सत्यनिकेतन हादसा : दो मंजिल की परमिशन पर खड़ी थी पांच मंजिला इमारत

नई दिल्ली। दिल्ली के सत्यनिकेतन में नियमों की अनदेखी और कथित अवैध निर्माण से जुड़ा मामला अब कानूनी कार्रवाई तक पहुंच गया है। हादसे के बाद आरोपी बिल्डिंग मालिक हरिराम और अन्य के खिलाफ साउथ कैंपस थाने में मुकदमा दर्ज कर लिया है, और उसकी गिरफ्तारी के प्रयास किए जा रहे हैं। पुलिस आरोपी की तलाश में संभावित ठिकानों पर दबिश दे रही है।
बताया जा रहा है कि जिस इमारत में यह हादसा हुआ, उसके निर्माण के लिए दो मंजिल तक की अनुमति थी, लेकिन मौके पर कथित तौर पर पांच मंजिला इमारत खड़ी कर दी गई। निर्माण नियमों की इस अनदेखी ने एक बार फिर दिल्ली में अवैध निर्माण और भवनों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
सालभर पहले खाली कराई गई थी बिल्डिंग
मामले का एक और चौंकाने वाला पहलू यह है कि संबंधित इमारत को करीब एक साल पहले खाली कराया गया था। इसके बावजूद बाद में यहां दोबारा पीजी हॉस्टल का संचालन शुरू हो गया। सवाल उठ रहा है कि यदि भवन को पहले खाली कराया गया था तो दोबारा उसमें लोगों के रहने की अनुमति कैसे मिली और भवन की सुरक्षा की जांच किस स्तर पर हुई।
स्थानीय स्तर पर एमसीडी और पुलिस की भूमिका को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। जांच में यह पता लगाने की जरूरत है कि भवन के दोबारा इस्तेमाल और पीजी संचालन की जानकारी संबंधित विभागों को थी या नहीं।
बेसमेंट का निर्माण भी कराया जा रहा था
हादसे से पहले बिल्डिंग स्वामी द्वारा बेसमेंट का निर्माण कराया जा रहा था। ऐसे में जांच एजेंसियों के सामने यह भी महत्वपूर्ण सवाल है कि क्या बेसमेंट के निर्माण के लिए आवश्यक अनुमति ली गई थी और निर्माण के दौरान भवन की संरचनात्मक सुरक्षा का ध्यान रखा गया था।
विशेषज्ञों के मुताबिक किसी मौजूदा इमारत के नीचे बेसमेंट की खुदाई या निर्माण के दौरान आसपास की संरचना पर अतिरिक्त दबाव पड़ सकता है। ऐसे निर्माण में तकनीकी मानकों और सुरक्षा नियमों का पालन बेहद जरूरी होता है।
दो मंजिल की अनुमति, पांच मंजिल का निर्माण
मामले की जांच में अब यह भी देखा जा रहा है कि दो मंजिला निर्माण की अनुमति वाली इमारत पांच मंजिल तक कैसे पहुंच गई। इतने बड़े स्तर पर कथित अतिरिक्त निर्माण के बावजूद संबंधित विभागों की निगरानी व्यवस्था पर भी सवाल उठना स्वाभाविक है।
जांच एजेंसियां यह पता लगाने का प्रयास कर रही हैं कि इमारत का निर्माण कब-कब हुआ, अतिरिक्त मंजिलों का निर्माण किसकी अनुमति से कराया गया और पीजी के रूप में इसका इस्तेमाल किन परिस्थितियों में दोबारा शुरू हुआ।
मालिक की गिरफ्तारी के प्रयास
पुलिस ने बिल्डिंग स्वामी के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया है। इसके बाद उसकी गिरफ्तारी के प्रयास तेज कर दिए गए हैं। पुलिस आरोपी की तलाश में संभावित ठिकानों पर दबिश दे रही है। जांच के दौरान भवन के निर्माण से जुड़े दस्तावेज, अनुमति और अन्य रिकॉर्ड भी खंगाले जा सकते हैं।
हादसे ने दिल्ली में अवैध निर्माण, भवनों की सुरक्षा और सरकारी विभागों की निगरानी व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। अब जांच का मुख्य फोकस केवल बिल्डिंग स्वामी की जिम्मेदारी तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि यह भी देखा जाएगा कि नियमों के विपरीत निर्माण और भवन के दोबारा इस्तेमाल को रोकने में संबंधित विभागों की ओर से क्या कार्रवाई की गई थी।
हादसे के बाद उठे कई बड़े सवाल
सत्यनिकेतन की घटना ने कई अहम सवाल सामने ला दिए हैं—यदि भवन को एक साल पहले खाली कराया गया था तो उसमें दोबारा पीजी कैसे शुरू हुआ? दो मंजिल की अनुमति के बावजूद पांच मंजिल का निर्माण कैसे हुआ? बेसमेंट निर्माण की अनुमति थी या नहीं? और सबसे अहम, क्या समय रहते प्रशासनिक स्तर पर प्रभावी कार्रवाई होती तो हादसे को टाला जा सकता था?
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