Wed, Sep 2
V L MEDIA PVT.LTD.
Advertisement
ब्रेकिंग न्यूज़
आगरा। प्रदर्शनकारियों पर लाठी चलाने का मामला। लाठी चलाने वाले इंस्पेक्टर पर हुई कार्रवाई। इंस्पेक्टर क्राइम जेपी तिवारी लाइन हाजिर। यूजीसी विरोध के दौरान हुआ था प्रदर्शन। लोगों को दौड़ाकर लाठियों से पीटने का आरोप। मीडिया में खबरें चलने के बाद डीसीपी ने लिया एक्शन। इंस्पेक्टर के खिलाफ विभागीय जांच के आदेश। एत्मादपुर थाना क्षेत्र का मामला। लखनऊ। स्वाइन फ्लू जांच की दर तय की गई। H1N1 संक्रमण की जांच रकम तय। RT-PCR जांच की अधिकतम दर ₹3,000। PGI में जांच शुल्क ₹2,400 तय की गई। इसी आधार पर निजी क्षेत्र में दर तय। CMO की अध्यक्षता में बैठक में फैसला। निजी अस्पतालों और पैथोलॉजी संचालकों की बैठक। मनमानी वसूली पर रोक लगेगी। सहारनपुर। सपा प्रमुख अखिलेश यादव का सहारनपुर दौरा आज। 11:45 बजे सरसावा एयरपोर्ट पर होगा आगमन। चौधरी इंद्रसेन और चौधरी रुद्रसेन के आवास जाएंगे। पूर्व सांसद हाजी फजलुरहमान के आवास पर पहुंचेंगे। लिंक रोड स्थित एएलएम हाउस में होगी मुलाकात। 3.30 बजे सरसावा से लखनऊ के लिए होंगे रवाना। कानपुर। बारिश के बाद फिर धंसी डॉट नाला सड़क। हर्ष नगर में भारी बारिश से बड़ा हादसा टला। डॉट नाला ढहने से 30 फीट चौड़ी सड़क धंसी। आसपास के मकानों को खाली कराने का नोटिस। नगर निगम ने जर्जर भवन को भी गिराया। कोर्ट के आदेश के बाद गिराया गया भवन। बारिश से मरम्मत कार्य में आ रही बाधा। डॉट नाला क्षेत्र में लगातार बढ़ रहा खतरा। राजधानी के व्यस्ततम IT चौराहा के पास सड़क धंसी। गड्ढे में गिरा एक बाइक सवार। गड्ढा लखनऊ में पूर्व उप मुख्यमंत्री पूर्व मेयर के घर के पास हुआ है। नेपाल में आई भयावह बाढ़ को एक हफ्ता बीत गया है।अब तक 1093 लोगों की मौत की खबर है और लापता लोगों की संख्या 4,500 से अधिक है। कई टन मलबे और कीचड़ से पटे पड़े रास्तों पर राहत और बचाव का काम किया जा रहा है। जो बच गए हैं, वो मलबे में दबे अपने अपनों की खोज में जुटे हैं। फिर से जिंदगी को समेटने की कोशिश की जा रही है। यूपी के कई जिलों में 6 सितंबर तक भारी बारिश चेतावनी। केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान को मिली जान से मारने की धमकी। SCO समिट में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उठाया आतंकवाद का मुद्दा, पाकिस्तान को भी लताड़ा। नेपाल में एक ही घर से 23 शव बरामद, 4000 लोग अब भी लापता, मौतों का आंकड़ा 962, महामारी का खतरा। नेपाल में आई भीषण बाढ़ के बाद अब तक 962 शव बरामद किए गए हैं. नुवाकोट जिले के वेत्रवंती में