डायल-112 में 12 घंटे की ड्यूटी घटाकर 8 घंटे करने की तैयारी, जिलों से मांगे सुझाव

यूपी-112 के डीजी विनोद कुमार सिंह ने सभी पुलिस आयुक्तों और एसएसपी/एसपी को भेजा पत्र, उपलब्ध मैनपावर के आधार पर व्यवस्था लागू करने पर मांगी राय
लखनऊ। यूपी पुलिस की नागरिक केंद्रित आपातकालीन सेवा यूपी-112 में तैनात चार पहिया पीआरवी कर्मियों की ड्यूटी व्यवस्था में बड़े बदलाव की तैयारी है। लंबे समय से 12-12 घंटे की दो शिफ्ट में काम कर रहे पीआरवी कर्मियों को 8-8 घंटे की तीन शिफ्ट में बांटने की कवायद शुरू हो गई है। हालांकि इसे लेकर एक बात साफ है कि ’’यूपी-112 मुख्यालय ने अभी पूरे प्रदेश में 8 घंटे की ड्यूटी अनिवार्य करने का आदेश नहीं दिया है। पुलिस महानिदेशक यूपी-112 विनोद कुमार सिंह ने 5 सितंबर 2026 को जारी पत्र में कमिश्नरेट और जनपद स्तर पर इसकी व्यावहारिकता पर निर्णय लेने को कहा है।
यानी अब असली फैसला जिलों के कप्तानों और पुलिस आयुक्तों को करना है। उन्हें अपने यहां उपलब्ध पुलिसकर्मियों की संख्या, पीआरवी की ऑपरेशनल जरूरत और पुलिसकर्मियों के कल्याण को देखते हुए तय करना होगा कि 8 घंटे की तीन शिफ्ट की व्यवस्था लागू की जा सकती है या नहीं।

लेकिन इस पूरी कवायद के बीच ’’डायल-112 में चालकों की कमी सबसे बड़ी चुनौती बनकर सामने आ सकती है। क्योंकि तीन शिफ्ट की व्यवस्था सिर्फ ड्यूटी का समय बदलने तक सीमित नहीं है, बल्कि हर पीआरवी को लगातार सड़क पर बनाए रखने के लिए पर्याप्त संख्या में चालक और पुलिसकर्मियों की जरूरत होगी।
डीजी यूपी-112 के पत्र में क्या कहा गया है?
डीजी यूपी-112 विनोद कुमार सिंह ने प्रदेश के सभी पुलिस आयुक्तों तथा जनपदीय वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक/पुलिस अधीक्षकों को भेजे पत्र में यूपी-112 के चार पहिया पीआरवी कर्मियों की दो शिफ्ट के स्थान पर तीन शिफ्ट यानी 8-8 घंटे की ड्यूटी की व्यवस्था को प्रभावी रूप से लागू करने के सम्बंध में सुझाव मांगा गया है। पत्र में यूपी-112 को नागरिक-केंद्रित 24×7 आपातकालीन सेवा बताते हुए कहा गया है कि पीआरवी का न्यूनतम रिस्पांस टाइम कानून एवं व्यवस्था बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। मुख्यालय ने यह भी माना है कि फील्ड स्टाफ को मानवीय और अनुकूल कार्य परिस्थितियां उपलब्ध कराने से उनकी ऊर्जा, एकाग्रता और प्रतिबद्धता बेहतर होगी।

