स्कूल की छत पर 11 हजार वोल्ट का करंट बना काल, कक्षा 4 के छात्र अरशद की गई जान

बलिया। जिले के गड़वार थाना क्षेत्र के कनैला गांव स्थित प्राथमिक विद्यालय में एक दर्दनाक हादसे में कक्षा चार के 12 वर्षीय छात्र अरशद की जान चली गई। बताया जा रहा है कि छात्र विद्यालय की छत पर लौकी तोड़ने गया था, तभी ऊपर से गुजर रहे 11 हजार वोल्ट के हाईटेंशन बिजली तार की चपेट में आ गया। करंट लगने से उसकी मौके पर ही मौत हो गई। घटना के बाद विद्यालय परिसर और गांव में अफरा-तफरी मच गई।

शिक्षकों पर छात्र को छत पर भेजने का आरोप
मृतक छात्र के परिजनों का आरोप है कि विद्यालय के शिक्षकों ने अरशद को छत पर लौकी तोड़ने के लिए भेजा था। इसी दौरान वह छत के ऊपर से गुजर रही हाईटेंशन विद्युत लाइन की चपेट में आ गया। हालांकि, इस आरोप की आधिकारिक पुष्टि और घटना के सभी पहलुओं की जांच होना बाकी है।
हादसे की खबर मिलते ही परिवार में कोहराम मच गया। मासूम की मौत से आक्रोशित ग्रामीण भी बड़ी संख्या में विद्यालय पहुंच गए और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग करने लगे।
एक करोड़ मुआवजा और सरकारी नौकरी की मांग
घटना से नाराज ग्रामीणों ने जिलाधिकारी को मौके पर बुलाने की मांग की। इसके साथ ही पीड़ित परिवार को एक करोड़ रुपये का मुआवजा और परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी देने की मांग उठाई।
मामले की गंभीरता को देखते हुए एसडीएम सदर, सीओ सिटी, जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी (बीएसए), खंड शिक्षा अधिकारी और कई थानों की पुलिस मौके पर पहुंची। अधिकारियों ने ग्रामीणों को समझाया और उचित कार्रवाई का आश्वासन दिया। इसके बाद ग्रामीण शांत हुए।
40 साल पुरानी हाईटेंशन लाइन, छह साल पहले बना विद्यालय
इस हादसे ने विद्यालय भवन के निर्माण और बच्चों की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। ग्रामीणों के मुताबिक, विद्यालय के ऊपर से गुजर रही 11 हजार वोल्ट की हाईटेंशन लाइन करीब 40 साल पुरानी है, जबकि विद्यालय का भवन लगभग छह साल पहले बनाया गया था।
ऐसे में सवाल उठ रहा है कि हाईटेंशन लाइन के नीचे विद्यालय भवन निर्माण की अनुमति कैसे दी गई? क्या निर्माण से पहले विद्युत सुरक्षा मानकों का परीक्षण कराया गया था? क्या बिजली विभाग से अनापत्ति प्रमाणपत्र (NOC) लिया गया था? यदि विद्यालय के ऊपर से हाईटेंशन लाइन गुजर रही थी, तो बच्चों की सुरक्षा के लिए आवश्यक इंतजाम क्यों नहीं किए गए?
जांच और जवाबदेही की उठी मांग
अरशद की मौत ने सरकारी विद्यालयों में बच्चों की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ा दी है। अब ग्रामीणों और परिजनों की मांग है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए और यदि किसी स्तर पर लापरवाही सामने आती है तो जिम्मेदार अधिकारियों एवं कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई की जाए।
यह हादसा केवल एक परिवार की अपूरणीय क्षति नहीं है, बल्कि विद्यालयों में बुनियादी सुरक्षा व्यवस्था की जांच की भी जरूरत बताता है। प्रशासन के सामने अब सबसे बड़ी चुनौती घटना की वास्तविक परिस्थितियों का पता लगाना और भविष्य में ऐसी दुर्घटनाओं को रोकने के लिए ठोस कदम उठाना है।
लेखक के बारे में
शैलेन्द्र कुमार सिंह
पिछले करीब आठ वर्षों से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। फोटो जर्नलिस्ट के रूप में पत्रकारिता की शुरुआत करने वाले शैलेन्द्र ने स्टेट मीडिया, दैनिक भास्कर सहित विभिन्न मीडिया प्लेटफॉर्म और अपने डिजिटल पोर्टल ‘शब्द भेदी’ के माध्यम से पत्रकारिता को आगे बढ़ाया। जमीनी मुद्दों, स्थानीय खबरों और जनसरोकार से जुड़े विषयों को प्रमुखता से उठाना उनकी पत्रकारिता की खास पहचान है। अनुभव, संघर्ष और निरंतर सीखने के साथ उन्होंने पत्रकारिता के क्षेत्र में अपनी अलग पहचान बनाई है। शैलेन्द्र कुमार सिंह की सभी खबरें देखें →
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