एक ही घर से 23 शव मिले हैं। आगरा। प्रदर्शनकारियों पर लाठी चलाने का मामला। लाठी चलाने वाले इंस्पेक्टर पर हुई कार्रवाई। इंस्पेक्टर क्राइम जेपी तिवारी लाइन हाजिर। यूजीसी विरोध के दौरान हुआ था प्रदर्शन। लोगों को दौड़ाकर लाठियों से पीटने का आरोप। मीडिया में खबरें चलने के बाद डीसीपी ने लिया एक्शन। इंस्पेक्टर के खिलाफ विभागीय जांच के आदेश। एत्मादपुर थाना क्षेत्र का मामला। लखनऊ। स्वाइन फ्लू जांच की दर तय की गई। H1N1 संक्रमण की जांच रकम तय। RT-PCR जांच की अधिकतम दर ₹3,000। PGI में जांच शुल्क ₹2,400 तय की गई। इसी आधार पर निजी क्षेत्र में दर तय। CMO की अध्यक्षता में बैठक में फैसला। निजी अस्पतालों और पैथोलॉजी संचालकों की बैठक। मनमानी वसूली पर रोक लगेगी। सहारनपुर। सपा प्रमुख अखिलेश यादव का सहारनपुर दौरा आज। 11:45 बजे सरसावा एयरपोर्ट पर होगा आगमन। चौधरी इंद्रसेन और चौधरी रुद्रसेन के आवास जाएंगे। पूर्व सांसद हाजी फजलुरहमान के आवास पर पहुंचेंगे। लिंक रोड स्थित एएलएम हाउस में होगी मुलाकात। 3.30 बजे सरसावा से लखनऊ के लिए होंगे रवाना। कानपुर। बारिश के बाद फिर धंसी डॉट नाला सड़क। हर्ष नगर में भारी बारिश से बड़ा हादसा टला। डॉट नाला ढहने से 30 फीट चौड़ी सड़क धंसी। आसपास के मकानों को खाली कराने का नोटिस। नगर निगम ने जर्जर भवन को भी गिराया। कोर्ट के आदेश के बाद गिराया गया भवन। बारिश से मरम्मत कार्य में आ रही बाधा। डॉट नाला क्षेत्र में लगातार बढ़ रहा खतरा। राजधानी के व्यस्ततम IT चौराहा के पास सड़क धंसी। गड्ढे में गिरा एक बाइक सवार। गड्ढा लखनऊ में पूर्व उप मुख्यमंत्री पूर्व मेयर के घर के पास हुआ है। नेपाल में आई भयावह बाढ़ को एक हफ्ता बीत गया है।अब तक 1093 लोगों की मौत की खबर है और लापता लोगों की संख्या 4,500 से अधिक है। कई टन मलबे और कीचड़ से पटे पड़े रास्तों पर राहत और बचाव का काम किया जा रहा है। जो बच गए हैं, वो मलबे में दबे अपने अपनों की खोज में जुटे हैं। फिर से जिंदगी को समेटने की कोशिश की जा रही है। यूपी के कई जिलों में 6 सितंबर तक भारी बारिश चेतावनी। केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान को मिली जान से मारने की धमकी। SCO समिट में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उठाया आतंकवाद का मुद्दा, पाकिस्तान को भी लताड़ा। नेपाल में एक ही घर से 23 शव बरामद, 4000 लोग अब भी लापता, मौतों का आंकड़ा 962, महामारी का खतरा। नेपाल में आई भीषण बाढ़ के बाद अब तक 962 शव बरामद किए गए हैं. नुवाकोट जिले के वेत्रवंती में एक ही घर से 23 शव मिले हैं।

