पत्रकार से बने हजारों करोड़ के कारोबारी, आरके सिन्हा के निधन से शोक की लहर

पटना/नई दिल्ली। पत्रकारिता की दुनिया से अपने करियर की शुरुआत करने वाले वरिष्ठ पत्रकार, प्रख्यात उद्योगपति, भाजपा के संस्थापक सदस्य और पूर्व राज्यसभा सांसद डॉ. रविन्द्र किशोर सिन्हा (आरके सिन्हा) का शुक्रवार, 30 अक्टूबर 2026 को 75 वर्ष की उम्र में निधन हो गया। उन्होंने नोएडा स्थित अपने आवास पर अंतिम सांस ली। उनके निधन की खबर से पत्रकारिता, राजनीति, उद्योग और सामाजिक क्षेत्र में शोक की लहर दौड़ गई है।
आरके सिन्हा की जिंदगी संघर्ष, संकल्प और उद्यमशीलता की एक प्रेरक कहानी रही। महज 250 रुपये मासिक वेतन से अपने पेशेवर सफर की शुरुआत करने वाले सिन्हा ने अपनी दूरदृष्टि और मेहनत के दम पर सिक्योरिटी एंड इंटेलिजेंस सर्विसेज (SIS) जैसे बड़े कारोबारी समूह की स्थापना की। एक छोटे से उद्यम से शुरू हुआ उनका सफर आगे चलकर अंतरराष्ट्रीय स्तर तक पहुंचा और हजारों लोगों के लिए रोजगार के अवसर पैदा किए।
1971 में पत्रकारिता से शुरू हुआ सफर
आरके सिन्हा ने वर्ष 1971 में पटना के अखबारों 'सर्चलाइट' और 'प्रदीप' से पत्रकारिता के क्षेत्र में कदम रखा। शुरुआती दौर में उन्होंने अपराध और राजनीतिक विषयों पर रिपोर्टिंग की। इसी दौरान उन्हें भारत-पाकिस्तान युद्ध की रिपोर्टिंग करने का अवसर मिला। युद्ध के दौरान सैनिकों और पूर्व सैनिकों के अनुशासन, समर्पण और कार्यक्षमता को करीब से देखने का अनुभव उनके जीवन का महत्वपूर्ण मोड़ साबित हुआ।
यहीं से उनके मन में पूर्व सैनिकों की क्षमता को रोजगार से जोड़ने और उन्हें सम्मानजनक अवसर उपलब्ध कराने का विचार विकसित हुआ।
1974 में रखी SIS की नींव
पत्रकारिता छोड़ने के बाद वर्ष 1974 में उन्होंने पटना से सिक्योरिटी एंड इंटेलिजेंस सर्विसेज (SIS) की स्थापना की। शुरुआत बेहद सीमित संसाधनों से हुई, लेकिन उनका उद्देश्य निजी सुरक्षा सेवाओं को संगठित और पेशेवर स्वरूप देना था।
धीरे-धीरे SIS ने निजी सुरक्षा सेवाओं के साथ फैसिलिटी मैनेजमेंट और कैश लॉजिस्टिक्स जैसे क्षेत्रों में भी विस्तार किया। वर्ष 2008 में कंपनी ने ऑस्ट्रेलिया की प्रमुख सुरक्षा कंपनी चब सिक्योरिटी का अधिग्रहण किया। इस कदम ने भारतीय सुरक्षा सेवा उद्योग को अंतरराष्ट्रीय बाजार में नई पहचान दिलाई।
उनके नेतृत्व में SIS समूह एशिया-प्रशांत क्षेत्र की प्रमुख सुरक्षा एवं बिजनेस सपोर्ट सेवा कंपनियों में शामिल हुआ। उनकी यह उपलब्धि भारतीय उद्यमिता और रोजगार सृजन की उल्लेखनीय कहानी बन गई।
खोजी पत्रकारिता में भी बनाई अलग पहचान
