
PWD में बिना कार्य एडवांस भुगतान का दबाव, डिप्लोमा इंजीनियर्स संघ ने सीएम से की शिकायत
बजट सरेंडर न स्वीकारने और जल्दबाजी में खर्च कराने के आरोप
जूनियर इंजीनियर व सहायक अभियंता परेशान
लखनऊ। लोक निर्माण विभाग (PWD) में वित्तीय वर्ष के अंतिम चरण में बिना कार्य संपादन के ही एडवांस भुगतान कराने के लिए अधिकारियों द्वारा दबाव बनाए जाने का मामला सामने आया है। इस संबंध में डिप्लोमा इंजीनियर्स संघ, उत्तर प्रदेश ने मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर शिकायत दर्ज कराई है और दोषी अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।
संघ का आरोप है कि विभागीय अधिकारी बजट समाप्त होने से पहले उसे हर हाल में खर्च करने के उद्देश्य से नियमों की अनदेखी कर रहे हैं। मुख्यालय स्तर पर बजट सरेंडर स्वीकार नहीं किया जा रहा है, जबकि नियमों के अनुसार अप्रयुक्त धनराशि को वापस किया जाना चाहिए। इसके विपरीत किसी भी प्रकार से बजट खर्च कराने का दबाव अधीनस्थ अभियंताओं पर बनाया जा रहा है, जिससे वे मानसिक रूप से परेशान हैं।
संघ के अध्यक्ष इं. एन.डी. द्विवेदी ने बताया कि इस विषय में 7 मार्च 2026 को ही विभागाध्यक्ष को पत्र लिखकर सभी परिस्थितियों से अवगत करा दिया गया था। उन्होंने कहा कि विभाग में वित्तीय स्वीकृतियां अक्सर देरी से जारी होती हैं और टेंडर प्रक्रिया व अनुबंध गठन में भी विलंब किया जाता है। इसके बाद वित्तीय वर्ष के अंत में अचानक बजट खर्च करने का मौखिक दबाव बनाया जाता है, जो नियमों के विरुद्ध है।
संघ ने यह भी बताया कि प्रदेश के अधिकांश खंडों में जूनियर इंजीनियरों और सहायक अभियंताओं की ड्यूटी बोर्ड परीक्षाओं, जनगणना और एसआईआर जैसे गैर-तकनीकी कार्यों में लगाई गई है। इसके चलते वे अपने तकनीकी कार्यों का निर्वहन नहीं कर पा रहे हैं। हालांकि इस संबंध में प्रमुख सचिव द्वारा जिलाधिकारियों को पत्र भी भेजा गया था, लेकिन अधिकांश स्थानों पर अभियंताओं की ड्यूटी नहीं हटाई गई।
संघ के अनुसार, वर्तमान परिस्थितियों में बिना कार्य कराए या बिना गुणवत्ता परीक्षण के भुगतान कराना न केवल नियमों का उल्लंघन है, बल्कि सरकारी धन के दुरुपयोग और निर्माण कार्यों की गुणवत्ता से भी समझौता है। अभियंताओं का कहना है कि बिटुमिनस और सीसी कार्यों में साइट और प्लांट पर उनकी उपस्थिति अनिवार्य होती है, लेकिन अन्य ड्यूटी के चलते यह संभव नहीं हो पा रहा है।
संघ ने प्रमुख सचिव और विभागाध्यक्ष से मुलाकात कर इस मुद्दे पर विस्तार से चर्चा भी की है, लेकिन इसके बावजूद दबाव की स्थिति बनी हुई है। ऐसे में संघ ने मुख्यमंत्री से हस्तक्षेप कर दोषी अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने की मांग की है, ताकि विभागीय कार्यों में पारदर्शिता और गुणवत्ता सुनिश्चित की जा सके।





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