अस्पताल के कचरे से संक्रमण रोकने की पहल, वाराणसी मंडल चिकित्सालय में बायोमेडिकल वेस्ट प्रबंधन पर हुआ जागरूकता सेमिनार

वाराणसी। अस्पतालों से निकलने वाले जैव चिकित्सा अपशिष्ट का सही तरीके से प्रबंधन न केवल मरीजों और स्वास्थ्यकर्मियों की सुरक्षा के लिए जरूरी है, बल्कि इससे पूरे समाज को संक्रमण के खतरे से बचाया जा सकता है। इसी उद्देश्य से पूर्वोत्तर रेलवे के वाराणसी मंडल चिकित्सालय में शनिवार, 7 नवंबर 2026 को ‘बायोमेडिकल वेस्ट प्रबंधन : स्वच्छ अस्पताल, स्वच्छ समाज’ विषय पर जागरूकता सेमिनार आयोजित किया गया।
यह कार्यक्रम रेलवे बोर्ड के निर्देश पर 1 से 7 नवंबर तक चलाए जा रहे ‘मिशन लाइफ’ के अंतर्गत ‘ब्रिक्स सतत जीवनशैली सप्ताह’ का हिस्सा रहा। मंडल रेल प्रबंधक आशीष जैन की उपस्थिति में आयोजित सेमिनार का नेतृत्व मंडल चिकित्सालय के मुख्य चिकित्सा अधीक्षक डॉ. आर. जे. चौधुरी ने किया।
रंगों के आधार पर कचरे का पृथक्करण जरूरी
सेमिनार में अपर मुख्य चिकित्सा अधीक्षक डॉ. कल्पना दूबे ने बायोमेडिकल वेस्ट के उचित प्रबंधन और सुरक्षित निस्तारण के विभिन्न पहलुओं की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि अस्पतालों में निकलने वाले जैव चिकित्सा अपशिष्ट को निर्धारित रंगों वाले बैग और कंटेनरों में अलग-अलग रखना बेहद जरूरी है।
उन्होंने कहा कि कचरे का स्रोत पर ही पृथक्करण, सुरक्षित संग्रहण और वैज्ञानिक तरीके से निस्तारण करने से अस्पताल परिसर में स्वच्छता बनी रहती है। साथ ही संक्रमण फैलने की आशंका कम होती है और मरीजों, चिकित्सकों, पैरामेडिकल कर्मचारियों तथा सफाईकर्मियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने में मदद मिलती है।

डीआरएम ने मानकों के पालन की अपील की
मंडल रेल प्रबंधक आशीष जैन ने कहा कि स्वच्छ और सुरक्षित चिकित्सालय के निर्माण में बायोमेडिकल वेस्ट प्रबंधन की महत्वपूर्ण भूमिका है। उन्होंने सभी स्वास्थ्यकर्मियों से अपील की कि वे निर्धारित मानकों और दिशा-निर्देशों का पूरी जिम्मेदारी के साथ पालन करें।
उन्होंने स्वच्छता को केवल अस्पताल प्रशासन की जिम्मेदारी न मानते हुए इसे सामूहिक प्रयास से जुड़ा विषय बताया। कचरे के सही निस्तारण में लापरवाही से संक्रमण और पर्यावरण प्रदूषण का खतरा बढ़ सकता है।
चिकित्सकों और कर्मचारियों ने ली स्वच्छता की शपथ
सेमिनार के समापन पर उपस्थित चिकित्सकों और पैरामेडिकल कर्मचारियों ने बायोमेडिकल वेस्ट का सही पृथक्करण, सुरक्षित प्रबंधन और वैज्ञानिक तरीके से निस्तारण करने की शपथ ली। सभी ने चिकित्सालय परिसर को स्वच्छ और संक्रमणमुक्त बनाए रखने के लिए निर्धारित प्रक्रियाओं का पालन करने का संकल्प लिया।
कार्यक्रम में डॉ. ए.के. सिंह, डॉ. आर.आर. सिंह, डॉ. नीरज कुमार, डॉ. ममता कुमारी, डॉ. मोनिका शुक्ला सहित मंडल चिकित्सालय के अन्य चिकित्सक और पैरामेडिकल कर्मचारी मौजूद रहे।
क्यों जरूरी है बायोमेडिकल वेस्ट का सही निस्तारण?
बायोमेडिकल वेस्ट में इस्तेमाल की गई पट्टियां, खून से संक्रमित सामग्री, सुई, दवाओं के अवशेष और प्रयोगशाला से निकलने वाला कचरा शामिल हो सकता है। इसे सामान्य कचरे के साथ मिलाना संक्रमण और चोट का जोखिम बढ़ा सकता है। भारत के बायोमेडिकल वेस्ट प्रबंधन नियम, 2016 के अनुसार ऐसे कचरे का उत्पादन स्थल पर ही निर्धारित रंगों के आधार पर पृथक्करण और नियमानुसार उपचार एवं निस्तारण जरूरी है।
लेखक के बारे में
Ashutosh Kumar Sharma
मूल रूप से वाराणसी, उत्तर प्रदेश के रहने वाले आशुतोष कुमार शर्मा पेशे से स्कूल प्रधानाचार्य हैं। पिछले 8 वर्षों से पत्रकारिता एवं मीडिया क्षेत्र से जुड़े श्री शर्मा की डिजिटल मीडिया, नई तकनीकों और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स में विशेष रुचि है। उनका मानना है कि तकनीक और मीडिया का समन्वय ही भविष्य की पत्रकारिता की दिशा तय करेगा। मीडिया को समाज का चौथा स्तंभ मानते हुए वे सच्चाई, तथ्यपरकता और जनसरोकार से जुड़े मुद्दों को सामने लाने के लिए प्रतिबद्ध हैं। Ashutosh Kumar Sharma की सभी खबरें देखें →
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