कहां से आया 8 घंटे की ड्यूटी का सुझाव?
यूपी-112 मुख्यालय में 7 जुलाई से 10 जुलाई 2026 तक द्वितीय चरण का प्रशिक्षण आयोजित किया गया था। इसमें प्रदेश के कमिश्नरेट और जनपदों के यूपी-112 नोडल राजपत्रित अधिकारियों तथा सहायक नोडल अधिकारियों को प्रशिक्षण दिया गया। इसी प्रशिक्षण के दौरान अधिकारियों से मिले फीडबैक में यह महत्वपूर्ण सुझाव सामने आया कि चार पहिया पीआरवी कर्मियों की 12 घंटे की ड्यूटी के स्थान पर 8 घंटे की तीन शिफ्ट की व्यवस्था लागू की जाए। इस सुझाव के मद्ेनजर डीजी यूपी 112 विनोद कुमार सिंह ने सभी जनपद के पुलिस अधिकारियों को पत्र भेजकर इस इसकी व्यावहारिकता पर निर्णय लेने को कहा है।
यूपी-112 में है चालकों की भारी कमी
डायल-112 की स्थापना के समय पीआरवी के लिए चालकों की व्यवस्था में पीएसी से चालक लिए गए थे। इन चालकों ने कई वर्षों तक यूपी-112 में सेवाएं दीं। बताया जाता है कि कुछ वर्षों तक सेवा देने के बाद भी समय से उनका कैडर परिवर्तन नहीं हो सका। मामला न्यायालय तक पहुंचा और बाद में बड़ी संख्या में चालक पीएसी वापस चले गए। इसके बाद यूपी-112 में चालकों की कमी पैदा हुई। इस कमी को पूरा करने के लिए होमगार्ड विभाग से चालकों की तैनाती की गई। अब यदि चार पहिया पीआरवी को 12 घंटे की दो शिफ्ट से निकालकर 8 घंटे की तीन शिफ्ट में चलाया जाता है तो ’’चालकों की उपलब्धता एक बार फिर बड़ा मुद्दा बन सकती है। क्योंकि पीआरवी चौबीस घंटे चलती है। एक शिफ्ट खत्म होने के बाद दूसरी और फिर तीसरी शिफ्ट में वाहन को सड़क पर रखने के लिए चालक और पुलिसकर्मियों की उपलब्धता सुनिश्चित करनी होगी।
डायल-112 का ‘हाइब्रिड’ मॉडल: गाड़ी यूपी-112 की, चालक और फोर्स जिलों की
डायल-112 की फील्ड व्यवस्था मुख्यालय और जिला पुलिस के बीच साझा जिम्मेदारी पर चलती है। पीआरवी के लिए वाहन उपलब्ध कराने, उनकी मेंटिनेंस और ईंधन की व्यवस्था के साथ ही, वाहन और तकनीकी संसाधन डायल-112 मुख्यालय के नियंत्रण में रहते हैं। जबकि इन वाहनों को सड़क पर संचालित करने के लिए जिला स्तर और पुलिस लाइंस से सिविल पुलिस, महिला पुलिसकर्मियों तथा चालकों को जरूरत के अनुसार प्रतिनियुक्ति अथवा रोटेशन के आधार पर किया जाता है।
31,200 से अधिक पुलिसकर्मी संभाल रहे मोर्चा
वर्तमान में यूपी-112 के तहत संचालित चार पहिया और दो पहिया पीआरवी पर करीब 31,200 से अधिक पुलिसकर्मी 24 घंटे फील्ड में तैनात रहते हैं। इनका मुख्य काम आपात सूचना मिलने पर तत्काल मौके पर पहुंचना और जरूरतमंद नागरिकों को पुलिस सहायता उपलब्ध कराना है।
तीन शिफ्ट हुई तो बढ़ेगा दबाव
अब चार पहिया पीआरवी कर्मियों की 12 घंटे की दो शिफ्ट के स्थान पर 8 घंटे की तीन शिफ्ट की व्यवस्था पर विचार हो रहा है। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल अतिरिक्त मानव संसाधन का है। तीन शिफ्ट में पीआरवी को चौबीस घंटे सक्रिय रखने के लिए पर्याप्त पुलिसकर्मी और चालक उपलब्ध कराने होंगे।
यही वजह है कि डीजी यूपी-112 विनोद कुमार सिंह ने अपने पत्र में अंतिम निर्णय कमिश्नरेट और जनपद स्तर पर उपलब्ध मैनपावर, ऑपरेशनल आवश्यकता और पुलिसकर्मियों के कल्याण को ध्यान में रखकर लेने को कहा है।
अंतिम क्रियान्वयन का फैसला जिलों को है करना
डीजी यूपी-112 विनोद कुमार सिंह के पत्र का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा यह है कि उन्होंने कहा है कि वर्तमान में कमिश्नरेट और जनपदों में पर्याप्त पुलिस मैनपावर उपलब्ध है और उपलब्धता के आधार पर चार पहिया पीआरवी कर्मियों को 8-8 घंटे की तीन शिफ्ट में विभाजित करना व्यावहारिक, तर्कसंगत और अत्यंत लाभप्रद प्रतीत होता है। लेकिनं अपने पत्र में उन्होंने कमिश्नरेट/जनपद स्तर पर कर्मियों की उपलब्धता, ऑपरेशनल आवश्यकता और पुलिसकर्मियों के कल्याण’’ को ध्यान में रखकर उपयुक्त निर्णय जिलों को लेने की बात कही गई है। इसका मतलब साफ है कि मुख्यालय ने संभावना जताई है, लेकिन अंतिम क्रियान्वयन का फैसला जिलों को करना है।
रिस्पांस टाइम प्रभावित न हो, यही सबसे बड़ी कसौटी
यूपी-112 की सफलता का सबसे महत्वपूर्ण पैमाना उसका रिस्पांस टाइम है। किसी भी आपात सूचना के बाद पीआरवी कितनी जल्दी घटनास्थल पर पहुंचती है, इसी से सेवा की प्रभावशीलता तय होती है। 8 घंटे की शिफ्ट का फायदा यह हो सकता है कि लंबे समय तक लगातार ड्यूटी करने वाले पुलिसकर्मियों को राहत मिलेगी और वे अधिक ऊर्जा तथा एकाग्रता के साथ काम कर सकेंगे। लेकिन यदि तीन शिफ्ट के लिए पर्याप्त चालक और पुलिसकर्मी उपलब्ध नहीं हुए तो यही व्यवस्था चुनौती बन सकती है।
लेखक के बारे में
Santosh Kumar Singh
श्री सिंह ‘विजुअल लाइव’ मासिक पत्रिका एवं न्यूज पोर्टल के संपादक के रूप में पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। वर्ष 2004 से उन्होंने प्रिंट और डिजिटल मीडिया में अपनी सेवाएं देते हुए पत्रकारिता का लंबा अनुभव अर्जित किया है। लखनऊ से प्रकाशित हिन्दी दैनिक राष्ट्रीय सहारा, डेली न्यूज एक्टिविस्ट, राष्ट्रीय स्वरूप और भारत प्रतिदिन सहित विभिन्न मीडिया संस्थानों के लिए उन्होंने रिपोर्टिंग की है। प्रधानमंत्री और राष्ट्रपति के लखनऊ आगमन से लेकर राजनीति, प्रशासन, जनसरोकार और शहर की महत्वपूर्ण घटनाओं की रिपोर्टिंग में उनकी सक्रिय भूमिका रही है। श्री सिंह की विशेष रुचि खोजी पत्रकारिता और डिजिटल माध्यमों के प्रभावी इस्तेमाल में है। इंटरनेट आधारित शोध, सूचना के स्रोतों की पड़ताल और खबर की बारीकियों तक पहुंचने की उनकी कार्यशैली उन्हें अलग पहचान देती है। बदलते मीडिया परिदृश्य में वे तथ्यपरक, विश्वसनीय और जनसरोकार से जुड़ी पत्रकारिता को प्राथमिकता देते हैं। पत्रकारिता के साथ उन्हें संगीत और यात्रा में विशेष रुचि है। उनका मानना है कि एक पत्रकार के लिए जिज्ञासा, निरंतर सीखने की प्रवृत्ति और तथ्यों के प्रति ईमानदारी सबसे महत्वपूर्ण गुण हैं। Santosh Kumar Singh की सभी खबरें देखें →
संबंधित लेख

