भारत की नीली अर्थव्यवस्था को मिलेगी नई उड़ान, मत्स्य क्षेत्र में 39,272 करोड़ का निवेश

नई दिल्ली। भारत का मत्स्य पालन क्षेत्र अब केवल मछली उत्पादन तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि मूल्य संवर्धन, आधुनिक प्रसंस्करण, कोल्ड चेन, डिजिटल विपणन और स्टार्टअप आधारित नवाचारों के जरिए देश की अर्थव्यवस्था का महत्वपूर्ण स्तंभ बनता जा रहा है। केंद्र सरकार की विभिन्न योजनाओं के माध्यम से इस क्षेत्र में अब तक 39,272 करोड़ रुपये की राशि प्रतिबद्ध की गई है। इसका उद्देश्य मछुआरों और मत्स्य पालकों की आय बढ़ाने, रोजगार के अवसर पैदा करने तथा भारत की नीली अर्थव्यवस्था को मजबूत करना है।
प्रेस सूचना ब्यूरो (PIB) द्वारा 30 अक्टूबर 2026 को जारी जानकारी के अनुसार, मत्स्य पालन क्षेत्र खाद्य एवं पोषण सुरक्षा, ग्रामीण आजीविका, रोजगार सृजन और निर्यात आय में महत्वपूर्ण योगदान दे रहा है। अब इस क्षेत्र में मछली उत्पादन के साथ-साथ उसकी प्रोसेसिंग, पैकेजिंग, ब्रांडिंग और बाजार तक पहुंच को बेहतर बनाने पर विशेष जोर दिया जा रहा है।
39,272 करोड़ रुपये के निवेश से मजबूत होगा मत्स्य क्षेत्र
भारत सरकार ने वर्ष 2015 से मत्स्य पालन क्षेत्र में सार्वजनिक निवेश बढ़ाने के लिए कई महत्वपूर्ण योजनाएं शुरू की हैं। इनमें नीली क्रांति योजना, मत्स्य पालन एवं जलीय कृषि अवसंरचना विकास निधि (FIDF), प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना (PMMSY), प्रधानमंत्री मत्स्य किसान समृद्धि सह-योजना (PM-MKSSY) और किसान क्रेडिट कार्ड (KCC) प्रमुख हैं।
इन योजनाओं के माध्यम से कुल 39,272 करोड़ रुपये की राशि प्रतिबद्ध की गई है। इन पहलों का उद्देश्य देशभर के 74.66 लाख मछुआरों और मत्स्य पालकों की आजीविका को मजबूत करना, आधुनिक सुविधाओं का विस्तार करना और उत्पादन से लेकर बाजार तक की पूरी व्यवस्था को बेहतर बनाना है।
46,500 सुविधाओं का हुआ विकास, 5 स्मार्ट मछली बाजार भी बनेंगे
मत्स्य पालन क्षेत्र में परिवहन और लॉजिस्टिक्स व्यवस्था को मजबूत करने के लिए 3,393.85 करोड़ रुपये के निवेश से करीब 46,500 सुविधाओं का विकास किया गया है। इनमें मछली परिवहन व्यवस्था, थोक एवं खुदरा मछली बाजार, कियोस्क, फीड मिल, आइस प्लांट, कोल्ड स्टोरेज और मूल्य संवर्धन से जुड़ी इकाइयां शामिल हैं।
इसके अलावा पांच आधुनिक और स्मार्ट मछली बाजार विकसित किए जा रहे हैं। इनमें आधुनिक सूचना प्रौद्योगिकी, हरित तकनीक और बेहतर लॉजिस्टिक्स व्यवस्था को एकीकृत किया जाएगा। इन बाजारों से करीब 15,900 रोजगार के अवसर पैदा होने की उम्मीद है।
AI और आधुनिक तकनीक से बदलेगा मछली पालन का तरीका
मत्स्य पालन क्षेत्र में अब कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), इंटरनेट ऑफ थिंग्स (IoT), ब्लॉकचेन, ड्रोन तकनीक और स्मार्ट कोल्ड चेन जैसी आधुनिक तकनीकों का इस्तेमाल बढ़ रहा है। इन तकनीकों के जरिए मछली उत्पादन की निगरानी, गुणवत्ता नियंत्रण, उत्पादों की ट्रेसबिलिटी और भंडारण व्यवस्था को बेहतर बनाया जा रहा है।
इससे फसल कटाई के बाद होने वाले नुकसान को कम करने, उत्पादों की गुणवत्ता बनाए रखने और मछुआरों को बेहतर कीमत दिलाने में मदद मिलने की उम्मीद है।
2,195 मत्स्य किसान उत्पादक संगठनों का गठन
छोटे मछुआरों और मत्स्य पालकों को बाजार से जोड़ने के लिए सामूहिक उद्यम मॉडल को भी बढ़ावा दिया जा रहा है। इसके तहत सरकार ने 2,195 मत्स्य किसान उत्पादक संगठनों (FFPOs) के गठन में सहयोग किया है।