AI वीडियो की सियासत : जनमत का नया हथियार या चुनावी मर्यादा का पतन?

By Anup Sharma·01 Sept 2026885
0
AI वीडियो की सियासत : जनमत का नया हथियार या चुनावी मर्यादा का पतन?

धुनिक तकनीक और कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) के इस दौर में चुनावी रणनीतियाँ और प्रचार के तरीके पूरी तरह बदल चुके हैं। अब केवल जनसभाओं और विज्ञापनों तक सीमित रहने के बजाय राजनीतिक पार्टियाँ और उनके समर्थक AI-जनरेटेड वीडियो और डीपफेक का व्यापक रूप से उपयोग कर रहे हैं। जहाँ एक ओर यह तकनीक नेताओं को सीधे मतदाताओं से जोड़ने का एक प्रभावी माध्यम बन रही है, वहीं दूसरी ओर इसने यह गंभीर चिंता पैदा कर दी है कि क्या राजनीतिक बहस का स्तर अपने सबसे निचले स्तर पर पहुँच जाएगा।

वोट पाने और चुनाव प्रचार पर प्रभाव

सकारात्मक पहलू : AI तकनीक से नेता अपनी बात विभिन्न भाषाओं में बिना किसी भाषाई रुकावट के जनता तक पहुँचा रहे हैं। क्षेत्रीय भाषाओं में AI डबिंग और व्यक्तिगत मैसेजिंग से मतदाता तक सीधी पहुँच संभव हुई है।

नकारात्मक पहलू: मतदाता के व्यवहार को प्रभावित करने के लिए भ्रामक AI वीडियो बनाए जाते हैं। यदि किसी उम्मीदवार का गलत संदेश या नकली बयान सही समय पर फैला दिया जाए, तो वह चुनाव परिणाम और जनमत को गलत दिशा में मोड़ सकता है।

भाषाई बाधाओं का खत्म होना : AI डबिंग टूल्स के जरिए राष्ट्रीय नेता अपनी स्थानीय भाषाओं में दिए गए भाषणों को तमिल, तेलुगु, बंगाली या मराठी जैसी कई क्षेत्रीय भाषाओं में कुछ ही मिनटों में बदल रहे हैं। इससे स्थानीय स्तर पर मतदाता के साथ सीधा जुड़ाव बन रहा है।

राजनीतिक गरिमा और समाज पर खतरा

निचले स्तर की राजनीति : AI से नेताओं के विवादित या आपत्तिजनक फर्जी वीडियो बनाना आसान हो गया है। इससे राजनीतिक बहस मुद्दों (जैसे शिक्षा, स्वास्थ्य, विकास) से हटकर एक-दूसरे को नीचा दिखाने और चरित्र-हनन (Character Assassination) पर केंद्रित हो जाती है।

सामाजिक प्रभाव : जब लोग बार-बार ऐसे भ्रामक वीडियो देखते हैं, तो समाज में ध्रुवीकरण और अविश्वास बढ़ता है। इसका सबसे खतरनाक पक्ष "सच्चाई पर से भरोसा उठना" (Liar's Dividend) है—जहां लोग असली वीडियो को भी फर्जी मानकर खारिज करने लगते हैं।

चरित्र-हनन और फर्जी वीडियो : AI वीडियो के दुरुपयोग से विपक्षी नेताओं के आपत्तिजनक या विवादित नकली वीडियो (डीपफेक) बनाकर उन्हें इंटरनेट पर वायरल किया जा रहा है। इससे वास्तविक नीतिगत मुद्दों (जैसे शिक्षा, स्वास्थ्य और रोज़गार) पर चर्चा होने के बजाय चुनाव व्यक्तिगत कीचड़ उछालने और चरित्र-हनन तक सीमित हो रहे हैं।

सामाजिक ध्रुवीकरण और भ्रम : चुनाव के ऐन वक्त पर फर्जी या भ्रामक AI वीडियो प्रसारित करके सामाजिक माहौल को बिगाड़ने और सांप्रदायिक या जातिगत तनाव पैदा करने की आशंका बनी रहती है।

