आर्थिक तंगी के आगे नहीं झुकेगी अंशिका की पढ़ाई, ऑस्ट्रेलिया में बैठे विशाल अग्रहरि ने उठाया पूरी शिक्षा का जिम्मा

गाजीपुर। प्रतिभा को आगे बढ़ने के लिए सिर्फ अवसर की जरूरत होती है, लेकिन कई बार आर्थिक हालात बच्चों के सपनों के रास्ते में दीवार बनकर खड़े हो जाते हैं। उत्तर प्रदेश के गाजीपुर की एक छोटी सी छात्रा अंशिका गुप्ता के साथ भी कुछ ऐसी ही स्थिति थी। परिवार की आर्थिक परेशानी के बीच उसकी पढ़ाई जारी रखना चुनौती बन रहा था। इसी बीच सात समंदर पार ऑस्ट्रेलिया से मदद का हाथ आगे आया है। वहां कार्यरत विशाल अग्रहरि ने अंशिका की पूरी शिक्षा का खर्च उठाने की जिम्मेदारी ली है।
अंशिका गाजीपुर के देवढ़ी गांव स्थित एसएस पब्लिक स्कूल में कक्षा एक की छात्रा है। उसकी प्रतिभा और परिवार की आर्थिक स्थिति की जानकारी मिलने के बाद ऑस्ट्रेलिया में कार्यरत विशाल अग्रहरि ने उसकी पढ़ाई में सहयोग करने का फैसला किया। इस पहल से अब अंशिका की शिक्षा को निरंतर जारी रखने में परिवार को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है।
स्कूल प्रबंधन की पहल से मिली मदद की राह
इस पूरे मामले में विद्यालय परिवार की भूमिका भी अहम रही। एसएस पब्लिक स्कूल के प्रबंधक राधेश्याम सिंह के अनुसार, विशाल अग्रहरि उनके छोटे पुत्र के मित्र हैं। दोनों ने साथ में बीटेक की पढ़ाई की है। अंशिका के परिवार की आर्थिक स्थिति के बारे में जानकारी मिलने पर विशाल ने उसकी शिक्षा का पूरा खर्च उठाने की इच्छा जताई।
विद्यालय के संस्थापक स्वर्गीय आशुतोष सिंह ने शिक्षा को बेहतर बनाने और जरूरतमंद बच्चों को गुणवत्तापूर्ण पढ़ाई का अवसर देने की सोच के साथ काम किया था। विद्यालय प्रबंधन इसी उद्देश्य को आगे बढ़ाने का प्रयास कर रहा है।

मानिकपुर के रहने वाले हैं विशाल अग्रहरि
विशाल अग्रहरि मूल रूप से चित्रकूट जिले के मानिकपुर के निवासी हैं और फिलहाल ऑस्ट्रेलिया में कार्यरत हैं। विदेश में रहते हुए भी अपने क्षेत्र और समाज से जुड़े रहकर एक जरूरतमंद बच्ची की शिक्षा की जिम्मेदारी लेना उनकी पहल को खास बनाता है।
आर्थिक मजबूरी नहीं बनेगी पढ़ाई में रुकावट
अंशिका की शिक्षा का खर्च उठाने के इस फैसले से उसके परिवार को बड़ी राहत मिली है। बचपन में ही किसी बच्चे की पढ़ाई आर्थिक कारणों से प्रभावित न हो, इसके लिए समाज के सक्षम लोगों की भागीदारी अहम है। विशाल अग्रहरि की यह पहल इस बात का उदाहरण है कि दूर देश में रहकर भी कोई व्यक्ति अपने छोटे से सहयोग से किसी बच्चे के भविष्य को संवारने में भूमिका निभा सकता है।
अंशिका के लिए यह मदद केवल पढ़ाई का खर्च उठाने तक सीमित नहीं, बल्कि आगे बढ़ने और अपने सपनों को पूरा करने का अवसर भी है। उम्मीद है कि वह शिक्षा के माध्यम से अपने परिवार और क्षेत्र का नाम रोशन करेगी।
लेखक के बारे में
शैलेन्द्र कुमार सिंह
पिछले करीब आठ वर्षों से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। फोटो जर्नलिस्ट के रूप में पत्रकारिता की शुरुआत करने वाले शैलेन्द्र ने स्टेट मीडिया, दैनिक भास्कर सहित विभिन्न मीडिया प्लेटफॉर्म और अपने डिजिटल पोर्टल ‘शब्द भेदी’ के माध्यम से पत्रकारिता को आगे बढ़ाया। जमीनी मुद्दों, स्थानीय खबरों और जनसरोकार से जुड़े विषयों को प्रमुखता से उठाना उनकी पत्रकारिता की खास पहचान है। अनुभव, संघर्ष और निरंतर सीखने के साथ उन्होंने पत्रकारिता के क्षेत्र में अपनी अलग पहचान बनाई है। शैलेन्द्र कुमार सिंह की सभी खबरें देखें →
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