मतदाता सूची पुनरीक्षण को लेकर अनीस मंसूरी ने उठाए सवाल

लखनऊ। पसमांदा मुस्लिम समाज के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं पूर्व मंत्री अनीस मंसूरी ने मतदाता सूचियों के पुनरीक्षण के दौरान पात्र नागरिकों के नाम प्रभावित होने की सामने आ रही शिकायतों को गंभीर विषय बताया है। उन्होंने इस संबंध में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र भेजकर मामले की स्वतंत्र, निष्पक्ष और समयबद्ध जांच कराने की मांग की है।
अनीस मंसूरी ने कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में मतदाता सबसे महत्वपूर्ण कड़ी है। किसी पात्र नागरिक का नाम मतदाता सूची से हटना या प्रभावित होना केवल प्रशासनिक विषय नहीं, बल्कि उसके संवैधानिक मताधिकार से जुड़ा मामला है। ऐसे में मतदाता सूची के पुनरीक्षण की प्रक्रिया में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करना आवश्यक है।
मतदाता सूची का स्वतंत्र ऑडिट कराने की मांग
मंसूरी ने कहा कि मतदाता सूचियों के पुनरीक्षण को लेकर अलग-अलग स्तरों पर शिकायतें और चिंताएं सामने आ रही हैं। ऐसे में किसी भी दावे या आंकड़े को अंतिम मानने के बजाय स्वतंत्र और पारदर्शी ऑडिट कराया जाना चाहिए।
उन्होंने मांग की कि ऑडिट के माध्यम से यह स्पष्ट किया जाए कि कितने पात्र नागरिकों के नाम प्रभावित हुए और इसके पीछे वास्तविक कारण क्या रहे।
तकनीकी गड़बड़ियों की विशेषज्ञों से जांच की मांग
अनीस मंसूरी ने कहा कि यदि किसी तकनीकी प्रणाली, सॉफ्टवेयर, डेटा मैपिंग, अनमैपिंग, लॉजिकल डिस्क्रेपेंसी या अन्य प्रक्रियात्मक कारण से पात्र नागरिकों के नाम प्रभावित हुए हैं तो उनकी पहचान कर जल्द से जल्द सुधार किया जाना चाहिए।
उन्होंने मतदाता सूची तैयार करने में इस्तेमाल होने वाली तकनीकी प्रणालियों और सॉफ्टवेयर का विशेषज्ञों से परीक्षण कराने की भी मांग की है।
कमजोर वर्गों के मताधिकार की सुरक्षा पर जोर
मंसूरी ने विशेष रूप से पसमांदा मुसलमानों, गरीब, अल्पसंख्यक, प्रवासी श्रमिक, बेघर, वृद्ध और अन्य कमजोर वर्गों के पात्र नागरिकों के मताधिकार की सुरक्षा के लिए विशेष व्यवस्था किए जाने की मांग की।
उन्होंने कहा कि दस्तावेजी या तकनीकी कठिनाइयों के कारण किसी पात्र नागरिक को उसके लोकतांत्रिक अधिकार से वंचित नहीं किया जाना चाहिए।
नाम की स्थिति जानने और आपत्ति दर्ज कराने की सरल व्यवस्था की मांग
पूर्व मंत्री ने मांग की कि प्रत्येक नागरिक को अपने नाम की स्थिति जानने, आपत्ति दर्ज कराने, आवश्यक सुधार कराने और अपील करने का सरल, पारदर्शी और प्रभावी अवसर मिलना चाहिए।
उन्होंने मतदाता सूची से नाम हटाने की प्रक्रिया में भी स्पष्ट प्रोटोकॉल और जवाबदेही तय करने की मांग की, ताकि किसी पात्र मतदाता का नाम बिना उचित प्रक्रिया के प्रभावित न हो।
संवैधानिक संस्थाओं पर आरोप लगाना उद्देश्य नहीं
अनीस मंसूरी ने स्पष्ट किया कि उनका उद्देश्य किसी संवैधानिक संस्था पर आरोप लगाना या उसकी स्वतंत्रता एवं गरिमा को प्रभावित करना नहीं है। उनके मुताबिक, निष्पक्ष जांच का उद्देश्य तथ्यों को सामने लाना और यदि कहीं कोई कमी पाई जाती है तो उसका उचित समाधान सुनिश्चित करना होना चाहिए।
उन्होंने कहा कि इससे निर्वाचन प्रक्रिया की विश्वसनीयता और संवैधानिक संस्थाओं के प्रति जनता का विश्वास मजबूत होगा।
गंभीर चूक मिलने पर जवाबदेही तय करने की मांग
मंसूरी ने कहा कि यदि स्वतंत्र जांच में किसी स्तर पर गंभीर प्रक्रियात्मक या वैधानिक चूक प्रमाणित होती है तो संबंधित व्यक्ति की जवाबदेही संविधान और कानून के अनुरूप निर्धारित की जानी चाहिए।
उन्होंने इस पूरे मुद्दे को किसी राजनीतिक दल या व्यक्ति विशेष के पक्ष या विपक्ष का विषय न बताते हुए इसे प्रत्येक पात्र नागरिक के मताधिकार और लोकतांत्रिक व्यवस्था में जनता के विश्वास से जुड़ा मामला बताया।
अनीस मंसूरी ने प्रधानमंत्री से पूरे मामले को गंभीरता से लेते हुए स्वतंत्र जांच, तकनीकी ऑडिट और आवश्यक सुधारात्मक कार्रवाई सुनिश्चित कराने का आग्रह किया है। उन्होंने कहा कि सरकारें और राजनीतिक परिस्थितियां बदलती रहती हैं, लेकिन नागरिक का मताधिकार लोकतंत्र की स्थायी नींव है।
लेखक के बारे में
Syed Fiza Khatoon
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