
जब सीक्रेट मिशन के लिए चौकीदार बनकर धूमते रहे आपर आयुक्त
रवींद्र प्रकाश
लखनऊ। ये उन दिनो की बात है जब टैक्स चोरी के बडे से बडे मामलो का खुलासा करने के लिए राज्य कर विभाग के बडे बडे अधिकारी खुफिया जांचो के लिए खुद भेष बदलकर घूमते रहते थे। मुखबिरो का नेटवर्क ऐसा की बडे से बडे मामलो का खुलासा चुटकी मे हो जाता था। वर्तमान के जीएसटी आयुक्त डा नितिन बंसल ऐसी ही खुफिया जांचो की अपेक्षा अपने अधिकारियों से कर रहे है।
यह बात है प्रदेश के सबसे बडे टैक्स चोरी के पान मसाला के कारोबार के खुलासे का जिसको तत्कालीन अपर आयुक्त ग्रेड 2 डा. बुद्धेशमणि पांडे ने अंजाम दिया और एक करोड़ के टैक्स चोरी के पान मसाले पर 40 लाख से अधिक की धनराशि जमा करवायी। फर्जी पान मसाले की फैक्ट्री पर छापे की इस.कार्रवाई के मुख्य सूत्रधार डा. पान्डेय थे, इसलिए उन्होंने इस.आपरेशन को नाम दिया था आपरेशन दतिया कयोकि इसके तार पुराने लखनऊ के दतिया मोहल्ले से जुडे हूए थे, यह आपरेशन इसलिए भी खुर्खियों मे रहा कयोकि आपरेशन के बाद तत्तकालीन सपा सरकार के कई मंत्रियों व नौकरशाहों का भारी दबाव था। तत्कालीन कमिशनर मुकेश मेश्राम तक के दिसम्बर माह मे पसीने छूट रहे थे।
वर्ष 2014 र्दिसम्बर माह मे कडाके की ठंड पड रही शाम 7 बजे के करीब संयुक्त आयुक्त प्रदीप कुमार यादव अपर आयुक्त के कमरे के सामने पहुंचे ही थे कि चपरासी ने रोक लिया बोला साहब ने रोका है। प्रदीप यादव ने कडक आवाज मे पूछा अंदर कोई है कया चपरासी बोला की स्पाइ साहब किसी बाहरी व्यक्ति से बात कर रहे हैं। डा. पान्डेय को उनकी खुफिया जांचो के लिए मिस्टर स्पाइ नाम से भी जाना जाता था, प्रदीप यादव को समझने मे देर नही लगी कि लखनऊ मे कोई बडी जांच होने जा रही है। अगले दिन सुबह एसआईबी के संयुक्त आयुक्त प्रदीप यादव, उपायुक्त डा. शिव आसरे सिंह , विनोद यादव व सहायक आयुक्त राजेश राय को मीटिंग के लिए बुलाया गया, और इन सभी को भारी पुलिस बल के साथ नादरगंज औधोगिक ऐरिया के लिए रवाना किया गया टीमो के पहुंच जाने के बाद उनको एक गोदाम का पता बताया गया जिसमे भारी मात्रा मे पान मसाला के पैकिंग रैपर.भरे थे। छापे के बाद बिना प्रपत्रो के रखा सारा माल कार्यालय लाया गया, जहां विधिक प्रक्रिया पूरी की गयी । सब सोच रहे थे कि जांच पूरी हो गयी, लेकिन ये जांच तो आदमखोर को पकडने के लिए बकरी के बच्चे को पिजरे मे रखने जैसी थी, दरासल मिस्टर स्पाइ की नजर तो उस फैक्ट्री पर थी, जहां अघोषित पान मसाला बन रहा था। डा, बुद्धेशमणि पांडे को यह जानकारी मिल गई थी कि लाटूश रोड के पीछे मोहल्ले के एक घर से रात में भारी मात्रा में पान मसाला के पैकिंग रैपर पान दरीबा क्षेत्र के जेपी चौरसिया के मकान में जाते हैं। इस खुफिया जानकारी को जुटाने के लिए ही डॉ बुद्धेशमणि पांडे कई दिन तक चौकीदार का भेष बनाकर रात के समय क्षेत्र में घूमते रहे क्योंकि यह सारा कारोबार रात के समय ही होता था। पान दरीबा क्षेत्र के जी जेपी चौरसिया के मकान में फैक्ट्री चल रही थी, इसकी जानकारी पुख्ता ऐसे हुई कि इस घर मे बिजली का कनेक्शन 5 किलो वाट का था यहां न तो मकान में कोई ऐसी था और न ही मकान बहुत बड़ा था तो इतना भारी भरकम लोड क्यों लिया गया है या देखते ही अपरायुक्त समझ गए थे कि इस मकान में पान मसाले का उत्पादन होता है। करीब 1 महीने की खुफिया जानकारी जुटाने के बाद बुद्धेशमणि पांडे ने उपयुक्त डॉ शिव असारे सिंह व विनोद यादव के नेतृत्व में एक टीम का गठन किया गया जांच की गोपनीयता ऐसी की इन दोनों अधिकारियों को भी आपस में बात करने के लिए अपर आयुक्त द्वारा दिए गए कोर्ट शब्द को डिकोड करना होता था । सारी खुफिया जाच पूरी होने के बाद 31 दिसबंर 2014 को भारी पुलिस व पीएसी के साथ टीमो को रवाना किया गया टीम ने पान दरीबा, पुराना आरटीओ चौराहे के पान एक होटल व पानदरीबा मे जेपी चौरसिया के मकान मे भारी मात्रा मे अघोषित रुप से बना पान मसाला पकड लिया । फैक्ट्री मे काम करने वाले एक व्यक्ति निर्मल शर्मा को फैक्ट्री के मालिक के रूप मे पेश किया गया, लेकिन जहीन दिमाग अपर आयुक्त पहले ही जान चुके थे कि इस मामले मे किसी गरीब निर्देश को फसाया जाएगा। इसलिए डॉ बुद्धेशमणि पांडे ने पहले ही मूल रूप से सीतापुर के निवासी निर्मल शर्मा के मजदूर होने के सबूत जुटा लिए थे इस तरीके से टैक्स चोरी के सबसे बड़े भंडाफोड़ के मामले में निर्मल शर्मा नाम के इस निर्दोष व्यक्ति को जेल जाने से बच गया। आज निर्मल शर्मा अपने दो अधिवक्ता बटो से साथ खुशहाल जीवन जी रहा है।





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