
फिफ्टी शेड्स ऑफ़ ग्रे - व्यंगात्मक टिपण्णी
Fifty Shades of Grey को अगर भारतीय दर्शन की चौपाल पर बैठाकर देखा जाए तो ऐसा लगता है जैसे किसी ने “कामसूत्र” का नाम सुन लिया हो, पर पढ़ाई पूरी किए बिना ही सीधे चमड़े की बेल्ट खरीद लाया हो।
भारतीय परंपरा में प्रेम को “रस” माना गया, साधना माना गया, यहाँ तक कि वात्स्यायन ने भी काम को धर्म, अर्थ और मोक्ष के साथ संतुलन में रखा। लेकिन “फिफ्टी शेड्स” देखकर लगता है कि पश्चिम ने प्रेम को एक्सेल शीट बना दिया है—
“यहाँ साइन करो, वहाँ बंधो, और इधर भावनाएँ जमा कर दो।”
आज के दौर में यह फिल्म वैसी ही लगती है जैसे कोई मोटिवेशनल स्पीकर रिश्तों पर TED Talk दे और खुद तीन महीने से “seen” पर पड़ा हो।
भारतीय व्यंग्यकार अगर इसे देखते तो शायद कहते—
“यह प्रेम कहानी कम, अमीर आदमी की HR policy ज्यादा है।”
फिल्म का नायक इतना अमीर है कि उसके दुख भी प्राइवेट जेट में आते हैं। भारतीय मध्यमवर्ग का लड़का अगर इतना रहस्यमयी व्यवहार करे तो घर वाले सीधे पूछ बैठें—
“बेटा नौकरी लग गई है या किसी बाबा के चक्कर में पड़ गए हो?”
और नायिका का हाल ऐसा कि हर लाल झंडे को वह “रोमांस का गुलाब” समझती रहती है। भारतीय परिवारों में तो पहली ही मीटिंग में चाची जी बोल देतीं—
“बिटिया, यह लड़का थोड़ा ज़्यादा ही ‘प्रयोगवादी’ लग रहा है।”
असल मज़ा तो तब आता है जब फिल्म खुद को “गहरी” दिखाने की कोशिश करती है।
पृष्ठभूमि में उदास संगीत बजता है, कैमरा धीरे घूमता है, और दर्शक सोचता है—
“भाई, यह प्रेम है, थेरेपी है या इंटीरियर डिजाइन का विज्ञापन?”
भारतीय दर्शन कहता है कि आसक्ति दुःख का कारण है।
यह फिल्म कहती है कि आसक्ति के साथ हेलीकॉप्टर और पेंटहाउस भी जोड़ दो, तो टिकट खिड़की पर कमाई हो जाती है।
आज सोशल मीडिया के दौर में “फिफ्टी शेड्स ऑफ ग्रे” शायद ऐसे चलती—
इंस्टाग्राम पर aesthetic reels
ट्विटर पर toxic relationship debate
यूट्यूब पर “10 signs you are dating a billionaire psychopath”
और लिंक्डइन पर कोई लिख देता:
“What Christian Grey taught me about leadership and control.”
भारतीय व्यंग्य की भाषा में कहें तो यह फिल्म उस पीढ़ी का महाभारत है जहाँ अर्जुन को गीता नहीं, “relationship contract” थमा दिया गया है।
अंत में यही लगता है कि हमारे यहाँ कबीर ने प्रेम को “ढाई आखर” कहा था, और आधुनिक बाजार ने उसे “fifty shades” की फ्रेंचाइज़ बना दिया।
Ankit Awasthi





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