प्रयागराज में ‘ड्रमों में करोड़ों’ का रहस्य! 48 जमीनों की खरीद से पुणे कनेक्शन तक, राजेश यादव की संपत्ति जांच के घेरे में

प्रयागराज। नवाबगंज क्षेत्र के बरईपुर रामनगर गांव में जमीनों की खरीद और कथित तौर पर करोड़ों रुपये नकद मिलने का मामला जांच एजेंसियों के लिए पहेली बन गया है। राजेश यादव उर्फ बबलू की ओर से महज तीन वर्षों में अपने और परिवार के सदस्यों के नाम 48 जमीनों की रजिस्ट्री कराए जाने की जानकारी सामने आई है। अब पुलिस और आयकर विभाग संपत्तियों के साथ-साथ इस बात की पड़ताल कर रहे हैं कि इतनी बड़ी खरीदारी के लिए पैसा कहां से आया।
2023 से शुरू हुई जमीन खरीदने की रफ्तार
मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, राजेश यादव ने वर्ष 2023 में जमीन खरीदना शुरू किया था। शुरुआत में उसने अलग-अलग स्थानों पर छोटी जमीनें खरीदीं, लेकिन नवंबर 2024 के बाद खरीदारी की रफ्तार तेज हो गई। तीन साल के भीतर उसके और परिवार के सदस्यों के नाम कुल 48 रजिस्ट्रियां कराई गईं।
इनमें दो से पांच बिस्वा तक के कई भूखंड शामिल हैं, जबकि सबसे बड़ी जमीन करीब ढाई बीघा बताई गई है। तीन जमीनों की कीमत एक करोड़ रुपये से अधिक बताई जा रही है। जमीनों का दायरा बरईपुर के अलावा दादनपुर, मुबारकपुर, मेंडारा, शांतिपुरम और फाफामऊ सहित कई इलाकों तक बताया गया है।

15 दुकानों का मार्केट और दूसरे वाहन भी खरीदे
जमीनों के अलावा राजेश ने गांव के बाजार में दो मंजिला मार्केट का निर्माण भी शुरू कराया। इसमें 15 दुकानें बनाई जा रही हैं। रिपोर्ट के अनुसार, इस मार्केट के लिए करीब डेढ़ करोड़ रुपये की जमीन खरीदी गई थी। इसके साथ ही ट्रैक्टर-ट्रॉली, पिकअप वाहन और डीजे-बैंड पर भी रकम खर्च की गई।
स्थानीय लोगों के बीच उसकी तेजी से बढ़ती संपत्ति को लेकर सवाल उठने लगे थे। हालांकि, संपत्ति खरीदना अपने आप में किसी अपराध का प्रमाण नहीं है। जांच का मुख्य सवाल इन खरीदों के लिए इस्तेमाल किए गए धन का स्रोत है।

जमीन के नीचे मिले तीन ड्रम, आयकर विभाग ने संभाली जांच
मामले ने उस समय नया मोड़ लिया जब बुधवार रात पुलिस को बरईपुर रामनगर स्थित संपत्ति में जमीन के नीचे छिपाकर रखे गए तीन नीले ड्रम मिले। इनमें कपड़े में लिपटे 500 रुपये के नोटों के बंडल रखे होने की बात सामने आई। पुलिस ने मौके पर खुदाई कराई और बाद में आयकर विभाग ने जांच की कमान संभाल ली।
पुलिस और आयकर विभाग की टीमें बरामद नकदी की गिनती, संपत्ति के दस्तावेजों और धन के स्रोत की जांच कर रही हैं। अधिकारियों ने परिसर में आगे भी खुदाई कराई और जमीन के नीचे अन्य संभावित ठिकानों की तलाश के लिए ग्राउंड-पेनेट्रेटिंग रडार का इस्तेमाल किया। बरामद रकम का अंतिम आंकड़ा आधिकारिक गिनती और सत्यापन के बाद ही स्पष्ट होगा।

पुणे से प्रयागराज तक खंगाला जा रहा आर्थिक नेटवर्क
रिपोर्टों के अनुसार, राजेश और उसके भाई राकेश यादव पहले पुणे में एक बुलियन कारोबारी के यहां काम करते थे। कोरोना महामारी के दौरान वर्ष 2020 में दोनों गांव लौट आए थे। जांच एजेंसियां अब पुणे में उनके पुराने कामकाज, कारोबारी संपर्कों और वहां से गांव तक कथित तौर पर लाई गई रकम की जानकारी जुटा रही हैं।
पुलिस और आयकर विभाग की संयुक्त टीम महाराष्ट्र भी गई है, ताकि पूछताछ में सामने आए तथ्यों का सत्यापन किया जा सके। जांच में जमीन की रजिस्ट्री, बैंक खातों, नकदी के लेन-देन और संपत्तियों के वास्तविक स्वामित्व जैसे पहलुओं को खंगाला जा रहा है।
अब जांच के सामने तीन बड़े सवाल
48 जमीनों की खरीद में इस्तेमाल हुई रकम का वास्तविक स्रोत क्या था?
जमीन के नीचे मिले नकदी भरे ड्रमों का मालिक कौन है और पैसा कहां से आया?
क्या जमीनों की खरीद और नकदी का कोई साझा कारोबारी या वित्तीय नेटवर्क है?
फिलहाल पुलिस और आयकर विभाग की जांच जारी है। बरामद नकदी की आधिकारिक गिनती और वित्तीय दस्तावेजों की पड़ताल के बाद ही इस पूरे मामले की तस्वीर साफ हो पाएगी।
लेखक के बारे में
Anup Sharma
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