सच्चाई का संकट (लाइअर्स डिविडेंड) : इस तकनीक का सबसे हानिकारक पक्ष यह है कि जब फर्जी वीडियो का चलन बढ़ता है, तो नेता अपने किसी असली विवादित बयान को भी आसानी से "AI द्वारा बनाया गया फर्जी वीडियो" बताकर जिम्मेदारी से बच निकलते हैं। इससे जनता का मीडिया और सूचना प्रणाली पर से भरोसा टूटने लगता है।

राजनीति, चुनावी डेटा और चुनाव विश्लेषकों (Psephologists) के अनुसार, AI तकनीक के सीधे प्रभाव से 1% से 5% तक वोट शेयर (Vote Share) खिसकने या ट्रांसफर होने की संभावना रहती है।

प्रथम दृष्टया 1% से 5% का यह आंकड़ा छोटा लग सकता है, लेकिन लोकतांत्रिक व्यवस्था में यह प्रतिशत किसी भी बड़े चुनाव का नतीजा पलटने के लिए काफी है।

1% से 5% का प्रभाव इतना घातक क्यों है?

मार्जिनल और स्विंग वोटर्स (Swing Voters) : लगभग 70% से 80% मतदाता अपने कैडर या विचारधारा (कमिटेड वोटर्स) से बंधे होते हैं, जिन्हें AI या कोई भी प्रचार आसानी से नहीं बदल सकता। लेकिन 10% से 20% मतदाता 'अनिर्णायक' (Undecided) होते हैं। AI का मुख्य निशाना यही वर्ग होता है।

कड़े मुकाबलों (Close Contests) में निर्णायक : भारत या अमेरिका जैसे देशों में सैकड़ों सीटें ऐसी होती हैं जहाँ हार-जीत का अंतर 0.5% से 2% (कुछ सौ या हजार वोटों) का ही होता है। ऐसे में AI द्वारा ट्रांसफर कराया गया 1% से 2% वोट भी किसी भी पार्टी को सत्ता में ला सकता है या बाहर कर सकता है।

राजनीतिक दल AI का इस्तेमाल केवल अपने पक्ष में वोट ट्रांसफर कराने के लिए ही नहीं, बल्कि विपक्षी दल के वोट प्रतिशत को गिराने के लिए भी करते हैं:

विरोधी पार्टी के समर्थकों में यह भ्रम फैलाना कि "चुनाव की तारीख बदल गई है", या उनके उम्मीदवार का पर्चा खारिज हो गया है"।

यदि विरोधी समर्थकों का 2% हिस्सा भी वोट देने घर से बाहर न निकले, तो सीधा फायदा दूसरी पार्टी को मिल जाता है।

शोध और वैश्विक अध्ययनों के अनुसार, AI अकेले दम पर किसी पार्टी को 20%-30% का एकतरफा बहुमत नहीं दिला सकता, क्योंकि लोगों की सामाजिक और आर्थिक प्राथमिकताएँ अधिक मायने रखती हैं। लेकिन 2% से 4% के बारीक अंतर वाले चुनावों में AI किंगमेकर की भूमिका निभा सकता है।

चुनौती और समाधान की राह

विशेषज्ञों का मानना है कि केवल चुनाव जीतने के लिए AI का अनियंत्रित उपयोग लोकतंत्र के लिए घातक साबित हो सकता है। इससे बचने के लिए तीन प्रमुख स्तरों पर काम करना अनिवार्य हो गया है:

सख्त कानून और चुनाव आयोग का नियमन : राजनीतिक विज्ञापनों में AI और डीपफेक सामग्री का खुलासा करना अनिवार्य किया जाए और बिना अनुमति या फर्जी वीडियो फैलाने पर कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाए।

AI वाटरमार्किंग और लेबलिंग : सोशल मीडिया कंपनियों को यह सुनिश्चित करना होगा कि यदि कोई वीडियो AI द्वारा बनाया गया है, तो उस पर स्पष्ट लेबल और वाटरमार्क दिखे।