आरके सिन्हा की पहचान केवल उद्योगपति के रूप में नहीं थी। उन्होंने खोजी पत्रकारिता में भी अपनी अलग छाप छोड़ी। वर्ष 1974 में प्रतिष्ठित पत्रिका 'माया' में नागमणि हत्याकांड से संबंधित उनकी खोजी रिपोर्ट प्रकाशित हुई थी। इस रिपोर्ट में वरिष्ठ नौकरशाह नागमणि पर अपनी पत्नी की हत्या का आरोप उठाया गया था। उनकी आधिकारिक जीवनी के अनुसार, इस रिपोर्ट के बाद नागमणि की गिरफ्तारी हुई।
वर्ष 1975 में आनंद मार्ग से जुड़ी उनकी खोजी रिपोर्ट भी चर्चा में रही। आपातकाल के दौरान वर्ष 1976 में लोकनायक जयप्रकाश नारायण से संबंधित एक महत्वपूर्ण खबर प्रकाशित करने के कारण भी वह सुर्खियों में आए।
जेपी आंदोलन को पुस्तक में किया दर्ज
बिहार में लोकनायक जयप्रकाश नारायण के नेतृत्व में चले छात्र आंदोलन से भी आरके सिन्हा का गहरा जुड़ाव रहा। उन्होंने इस आंदोलन के अनुभवों और घटनाक्रम को अपनी चर्चित पुस्तक 'जन आंदोलन' में दर्ज किया। इस पुस्तक को बिहार के छात्र आंदोलन पर महत्वपूर्ण दस्तावेजों में गिना जाता है।
लेखन के प्रति उनका लगाव जीवनभर बना रहा। उन्होंने 'मी एंड माय गुरु' सहित कई अन्य पुस्तकों की रचना की और समसामयिक विषयों, इतिहास तथा सामाजिक घटनाक्रम पर लेखन जारी रखा।
जनसंघ से भाजपा और राज्यसभा तक का सफर
राजनीतिक जीवन में भी आरके सिन्हा की महत्वपूर्ण भूमिका रही। वह जनसंघ के समय से सार्वजनिक जीवन में सक्रिय थे। उनकी आधिकारिक जीवनी के अनुसार, वर्ष 1966 में पंडित दीनदयाल उपाध्याय ने उन्हें जनसंघ से जोड़ा था। वह भाजपा के शुरुआती संस्थापक सदस्यों में शामिल रहे।
वर्ष 2014 में भाजपा ने उन्हें बिहार से राज्यसभा के लिए निर्विरोध निर्वाचित कराया। उन्होंने वर्ष 2014 से 2020 तक राज्यसभा सांसद के रूप में अपनी जिम्मेदारी निभाई। इस दौरान उन्होंने राजनीति के साथ-साथ निजी सुरक्षा उद्योग से जुड़े मुद्दों को भी प्रमुखता से उठाया।
शिक्षा और सामाजिक सेवा में भी रहा योगदान
आरके सिन्हा शिक्षा और सामाजिक सेवा के क्षेत्र में भी सक्रिय रहे। उन्होंने देहरादून में इंडियन पब्लिक स्कूल की स्थापना की। इसके अलावा वह पतंजलि योगपीठ के संस्थापक सदस्यों में शामिल रहे और विभिन्न सामाजिक एवं शैक्षणिक गतिविधियों से जुड़े रहे।
उनका मानना था कि उद्यमिता का उद्देश्य केवल कारोबार बढ़ाना नहीं, बल्कि समाज के लिए रोजगार और अवसरों का निर्माण करना भी है। पूर्व सैनिकों को निजी सुरक्षा क्षेत्र में रोजगार उपलब्ध कराने की उनकी पहल इसी सोच का उदाहरण थी।
विजुअल लाइव परिवार ने दी भावभीनी श्रद्धांजलि
वरिष्ठ पत्रकार, उद्योगपति, समाजसेवी और पूर्व राज्यसभा सांसद डॉ. आरके सिन्हा के निधन पर विजुअल लाइव परिवार ने गहरा शोक व्यक्त किया है। संस्थान के प्रमुख संतोष कुमार सिंह ने अपनी संवेदना व्यक्त करते हुए कहा कि उनका निधन पत्रकारिता, राजनीति, उद्योग और सामाजिक क्षेत्र के लिए अपूरणीय क्षति है।