यूपी सरकार देगी दिव्यांगजनों की प्रतिभा को सम्मान

डॉ. दिनेश शर्मा देंगे BJP और राज्यसभा से इस्तीफा, मंगलवार को दिल्ली में शीर्ष नेतृत्व से होगी मुलाकात

राम मंदिर CEO नियुक्ति पर उठाए गए वैधानिक प्रश्न

आरटीओ-एआरटीओ कार्यालयों पर अब सीधी नजर, 75 अधिकारी करेंगे औचक जांच
टॉप रीड्स

भैंस ‘बसंती’ का चौथा जन्मदिन, केक काटकर किया सेलिब्रेशन

लखनऊ ने वायु गुणवत्ता सुधार में रचा इतिहास

अखिलेश पर संगीत सोम का बड़ा हमला, मुजफ्फरनगर दंगे से PDA और एनकाउंटर तक गिनाए आरोप; बोले- ‘यूपी में नहीं चलेगा मुगल राज’

पत्रकारिता लोकतंत्र के तीनों स्तंभों की मार्गदर्शक : ओंकार सिंह

2027 में प्रचंड बहुमत से भाजपा सरकार बनाने का लक्ष्य: केशव मौर्य

दिनेश शर्मा के आभार संदेश में राजनाथ सिंह का जिक्र नहीं, सियासी गलियारों में उठे सवाल

बाढ़ की मार के बीच CM योगी का भरोसा—“आप अकेले नहीं, हर कदम पर आपके साथ है डबल इंजन सरकार




Leave a Comment
Don't worry! Your email address will not be published. Required fields are marked (*).