डिजिटल साक्षरता : आम जनता और मतदाताओं को जागरूक करना होगा कि वे किसी भी वायरल वीडियो पर तुरंत भरोसा न करें और 'फैक्‍ट चेक' के ज़रिए उसकी सत्यता की जांच करें।

निष्कर्ष : AI तकनीक अपने आप में केवल एक साधन है। यदि इसका उपयोग जन-जागरूकता और अपनी नीतियों को जनता तक पहुँचाने के लिए किया जाए, तो यह चुनाव प्रक्रिया को बेहतर बना सकती है। लेकिन यदि इसका इस्तेमाल झूठ, नफरत और भ्रम फैलाने के लिए हुआ, तो यह न केवल राजनीतिक गरिमा को गिराएगा, बल्कि लोकतांत्रिक मूल्यों और समाज के भाईचारे के लिए भी एक बड़ा खतरा साबित होगा।

लेखक के बारे में

Anup Sharma

मूल रूप से वाराणसी, उत्तर प्रदेश के रहने वाले अनूप कुमार शर्मा पेशे से सॉफ्टवेयर इंजीनियर हैं और डिजिटल तकनीक एवं मीडिया के क्षेत्र में विशेष रुचि रखते हैं। तकनीकी दक्षता के साथ डिजिटल प्लेटफॉर्म की कार्यप्रणाली और बदलती मीडिया तकनीकों को समझने में उनकी गहरी दिलचस्पी है। डिजिटल मीडिया के तेजी से बदलते स्वरूप के बीच वे नई तकनीकों, वेब प्लेटफॉर्म, डिजिटल कंटेंट और ऑनलाइन मीडिया टूल्स को सीखने और उन्हें प्रभावी ढंग से इस्तेमाल करने के लिए निरंतर प्रयासरत रहते हैं। तकनीकी सोच और रचनात्मक दृष्टिकोण का बेहतर तालमेल उनकी कार्यशैली की प्रमुख विशेषता है। मीडिया और तकनीक के बीच बढ़ते संबंधों को वे भविष्य की पत्रकारिता का महत्वपूर्ण हिस्सा मानते हैं। तकनीकी नवाचारों के माध्यम से डिजिटल पत्रकारिता को अधिक तेज, प्रभावी और पाठक-केंद्रित बनाने में उनकी विशेष रुचि है। Anup Sharma की सभी खबरें देखें

Leave a Comment

Don't worry! Your email address will not be published. Required fields are marked (*).

ट्रेंडिंग वीडियो

संबंधित लेख

टॉप रीड्स

01 Sept 2026975

देश के 25 बेहतरीन पुलिस कप्तानों में यूपी के 5 अफसर, ‘सुपर-5’ में भी एक नाम, फेम इंडिया-एशिया पोस्ट ने जारी की सूची

31 Aug 20261135

शामली एनकाउंटर पर DGP राजीव कृष्ण की बड़ी प्रेस कॉन्फ्रेंस

31 Aug 20261290

चिनहट पुलिस की नाकामी: अपहरण और लूट के 5 माह बाद भी न गिरफ्तारी, न सामान बरामद

27 Aug 202618380

रक्षाबंधन पर बहनों को योगी सरकार की सौगात, साथी के साथ मुफ्त सफर की सुविधा

31 Aug 20261045

अंकित हत्याकांड: SHRC द्वारा मोहित-सुमित प्रकरण में केस दर्ज

27 Aug 202617285

शिव-विष्णु का अभेद दर्शन: जानिए वामन पुराण की वह दिव्य कथा, जब ब्रह्मांडीय संतुलन के लिए प्रकट हुआ 'हरिहर' स्वरूप

01 Sept 2026425

यूपी में 10 IPS अफसर सेवानिवृत्त, DG फायर मुथा अशोक जैन समेत कई बड़े नाम शामिल

29 Aug 20263175

बाढ़ पीड़ितों के बीच पहुंचे सीएम योगी, बोले— "संकट की घड़ी में साथ है सरकार"