
जीएसटी अधिकारियों के अधिवेशन पर रोक से हडकम्प
14 व.15 मई को लखनऊ मे अधिवेशन की अनुमति अचानक निरस्त
लखनऊ। एक तरफ प्रदेश के मुख्यमंत्री व पूरी भाजपा सरकर सरकारी अधिकारियों, कर्मचारियों व आमजन मानस के साथ संवाद के रास्ते से समाधान तक पहुचने की कोशिश कर रही है, वही मुख्यमंत्री के नियंत्रण मे आने वाले राज्य कर विभाग मे तो लोकतांत्रिक व्यवस्था पूरी तरह से चौपट होना विभाग के संघ मान रहे है। संघो की समस्याओं के समाधान के लिए कोई मासिक बैठक नौकरशाह नही कर रहे है। इसमे सबसे बुरी दशा सीधी भर्ती के अधिकारियों के संघ की है। यह संघ पिछले वर्ष अधिवेशन करवाना चाहता था, लेकिन अनुमति ही नही मिली, इस साल जीएसटी आफीसर्स एसोसिएशन की वार्षिक आम सभा 14 व 15 मई को लखनऊ के इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान मे करवाने के लिए 20 अप्रैल को जारी पत्र मे अवकाश स्वीकृति व स्टेशन छोडने की अनुमति के साथ प्रदान की गयी , अधिवेशन को देखते हुए संघ ने इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान मे हाल बुक करवा लिया और लखनऊ के बाहर से आने वाले सदस्यों ने रहने के लिए होटल मे कमरे भी बुक करवा लिए, लेकिन इसी बीच 8 मई को राज्य जीएसटी मुख्यालय के संयुक्त आयुक्त स्थापना रवि शेखर सिंह की ओर से पत्र जारी हुआ की अपरिहार कारणो से अनुमति निरस्त की जा रही है, इससे सदस्यों मे हडकंप मचने के साथ ही भारी आक्रोश भी है।
विभागीय सूत्रो के अनुसार इस अधिवेशन मे वित्त मंत्री सुरेश खन्ना को बतौर मुख्य अतिथि आमंत्रित किया गया है। विभागीय सूत्रो के अनुसार अधिवेशन मे मीडिया की मौजूदगी मे संघ की ओर से वित्त मंत्री को ज्ञापन सौपा जाना था। जिसमे संगठन की ओर से समय पर पदोन्नति न मिलने, गंभीर रुप से बीमार अधिकारियों के तबादलो व सरकार की दाम्पति नीति की तबादलो मे अनदेखी किए जाने का मामला प्रमुखता से उठता जो की मीडिया की हेड लाइन बनता और जिम्मेदारियों की पोल खुलती इसलिए अधिवेशन की अनुमति पर ही रोक लगा दी गयी। वही सूत्रो का यह भी कहना है कि कई सदस्यों ने जोन के एडीशनल कमिशनर के पद पर.आईएएस अधिकारी की तैनाती का भी विरोध किया है जिसमे गाजियाबाद जोन प्रमुख है इस बात को भी दबाने के लिए सीधी भर्ती के अधिकारियों के संघ को स्प्रींग की तरह दबाया जा रहा है नौकरशाह इसलिए ऐसा कर पा रहे हैं कयोंकि कयोंकि इस संघ के पास मुखर वकता की कमी है ये बात तब सीध हो गयी जब सीधी भर्ती के बडी संख्या मे सदस्यों को निलंबित किया गया। ये बात अलग है कि कोर्ट ने दो तीन सुनवाई मे ही आरोप पत्रो के गुब्बारे की हवा निकाल थी, लेकिन एक बात तो तय है कि संघो को स्प्रिंग की तरह दबाने का मामला अगर मुख्यमंत्री के संज्ञान मे आया तो एक दो साहब लोगो का वनगमन तय है फिर वहां जाकर अपनी बहादुरी के किस्से पेडो व जंगली जानवरो को सुनाएंगे।





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