इन संगठनों के माध्यम से छोटे उत्पादक अपने उत्पादों को एकत्रित कर सकते हैं और प्रसंस्करण, ब्रांडिंग तथा विपणन जैसी गतिविधियों में सामूहिक रूप से भाग ले सकते हैं। इनमें से कई संगठनों को ओपन नेटवर्क फॉर डिजिटल कॉमर्स (ONDC) से भी जोड़ा गया है, जिससे उन्हें डिजिटल बाजारों तक पहुंच बनाने में मदद मिल रही है।
इसके अतिरिक्त PM-MKSSY के तहत एनसीडीसी, नेफेड, एसएफएसी और एनईआरएएमएसी जैसी संस्थाओं के सहयोग से 5,500 मत्स्य सहकारी समितियों को मत्स्य किसान उत्पादक संगठनों के रूप में कार्य करने के लिए मजबूत किया जा रहा है।
1.28 लाख से अधिक महिलाओं को मिला लाभ
मत्स्य पालन क्षेत्र में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है। प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना के तहत पिछले पांच वर्षों में 1.28 लाख से अधिक महिला लाभार्थियों के हित में 4,155 करोड़ रुपये से अधिक की परियोजनाओं को मंजूरी दी गई है। इसमें केंद्र सरकार की हिस्सेदारी 1,572 करोड़ रुपये है।
इस सहायता से महिलाएं मछली सुखाने, मछली का अचार और पापड़ बनाने, स्मोक्ड फिश उत्पाद तैयार करने, मछली का पाउडर बनाने, पैकेजिंग और खुदरा बिक्री जैसी गतिविधियों से जुड़ रही हैं।
मोबाइल फिश वेंडिंग इकाइयों और छोटे प्रसंस्करण उद्यमों के जरिए तटीय, अंतर्देशीय और पूर्वोत्तर राज्यों में महिलाओं के लिए स्वरोजगार के नए अवसर तैयार किए जा रहे हैं। इससे महिलाओं की आय बढ़ाने के साथ पोषण सुरक्षा को भी मजबूती मिल रही है।
उच्च मूल्य वाली मछली प्रजातियों के उत्पादन पर जोर
सरकार मछली की गुणवत्ता और उत्पादन क्षमता बढ़ाने के लिए आनुवंशिक सुधार कार्यक्रमों पर भी काम कर रही है। इसका उद्देश्य तेजी से बढ़ने वाली, रोगों के प्रति अधिक प्रतिरोधी और बेहतर उत्पादकता वाली मछली प्रजातियों को विकसित करना है।
इसके तहत ट्राउट, झींगा, कतला, रोहू, तिलापिया, पंगासियस, सीबास और स्कैम्पी जैसी उच्च मूल्य वाली प्रजातियों के उत्पादन को बढ़ावा देने की योजना है। इससे घरेलू बाजार के साथ-साथ प्रसंस्करण और निर्यात से जुड़े कारोबार को भी प्रोत्साहन मिलेगा।
मूल्य संवर्धन से बढ़ेगी मछुआरों की आय
मत्स्य पालन क्षेत्र में मूल्य संवर्धन को भविष्य की बड़ी संभावना के रूप में देखा जा रहा है। अब मछलियों को केवल ताजा उत्पाद के रूप में बेचने के बजाय रेडी-टू-कुक और रेडी-टू-ईट उत्पादों के रूप में भी बाजार में उपलब्ध कराया जा रहा है। इससे उत्पादों की भंडारण अवधि बढ़ाने, फसलोत्तर नुकसान कम करने और घरेलू एवं अंतरराष्ट्रीय बाजारों में बेहतर कीमत प्राप्त करने में मदद मिलती है।
सरकार का लक्ष्य आधुनिक तकनीक, मजबूत कोल्ड चेन, डिजिटल प्लेटफॉर्म, प्रसंस्करण इकाइयों और उद्यमिता को बढ़ावा देकर मत्स्य क्षेत्र को अधिक लाभकारी बनाना है। इन प्रयासों से मछुआरों, युवाओं, महिला समूहों और छोटे उद्यमियों के लिए रोजगार तथा कारोबार के नए अवसर पैदा होने की संभावना है।
कुल मिलाकर, भारत का मत्स्य पालन क्षेत्र अब पारंपरिक उत्पादन व्यवस्था से आगे बढ़कर आधुनिक, तकनीक आधारित और बाजारोन्मुख अर्थव्यवस्था की ओर अग्रसर है। सरकार की योजनाओं और निवेश के जरिए देश की नीली अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के साथ मछुआरों एवं मत्स्य पालकों की आय बढ़ाने पर जोर दिया जा रहा है।
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