
गर्मियों में वनाग्नि रोकने को अलर्ट मोड में वन विभाग, 116 अग्नि नियंत्रण सेल सक्रिय
दीप चन्द त्रिपाठी
लखनऊ। प्रदेश में गर्मी के मौसम में जंगलों में आग लगने की घटनाओं पर रोक लगाने के लिए उत्तर प्रदेश वन विभाग अलर्ट मोड में आ गया है। मुख्यमंत्री Yogi Adityanath के निर्देश पर विभाग ने मुख्यालय से लेकर प्रभागीय स्तर तक व्यापक तैयारियां पूरी कर ली हैं। वनों में आग की घटनाओं पर निगरानी के लिए लखनऊ मुख्यालय में अग्नि नियंत्रण सेल सक्रिय कर दिया गया है, जो 24 घंटे काम करेगा। वन विभाग के अनुसार प्रदेश के प्रत्येक प्रभाग, वृत्त और जोन स्तर पर कुल 116 अग्नि नियंत्रण सेल स्थापित किए गए हैं। इन सेल में कर्मचारियों की तैनाती तीन शिफ्टों में की गई है। पहली शिफ्ट सुबह 6 बजे से दोपहर 2 बजे तक, दूसरी दोपहर 2 बजे से रात 10 बजे तक और तीसरी रात 10 बजे से सुबह 6 बजे तक कार्य करेगी। प्रत्येक प्रभागीय वनाधिकारी कार्यालय में भी नियंत्रण कक्ष बनाया गया है, जहां छोटी से छोटी अग्नि घटना पर नजर रखी जाएगी और उसकी सूचना तुरंत मुख्यालय को दी जाएगी।
वन विभाग ने आम नागरिकों की सहभागिता बढ़ाने के लिए हेल्पलाइन नंबर भी जारी किए हैं। लखनऊ मुख्यालय में 0522-2977310, 0522-2204676, 9651368060 और 7017112077 नंबरों पर वनाग्नि से संबंधित सूचना दी जा सकती है। जनपदों से मिलने वाली सूचनाओं को संबंधित अधिकारी तत्काल मुख्यालय के नियंत्रण कक्ष को प्रेषित करेंगे। इसके अलावा अन्य जिलों में भी स्थानीय स्तर पर हेल्पलाइन नंबर उपलब्ध कराए जाएंगे। वनाग्नि की घटनाओं पर नजर रखने के लिए Forest Survey of India की वेबसाइट पर अलर्ट सिस्टम का भी उपयोग किया जा रहा है। इस प्रणाली के माध्यम से प्रदेश के 3792 अधिकारी, कर्मचारी और आमजन पंजीकरण कर चुके हैं, जिन्हें संभावित आग की सूचना तुरंत मिल सकेगी।
वन विभाग के अनुसार प्रदेश में वन अग्निकाल 15 जून तक माना जाता है। पूर्व वर्षों के अनुभव के आधार पर चित्रकूट, सोनभद्र, पीलीभीत टाइगर रिजर्व, कतर्नियाघाट, दुधवा, बहराइच, महराजगंज, सहारनपुर, बिजनौर, गोंडा, गोरखपुर, मीरजापुर, चंदौली, ललितपुर, बांदा, हमीरपुर और वाराणसी समेत कई प्रभागों को अतिसंवेदनशील और मध्य संवेदनशील श्रेणी में रखा गया है। इन क्षेत्रों में वनाग्नि से निपटने के लिए मॉक ड्रिल भी कराई जा चुकी है।वन विभाग प्रधान मुख्य वन संरक्षक एवं विभागाध्यक्ष सुनील चौधरी ने बताया कि वन्य जीवों के लिए जल संकट से बचाव के लिए जंगलों में नए पक्के वाटर होल बनाए जा रहे हैं तथा पुराने जलस्रोतों की मरम्मत कर उनमें नियमित पानी भरा जा रहा है। साथ ही जंगलों में वाच टावरों का निर्माण और पुराने टावरों के रखरखाव की व्यवस्था भी की जा रही है, ताकि आग की घटनाओं पर समय रहते काबू पाया जा





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