
डीएफओ सितांशु पाण्डेय के निर्देशन में मानव-वन्यजीव सह-अस्तित्व पर प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित
लखनऊ। अवध वन प्रभाग, लखनऊ के कुकरैल रेंज स्थित “मैलानी ऑडिटोरियम” में मानव-वन्यजीव सह-अस्तित्व विषय पर एक दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का संचालन डीएफओ लखनऊ सितांशु पाण्डेय के निर्देशन में किया गया। प्रशिक्षण का उद्देश्य मानव एवं वन्यजीवों के बीच संतुलित सह-अस्तित्व की भावना को बढ़ावा देना, वन्यजीव संरक्षण के प्रति जागरूकता विकसित करना तथा वन कर्मियों में संवेदनशीलता बढ़ाना रहा।
डीएफओ सितांशु पाण्डेय ने कहा कि तेजी से बढ़ते शहरीकरण और वन क्षेत्रों में मानवीय हस्तक्षेप के कारण मानव-वन्यजीव संघर्ष की घटनाएं बढ़ रही हैं। ऐसे में वन विभाग की जिम्मेदारी और अधिक महत्वपूर्ण हो जाती है। उन्होंने कहा कि वन्यजीव संरक्षण केवल विभागीय जिम्मेदारी नहीं, बल्कि सामाजिक सहभागिता का विषय भी है। पर्यावरण संरक्षण और जैव विविधता संतुलन बनाए रखने के लिए सभी को मिलकर कार्य करना होगा।
कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में निदेशक नवाब वाजिद अली शाह प्राणी उद्यान, लखनऊ संजय बिस्वाल उपस्थित रहे। उन्होंने वन्यजीव संरक्षण के लिए जनसहभागिता को आवश्यक बताते हुए कहा कि प्रशिक्षित फील्ड स्टाफ मानव-वन्यजीव संघर्ष की घटनाओं को नियंत्रित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।
प्रशिक्षण कार्यक्रम में डब्ल्यूडब्ल्यूएफ इंडिया के विशेषज्ञ हसन हैदर, रोहित, डॉ. दीपक वर्मा तथा देवव्रत सिंह ने वन अधिकारियों एवं कर्मचारियों को वन्यजीव संरक्षण, मानव-वन्यजीव संघर्ष की रोकथाम, रेस्क्यू प्रबंधन तथा पर्यावरण संरक्षण से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारियां दीं। विशेषज्ञों ने वन्यजीवों के व्यवहार, सुरक्षित रेस्क्यू तकनीकों, आपदा की स्थिति में त्वरित कार्रवाई तथा आधुनिक उपकरणों के प्रभावी उपयोग पर विस्तार से चर्चा की।
कार्यक्रम के दौरान प्रतिभागियों को वन्यजीव रेस्क्यू से जुड़े विभिन्न उपकरणों और तकनीकों का व्यवहारिक प्रदर्शन भी कराया गया। फील्ड कर्मचारियों को आपात परिस्थितियों में सुरक्षित एवं प्रभावी कार्रवाई करने के तरीके बताए गए। कार्यक्रम में उपस्थित अधिकारियों एवं कर्मचारियों ने वन्यजीवों के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण अपनाने तथा पर्यावरण संरक्षण के लिए सामूहिक प्रयास करने का संकल्प लिया।
अवध वन प्रभाग के अधिकारियों ने बताया कि भविष्य में भी इस प्रकार के प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे, ताकि वन्यजीव संरक्षण को और अधिक प्रभावी बनाया जा सके तथा मानव-वन्यजीव संघर्ष की घटनाओं को कम किया जा सके।





Leave A Comment
Don’t worry ! Your email address will not be published. Required fields are marked (*).