उन्होंने कहा कि पत्रकारिता से अपने पेशेवर जीवन की शुरुआत करने वाले आरके सिन्हा ने अपनी प्रतिभा, परिश्रम और दूरदृष्टि से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारतीय उद्यमिता की पहचान बनाई। पूर्व सैनिकों को रोजगार से जोड़ने की उनकी सोच ने एक बड़े संस्थान को जन्म दिया, जिसने देश-विदेश में अपनी पहचान स्थापित की।
संतोष कुमार सिंह ने कहा कि आरके सिन्हा का जीवन आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत रहेगा। उन्होंने दिवंगत आत्मा की शांति और शोकाकुल परिवार को इस कठिन समय में संबल प्रदान करने की प्रार्थना की।
पटना लाया जाएगा पार्थिव शरीर
परिजनों की ओर से मिली जानकारी के अनुसार, आरके सिन्हा का पार्थिव शरीर अंतिम दर्शन के लिए नोएडा से पटना स्थित पाटलिपुत्र के अन्नपूर्णा भवन लाया जाएगा। वहां लोग उन्हें श्रद्धांजलि दे सकेंगे। अंतिम संस्कार की विस्तृत जानकारी बाद में साझा किए जाने की बात कही गई है।
250 रुपये की नौकरी से अंतरराष्ट्रीय स्तर के कारोबारी समूह तक पहुंचने वाले आरके सिन्हा का जीवन इस बात की मिसाल रहा कि दृढ़ इच्छाशक्ति, दूरदृष्टि और मेहनत से सीमित संसाधनों में भी बड़ी उपलब्धियां हासिल की जा सकती हैं। पत्रकारिता, उद्यमिता, राजनीति और समाजसेवा में उनके योगदान को लंबे समय तक याद किया जाएगा।
लेखक के बारे में
Santosh Kumar Singh
श्री सिंह ‘विजुअल लाइव’ मासिक पत्रिका एवं न्यूज पोर्टल के संपादक के रूप में पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। वर्ष 2004 से उन्होंने प्रिंट और डिजिटल मीडिया में अपनी सेवाएं देते हुए पत्रकारिता का लंबा अनुभव अर्जित किया है। लखनऊ से प्रकाशित हिन्दी दैनिक राष्ट्रीय सहारा, डेली न्यूज एक्टिविस्ट, राष्ट्रीय स्वरूप और भारत प्रतिदिन सहित विभिन्न मीडिया संस्थानों के लिए उन्होंने रिपोर्टिंग की है। प्रधानमंत्री और राष्ट्रपति के लखनऊ आगमन से लेकर राजनीति, प्रशासन, जनसरोकार और शहर की महत्वपूर्ण घटनाओं की रिपोर्टिंग में उनकी सक्रिय भूमिका रही है। श्री सिंह की विशेष रुचि खोजी पत्रकारिता और डिजिटल माध्यमों के प्रभावी इस्तेमाल में है। इंटरनेट आधारित शोध, सूचना के स्रोतों की पड़ताल और खबर की बारीकियों तक पहुंचने की उनकी कार्यशैली उन्हें अलग पहचान देती है। बदलते मीडिया परिदृश्य में वे तथ्यपरक, विश्वसनीय और जनसरोकार से जुड़ी पत्रकारिता को प्राथमिकता देते हैं। पत्रकारिता के साथ उन्हें संगीत और यात्रा में विशेष रुचि है। उनका मानना है कि एक पत्रकार के लिए जिज्ञासा, निरंतर सीखने की प्रवृत्ति और तथ्यों के प्रति ईमानदारी सबसे महत्वपूर्ण गुण हैं। Santosh Kumar Singh की सभी खबरें देखें →
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