JNU में गुरु-शिष्य मर्यादा पर विवाद, छात्राओं की शिकायतों के बाद प्रोफेसर पर FIR; कोर्ट से मिली अंतरिम राहत

नई दिल्ली। देश के प्रतिष्ठित जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) में छात्राओं की ओर से यौन उत्पीड़न के आरोप लगाए जाने के बाद एक प्रोफेसर का मामला लगातार चर्चा में है। आरोपों के केंद्र में कांग्रेस सांसद और JNU के प्रोफेसर रहे अंगोमचा बिमोल अकोइजाम हैं। छात्राओं ने उन पर कक्षा और वाइवा के दौरान आपत्तिजनक टिप्पणियां करने, बिना सहमति हाथ पकड़ने और निजी सीमाओं का उल्लंघन करने जैसे आरोप लगाए हैं। विश्वविद्यालय की आंतरिक समिति की जांच के बाद उन्हें 9 अक्टूबर को सेवा से बर्खास्त कर दिया गया था। हालांकि, अकोइजाम ने आरोपों को खारिज करते हुए पूरी कार्रवाई को अपने खिलाफ साजिश और 'विच हंट' बताया है।
छात्राओं के आरोपों में क्या-क्या सामने आया?
मीडिया रिपोर्टों में विश्वविद्यालय की आंतरिक समिति की जांच के निष्कर्षों के हवाले से बताया गया है कि छात्राओं ने प्रोफेसर पर पढ़ाई और वाइवा के दौरान निजी रिश्तों से जुड़े सवाल पूछने के आरोप लगाए। शिकायतों के मुताबिक, उनसे बॉयफ्रेंड, डेटिंग और प्रेम संबंधों को लेकर ऐसे सवाल किए गए जिनका अकादमिक विषय से सीधा संबंध नहीं था।
कुछ छात्राओं ने आरोप लगाया कि प्रोफेसर ने कक्षा में यौन संकेतों वाले शब्दों और टिप्पणियों का इस्तेमाल किया। समिति के सामने यह शिकायत भी रखी गई कि उन्होंने छात्राओं से हाथ पकड़ने को कहा और हिचकिचाहट के बावजूद शारीरिक संपर्क किया। कुछ मामलों में बिना सहमति चुटकी काटने का आरोप भी लगाया गया।

फिल्म दिखाने और देर रात घर पर वाइवा का भी आरोप
मामले में एक फिल्म की स्क्रीनिंग का जिक्र भी सामने आया है। शिकायतों के अनुसार, कक्षा में 'लस्ट स्टोरीज' फिल्म दिखाई गई, लेकिन छात्राओं को पहले से उसके विषय और आपत्तिजनक दृश्यों के बारे में पर्याप्त जानकारी नहीं दी गई थी। समिति ने फिल्म दिखाने को अपने आप में अनुचित नहीं माना, लेकिन बिना पूर्व जानकारी स्क्रीनिंग कराए जाने की परिस्थितियों पर सवाल उठाए।
इसके अलावा, कुछ छात्राओं ने आरोप लगाया कि वाइवा के लिए उन्हें प्रोफेसर के आवास पर बुलाया गया और कुछ परीक्षाएं देर रात तक चलीं। समिति ने वाइवा के स्थान, अवधि और तीसरे व्यक्ति की मौजूदगी में असमानता को भी अपनी जांच में महत्वपूर्ण माना।
आंतरिक समिति ने की कार्रवाई की सिफारिश
JNU की आंतरिक समिति ने शिकायतकर्ताओं के बयान, गवाहों की गवाही और उपलब्ध सामग्री की जांच की। रिपोर्ट के मुताबिक, समिति ने अलग-अलग घटनाओं को एक साथ देखते हुए शिक्षक और छात्रा के बीच अपेक्षित पेशेवर सीमाओं के उल्लंघन का पैटर्न पाया और बड़ी अनुशासनात्मक कार्रवाई की सिफारिश की।
इसके बाद विश्वविद्यालय ने 9 अक्टूबर को अकोइजाम को सेवा से बर्खास्त करने का आदेश जारी किया। दिल्ली पुलिस ने 11 अक्टूबर को विश्वविद्यालय के मुख्य सुरक्षा अधिकारी की शिकायत के आधार पर वसंत कुंज नॉर्थ थाने में भारतीय न्याय संहिता की संबंधित धाराओं के तहत FIR दर्ज की। मामले में यौन उत्पीड़न और महिला की गरिमा को ठेस पहुंचाने से संबंधित आरोप शामिल हैं।
सांसद ने आरोपों को बताया 'विच हंट', प्रक्रिया पर उठाए सवाल
अकोइजाम ने छात्राओं की ओर से लगाए गए आरोपों को खारिज किया है। उन्होंने विश्वविद्यालय की जांच प्रक्रिया पर सवाल उठाए और कहा कि उन्हें समिति की रिपोर्ट तथा कार्रवाई के संबंध में उचित अवसर नहीं दिया गया। उन्होंने मामले को राजनीतिक रूप से प्रेरित बताते हुए 'विच हंट' करार दिया। उनका कहना है कि उनके खिलाफ लगाए गए आरोपों और जांच प्रक्रिया से जुड़े तथ्यों को कानूनी तरीके से चुनौती दी जाएगी।
हाईकोर्ट ने बर्खास्तगी पर लगाई रोक, गिरफ्तारी से भी मिली अंतरिम राहत
मामले में 2 नवंबर को दिल्ली हाईकोर्ट ने JNU के बर्खास्तगी आदेश पर रोक लगा दी और विश्वविद्यालय से जवाब मांगा। इसके बाद 5 नवंबर को राउज एवेन्यू कोर्ट ने अकोइजाम की अग्रिम जमानत याचिका पर सुनवाई के दौरान निर्देश दिया कि गिरफ्तारी की जरूरत पड़ने पर पुलिस उन्हें सात दिन पहले नोटिस दे। यह राहत जांच में सहयोग करने की शर्त से जुड़ी है।
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