृ नवमी
5 अक्टूबर – दशमी श्राद्ध
6 अक्टूबर – एकादशी श्राद्ध
7 अक्टूबर – द्वादशी श्राद्ध
8 अक्टूबर – त्रयोदशी श्राद्ध
9 अक्टूबर – चतुर्दशी श्राद्ध
10 अक्टूबर – सर्वपितृ अमावस्या
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