भारत की फ्यूजन एनर्जी की दिशा में बड़ी छलांग

बेंगलुरु। भारत ने परमाणु फ्यूजन यानी कृत्रिम सूरज जैसी ऊर्जा पैदा करने की दिशा में एक अहम कदम बढ़ाया है। बेंगलुरु स्थित डीप-टेक स्टार्टअप Pranos Fusion ने अपने प्रयोगात्मक टोकामक PRAGYA में पहली बार प्लाज्मा तैयार करने में सफलता हासिल की है। यह उपलब्धि भारत के निजी क्षेत्र में फ्यूजन एनर्जी तकनीक के विकास के लिए महत्वपूर्ण मील का पत्थर मानी जा रही है।
क्या है PRAGYA?
PRAGYA एक कॉम्पैक्ट, लो-ऐस्पेक्ट-रेशियो टोकामक है। टोकामक ऐसी मशीन होती है जिसमें बेहद गर्म प्लाज्मा को शक्तिशाली चुंबकीय क्षेत्रों की मदद से नियंत्रित और सीमित किया जाता है। यही तकनीक भविष्य में परमाणु फ्यूजन के जरिए ऊर्जा उत्पादन के लिए बेहद महत्वपूर्ण मानी जाती है।
Pranos Fusion के मुताबिक PRAGYA भारत का पहला निजी तौर पर विकसित कॉम्पैक्ट टोकामक है। इसकी मदद से कंपनी प्लाज्मा को बनाने, नियंत्रित करने और उसके व्यवहार को समझने से जुड़ी तकनीकों का परीक्षण कर रही है।

पहली बार प्लाज्मा बनना क्यों है बड़ी उपलब्धि?
फ्यूजन रिसर्च में 'फर्स्ट प्लाज्मा' एक महत्वपूर्ण शुरुआती पड़ाव होता है। इसका अर्थ यह है कि मशीन ने पहली बार प्लाज्मा बनाया और उसे चुंबकीय क्षेत्र की मदद से नियंत्रित करने की दिशा में कामयाबी हासिल की।
हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि PRAGYA ने अभी परमाणु फ्यूजन से बिजली बनाना शुरू कर दिया है। यह मशीन फिलहाल व्यावसायिक बिजली उत्पादन के लिए तैयार रिएक्टर नहीं है, बल्कि भविष्य की फ्यूजन तकनीकों के परीक्षण के लिए एक प्रयोगात्मक प्लेटफॉर्म है।
'सूरज' जैसी ऊर्जा कैसे बनती है?
सूरज के भीतर ऊर्जा न्यूक्लियर फ्यूजन की प्रक्रिया से पैदा होती है। इसमें हल्के परमाणु नाभिक अत्यधिक तापमान और दबाव में मिलकर भारी नाभिक बनाते हैं और इस प्रक्रिया में बड़ी मात्रा में ऊर्जा निकलती है।
धरती पर इसी प्रक्रिया को नियंत्रित परिस्थितियों में दोहराने की कोशिश की जा रही है। इसके लिए गैस को अत्यधिक गर्म करके प्लाज्मा में बदला जाता है और फिर शक्तिशाली चुंबकीय क्षेत्रों की मदद से उसे नियंत्रित किया जाता है।
फ्यूजन एनर्जी को भविष्य की स्वच्छ ऊर्जा के संभावित स्रोतों में गिना जाता है। लेकिन इसे बड़े पैमाने पर व्यावसायिक बिजली उत्पादन में बदलना अभी भी बेहद चुनौतीपूर्ण वैज्ञानिक और इंजीनियरिंग लक्ष्य है।
PRAGYA के बाद क्या है अगला लक्ष्य?
Pranos Fusion की योजना PRAGYA से आगे बढ़कर बड़े फ्यूजन सिस्टम विकसित करने की है। कंपनी भविष्य में PraniQ नामक बड़े फ्यूजन रिएक्टर की दिशा में आगे बढ़ने का लक्ष्य रखती है। कंपनी की महत्वाकांक्षी योजना करीब 2030 तक नेट-गेन फ्यूजन रिएक्टर विकसित करने की है।
इसके अलावा कंपनी हाई-टेम्परेचर सुपरकंडक्टिंग मैग्नेट तकनीक पर भी काम कर रही है। मजबूत चुंबकीय क्षेत्र फ्यूजन प्लाज्मा को नियंत्रित करने में अहम भूमिका निभाते हैं और भविष्य में छोटे आकार के फ्यूजन रिएक्टर विकसित करने में मदद कर सकते हैं।
भारत के लिए क्यों महत्वपूर्ण है यह कदम?
भारत लंबे समय से फ्यूजन ऊर्जा के क्षेत्र में सरकारी संस्थानों और अंतरराष्ट्रीय परियोजनाओं के जरिए काम कर रहा है। PRAGYA की उपलब्धि इस क्षेत्र में निजी क्षेत्र की बढ़ती भागीदारी को दर्शाती है।
Pranos Fusion को JNCASR और Institute for Plasma Research से जुड़े इनक्यूबेशन एवं वैज्ञानिक सहयोग का लाभ मिला है। कंपनी का लक्ष्य भारत में फ्यूजन तकनीक से जुड़ी घरेलू विशेषज्ञता, मशीन निर्माण और वैज्ञानिक प्रतिभा को मजबूत करना भी है।
अभी मंजिल दूर, लेकिन कदम बड़ा
PRAGYA में पहली बार प्लाज्मा बनना फ्यूजन एनर्जी की दिशा में एक महत्वपूर्ण शुरुआती सफलता है। हालांकि, व्यावसायिक स्तर पर फ्यूजन से बिजली बनाने के लिए प्लाज्मा को लंबे समय तक स्थिर रखना, पर्याप्त ऊर्जा हासिल करना और पूरी प्रक्रिया को आर्थिक रूप से व्यवहारिक बनाना जैसी कई बड़ी चुनौतियां अभी बाकी हैं।
फिर भी, भारत के निजी क्षेत्र द्वारा प्रयोगशाला स्तर पर फ्यूजन तकनीक विकसित करने और अब पहली बार प्लाज्मा हासिल करने से देश की 'कृत्रिम सूरज' यानी फ्यूजन एनर्जी की दौड़ में एक नया अध्याय जरूर जुड़ गया है।
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