
उत्तर प्रदेश में आर्द्रभूमियों के संरक्षण की दिशा में महत्वपूर्ण पहल
लखनऊ। जैव विविधता, जल संसाधनों के संरक्षण तथा पारिस्थितिक संतुलन को बनाए रखने के उद्देश्य से उत्तर प्रदेश में आर्द्रभूमियों के संरक्षण के लिए महत्वपूर्ण कदम उठाए जा रहे हैं। इसी क्रम में राज्य आर्द्रभूमि प्राधिकरण द्वारा प्रदेश की महत्वपूर्ण आर्द्रभूमियों को अंतरराष्ट्रीय मान्यता दिलाने की दिशा में प्रयास तेज कर दिए गए हैं। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आर्द्रभूमियों की पहचान और संरक्षण के लिए स्थापित Ramsar Convention के अंतर्गत विभिन्न देशों द्वारा महत्वपूर्ण आर्द्रभूमियों को रामसर साइट के रूप में नामित किया जाता है। इसी पहल के तहत राज्य आर्द्रभूमि प्राधिकरण ने शासन से प्राप्त अनुमोदन के आधार पर प्रदेश की महत्वपूर्ण आर्द्रभूमियों के लिए Ramsar Information Sheet (RIS) तैयार कर उन्हें अंतरराष्ट्रीय महत्व की आर्द्रभूमि के रूप में नामित कराने की प्रक्रिया प्रारंभ कर दी है।
प्रदेश में वर्तमान समय तक 11 प्रमुख आर्द्रभूमियों को चिन्हित किया गया है। इनमें जनपद उन्नाव के नवाबगंज पक्षी विहार, जनपद इटावा की सरसई नावर झील, जनपद रायबरेली स्थित समसपुर पक्षी विहार, जनपद हरदोई का सांडी पक्षी विहार, जनपद मैनपुरी का समन पक्षी विहार, जनपद गोंडा का पार्वती अरगा पक्षी विहार, जनपद आगरा का सूर सरोवर पक्षी विहार, जनपद मुजफ्फरनगर की हैदरपुर आर्द्रभूमि, जनपद संत कबीर नगर का बखिरा पक्षी विहार तथा जनपद इटावा का चंबल पक्षी विहार शामिल हैं। इन सभी आर्द्रभूमियों का कुल क्षेत्रफल लगभग 39,873.96 हेक्टेयर है, जबकि प्रदेश की कुल आर्द्रभूमि का क्षेत्रफल लगभग 12,42,530 हेक्टेयर है। यह प्रदेश के कुल भौगोलिक क्षेत्रफल का लगभग 3.20 प्रतिशत हिस्सा है। इसके अतिरिक्त राज्य आर्द्रभूमि प्राधिकरण द्वारा शासन से अनुमति प्राप्त होने के बाद जनपद बलिया स्थित सुरहाताल पक्षी विहार तथा जनपद अलीगढ़ की शेखा झील पक्षी विहार को भी अंतरराष्ट्रीय महत्व की आर्द्रभूमि के रूप में नामित किए जाने हेतु प्रस्ताव भारत सरकार को भेजा गया है। इन दोनों आर्द्रभूमियों का संयुक्त क्षेत्रफल लगभग 3480.53 हेक्टेयर बताया गया है। गौरतलब है कि रामसर अभिसमय की स्थापना वर्ष 1971 में ईरान के रामसर शहर में हुई थी, जिसका उद्देश्य विश्व स्तर पर महत्वपूर्ण आर्द्रभूमियों की पहचान कर उनके संरक्षण और सतत प्रबंधन को बढ़ावा देना है। अपर प्रधान मुख्य वन संरक्षक नीरज कुमार ने बताया कि प्रदेश में आर्द्रभूमियों के संरक्षण की यह पहल न केवल जैव विविधता और प्रवासी पक्षियों के संरक्षण को मजबूती देगी, बल्कि जल सुरक्षा, पारिस्थितिक संतुलन तथा स्थानीय समुदायों की आजीविका को भी सुदृढ़ करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।





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