₹2,000 से ज्यादा UPI पेमेंट पर चार्ज का मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा, रोक से इनकार; केंद्र-RBI-NPCI से मांगा जवाब

नई दिल्ली। ₹2,000 से अधिक के चुनिंदा UPI मर्चेंट पेमेंट पर प्रस्तावित Merchant Discount Rate (MDR) को लेकर सोमवार को सुप्रीम कोर्ट में अहम सुनवाई हुई। शीर्ष अदालत ने फिलहाल इस व्यवस्था पर अंतरिम रोक लगाने से इनकार कर दिया, हालांकि मामले में केंद्र सरकार, भारतीय रिजर्व बैंक (RBI), नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (NPCI) और संबंधित पक्षों को नोटिस जारी कर चार सप्ताह के भीतर जवाब दाखिल करने को कहा है।
यह मामला अधिवक्ता अंजन दत्ता की ओर से दायर याचिका से जुड़ा है। याचिका में ₹2,000 से अधिक के कुछ UPI person-to-merchant (P2M) लेनदेन पर MDR लागू करने के लिए जारी सरकारी अधिसूचनाओं और 15 सितंबर के MDR फ्रेमवर्क को चुनौती दी गई है। याचिकाकर्ता ने इस व्यवस्था के लिए पर्याप्त कानूनी आधार और प्रक्रिया पर सवाल उठाए हैं।
'यह शुल्क टैक्स है, फीस है या कुछ और?'
मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय पीठ ने सुनवाई के दौरान केंद्र से इस शुल्क की कानूनी प्रकृति स्पष्ट करने को कहा। पीठ में न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना भी शामिल हैं। अदालत ने यह जानना चाहा कि यदि यह टैक्स या फीस नहीं है तो इसे लागू करने का कानूनी आधार क्या है और इस शुल्क के पीछे किस सेवा का भुगतान किया जा रहा है। अदालत ने केंद्र से इन बिंदुओं को हलफनामे के जरिए स्पष्ट करने को कहा।
केंद्र की ओर से अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल एन. वेंकटरमण ने अदालत को बताया कि प्रस्तावित MDR सरकार द्वारा वसूला जाने वाला टैक्स या शुल्क नहीं है। उनके अनुसार, यह भुगतान व्यवस्था से जुड़े बैंकों और पेमेंट एग्रीगेटर्स के बीच सेटलमेंट से संबंधित चार्ज है और केंद्र सरकार इस राशि में से कोई हिस्सा नहीं लेगी। केंद्र ने यह भी बताया कि प्रस्तावित व्यवस्था के तहत बड़ी संख्या में लेनदेन इससे बाहर रहेंगे।
15 अक्टूबर से लागू होने का प्रस्ताव
नए ढांचे के तहत चुनिंदा मर्चेंट UPI लेनदेन पर ₹2,000 से अधिक की राशि के लिए 0.4 प्रतिशत MDR प्रस्तावित है। ₹2,000 तक के मर्चेंट भुगतान और व्यक्ति-से-व्यक्ति (P2P) UPI लेनदेन इस MDR के दायरे में नहीं होंगे। ₹75,000 या उससे अधिक के भुगतान पर MDR की अधिकतम सीमा ₹300 रखी गई है। प्रस्तावित व्यवस्था 15 अक्टूबर 2026 से लागू होनी है।
कुछ आवश्यक और कम मार्जिन वाले क्षेत्रों के लिए अलग व्यवस्था प्रस्तावित है। उपलब्ध विवरण के अनुसार, रेलवे, टेलीकॉम, बीमा, ईंधन और कृषि इनपुट जैसे क्षेत्रों में ₹2,000 से अधिक के लेनदेन पर ₹5 का फ्लैट MDR प्रस्तावित है। वहीं म्यूचुअल फंड, प्रतिभूतियों और स्टॉक ब्रोकरों के माध्यम से होने वाले कुछ भुगतानों के लिए 0.02 प्रतिशत MDR का प्रावधान बताया गया है।
अब चार सप्ताह में देना होगा जवाब
सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार, RBI और NPCI समेत संबंधित पक्षों को चार सप्ताह के भीतर अपना जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है। फिलहाल अदालत ने प्रस्तावित व्यवस्था पर रोक नहीं लगाई है। इसका मतलब है कि सोमवार की सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने इस व्यवस्था की वैधता पर कोई अंतिम फैसला नहीं दिया है, बल्कि मामले के कानूनी और तकनीकी पहलुओं पर संबंधित पक्षों से विस्तृत जवाब मांगा है।
अगली सुनवाई में केंद्र और अन्य पक्षों के जवाब के बाद अदालत यह देखेगी कि ₹2,000 से अधिक के चुनिंदा UPI मर्चेंट लेनदेन पर MDR लागू करने की व्यवस्था का कानूनी आधार क्या है और इसे किस तरीके से लागू किया जा सकता है।
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