गुलामी की निराशा के बीच हुआ ऋषि का प्रादुर्भाव, सीएम योगी ने पंडित श्रीराम शर्मा आचार्य को किया नमन

लखनऊ। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने रविवार को लखनऊ में आयोजित प्रांतीय शिक्षक गरिमा सम्मेलन में भारतीय संस्कृति, सनातन मूल्यों, शिक्षा और समाज निर्माण में शिक्षकों की भूमिका पर विस्तार से विचार रखे। अखिल विश्व गायत्री परिवार की ओर से डॉ. राम मनोहर लोहिया राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय में आयोजित प्रांतीय शिक्षक गरिमा सम्मेलन में मुख्यमंत्री ने गायत्री परिवार के संस्थापक पंडित श्रीराम शर्मा आचार्य और माता भगवती देवी शर्मा के योगदान को याद करते हुए उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि देश के उस कालखंड को याद करने की आवश्यकता है, जब भारत गुलामी के दौर से गुजर रहा था और समाज में निराशा का वातावरण था। उस समय लोगों के भीतर यह भावना घर कर गई थी कि गुलामी ही उनकी नियति बन चुकी है। ऐसे समय में ब्रजभूमि की धरती पर एक ऐसे ऋषि का प्रादुर्भाव हुआ, जिसकी भारतीय संस्कृति, सनातन मूल्यों और परंपराओं के प्रति गहरी निष्ठा थी।
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उन्होंने कहा कि “याद करिए जब यह देश पराधीन था, जब व्यक्ति अपने बारे में सोचता था। जब व्यक्ति के पास उस कालखंड में एक हताशा और निराशा थी और हर व्यक्ति यह मानकर चलता था कि गुलामी हमारी नियति बन चुकी है। तब देवयोग से आगरा की धरती पर, ब्रजभूमि में जन्म लेकर भारतीय संस्कृति, भारतीय सनातन मूल्यों और परंपराओं पर प्रतिकार निष्ठा रखने वाले एक ऋषि का प्रादुर्भाव होता है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि पंडित श्रीराम शर्मा आचार्य ने अपनी साधना और विचारों के माध्यम से समाज में सकारात्मक परिवर्तन की दिशा तैयार की। मथुरा में प्रारंभिक साधना से लेकर हरिद्वार में गायत्री परिवार की स्थापना तक की उनकी यात्रा समाज जागरण और राष्ट्र निर्माण के लिए महत्वपूर्ण रही है।

उन्होंने कहा कि मथुरा में प्रारंभिक साधना को आगे बढ़ाते हुए पंडित श्रीराम शर्मा आचार्य ने हरिद्वार में जिस गायत्री परिवार की स्थापना की, वह आज अखिल विश्व गायत्री परिवार के रूप में देश-दुनिया में लोगों को समाज से जोड़ने का कार्य कर रहा है। यज्ञों और सामूहिक आयोजनों के माध्यम से सर्वसमाज को एक मंच और एक वेदी पर बैठाकर सामाजिक एकता का जो उदाहरण प्रस्तुत किया गया है, वह अभिनंदनीय है।
पंडित श्रीराम शर्मा और माता भगवती देवी को किया नमन
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि वे इस पवित्र संस्था के संस्थापक पंडित श्रीराम शर्मा आचार्य को नमन करते हैं। उन्होंने उनके साथ अनवरत साधना का अभिन्न हिस्सा रहीं माता भगवती देवी शर्मा की स्मृतियों को भी नमन करते हुए विनम्र श्रद्धांजलि अर्पित की।
गायत्री परिवार के साहित्य में भी पंडित श्रीराम शर्मा आचार्य के मथुरा प्रवास, साधना और विचार-निर्माण के दौर का उल्लेख मिलता है। इसी क्रम में माता भगवती देवी शर्मा की भूमिका को भी गायत्री परिवार के विस्तार और संगठनात्मक कार्यों से जोड़ा गया है।
शिक्षकों की भूमिका को बताया महत्वपूर्ण
प्रांतीय शिक्षक गरिमा सम्मेलन में मुख्यमंत्री ने शिक्षकों की भूमिका को केवल विद्यार्थियों को विषयगत ज्ञान देने तक सीमित नहीं माना। उन्होंने शिक्षा के माध्यम से संस्कार, सामाजिक चेतना और राष्ट्र निर्माण की आवश्यकता पर जोर दिया।
समाज के साथ परिवारों को भी जोड़ें
मुख्यमंत्री ने कहा कि संयुक्त परिवार भारत की ताकत रहे हैं। परिवार सीमित होने के साथ बिखराव और तनाव बढ़ा है। गायत्री परिवार को समाज के साथ परिवारों को जोड़ने का दायित्व भी निभाना होगा। प्रकृति किसी से भेदभाव नहीं करती, इसलिए समाज में भी भेदभाव का स्थान नहीं होना चाहिए।
भारतीय संस्कृति ज्ञान परीक्षा के टॉप-10 स्कूल सम्मानित
कार्यक्रम में भारतीय संस्कृति ज्ञान परीक्षा के टॉप-10 स्कूलों को सम्मानित किया गया। इनमें सीतापुर के सीतापुर इंटर कॉलेज व आशुतोष बृजभवन लाल इंटर कॉलेज, रायबरेली का चंद्रशेखर मेमोरियल पब्लिक स्कूल, लखनऊ के लखनऊ पब्लिक स्कूल व सिटी मॉन्टेसरी स्कूल, गाजियाबाद का डॉ. केएन मोदी साइंस एंड वाणिज्य इंटर कॉलेज, अमेठी का शिव प्रताप इंटर कॉलेज, बुलंदशहर का अमर सिंह इंटर कॉलेज, चित्रकूट का चित्रकूट इंटर कॉलेज और मुजफ्फरनगर का एमजी पब्लिक स्कूल शामिल हैं।
लेखक के बारे में
Santosh Kumar Singh
श्री सिंह ‘विजुअल लाइव’ मासिक पत्रिका एवं न्यूज पोर्टल के संपादक के रूप में पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। वर्ष 2004 से उन्होंने प्रिंट और डिजिटल मीडिया में अपनी सेवाएं देते हुए पत्रकारिता का लंबा अनुभव अर्जित किया है। लखनऊ से प्रकाशित हिन्दी दैनिक राष्ट्रीय सहारा, डेली न्यूज एक्टिविस्ट, राष्ट्रीय स्वरूप और भारत प्रतिदिन सहित विभिन्न मीडिया संस्थानों के लिए उन्होंने रिपोर्टिंग की है। प्रधानमंत्री और राष्ट्रपति के लखनऊ आगमन से लेकर राजनीति, प्रशासन, जनसरोकार और शहर की महत्वपूर्ण घटनाओं की रिपोर्टिंग में उनकी सक्रिय भूमिका रही है। श्री सिंह की विशेष रुचि खोजी पत्रकारिता और डिजिटल माध्यमों के प्रभावी इस्तेमाल में है। इंटरनेट आधारित शोध, सूचना के स्रोतों की पड़ताल और खबर की बारीकियों तक पहुंचने की उनकी कार्यशैली उन्हें अलग पहचान देती है। बदलते मीडिया परिदृश्य में वे तथ्यपरक, विश्वसनीय और जनसरोकार से जुड़ी पत्रकारिता को प्राथमिकता देते हैं। पत्रकारिता के साथ उन्हें संगीत और यात्रा में विशेष रुचि है। उनका मानना है कि एक पत्रकार के लिए जिज्ञासा, निरंतर सीखने की प्रवृत्ति और तथ्यों के प्रति ईमानदारी सबसे महत्वपूर्ण गुण हैं। Santosh Kumar Singh की सभी खबरें देखें →
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