यूपी चुनाव 2027 : यूपी में बीजेपी के 120 विधायकों के खिलाफ एंटी इनकंबेंसी, डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक की सीट पर भी खतरे के संकेत

25 हजार मतदाताओं के बीच 4 अगस्त से 10 सितंबर तक कराया गया सर्वे, पूर्वांचल और कानपुर-बुंदेलखंड में पार्टी की स्थिति चिंताजनक; ब्रज क्षेत्र में बेहतर प्रदर्शन के संकेत
भाजपा के मौजूदा विधायकों के कामकाज से लेकर युवाओं के रुझान तक परखी गई जनता की नब्ज; टिकट वितरण में बदल सकते हैं कई समीकरण
लखनऊ। उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले बीजेपी की सियासी चुनौतियों को लेकर एक सर्वे रिपोर्ट में चौंकाने वाले संकेत सामने आए हैं। पार्टी के स्तर पर कराए गए बताए जा रहे इस सर्वे में 258 विधानसभा सीटों पर मतदाताओं की राय ली गई। रिपोर्ट के मुताबिक, बीजेपी के करीब 120 मौजूदा विधायकों के खिलाफ हाई एंटी इनकंबेंसी यानी सत्ता विरोधी नाराजगी सामने आई है। सर्वे में सबसे ज्यादा चिंता की बात यह है कि नाराजगी का दायरा केवल कमजोर मानी जाने वाली सीटों तक सीमित नहीं है, बल्कि पार्टी की परंपरागत सीटों और पूर्वांचल के उन इलाकों तक भी पहुंच गया है, जिन्हें बीजेपी का मजबूत गढ़ माना जाता है।
बताया जा रहा है कि यह सर्वे 4 अगस्त से 10 सितंबर के बीच कराया गया। इसमें करीब 25 हजार मतदाताओं को शामिल किया गया और उनसे 20 से अधिक सवाल पूछे गए। इनमें पांच सवाल सीधे तौर पर मौजूदा विधायकों के कामकाज, व्यवहार, क्षेत्र में उपलब्धता और जनता के साथ उनके जुड़ाव से संबंधित थे। सर्वे के नतीजे बीजेपी के लिए उम्मीदवारों के चयन से लेकर चुनावी रणनीति तक कई स्तरों पर अहम माने जा रहे हैं।
लखनऊ में ब्रजेश पाठक की कैंट विधान सभा सीट पर सबसे ज्यादा नाराजगी के संकेत
राजधानी लखनऊ की विधानसभा सीटों पर नजर डालें तो कैंट और लखनऊ उत्तरी में बीजेपी के मौजूदा विधायकों को लेकर मतदाताओं की नाराजगी काफी ज्यादा बताई गई है। सबसे चौंकाने वाला आकलन कैंट विधानसभा सीट को लेकर है। यहां से चुनाव जीतने वाले डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक के खिलाफ भी हाई एंटी इनकंबेंसी की बात सामने आई है। सर्वे के मुताबिक, यदि बीजेपी उन्हें दोबारा इसी सीट से उम्मीदवार बनाती है तो पार्टी को यहां गंभीर चुनावी नुकसान उठाना पड़ सकता है।
वहीं, बीजेपी की परंपरागत लखनऊ पूर्वी विधानसभा सीट पर भी मौजूदा विधायक को लेकर मतदाताओं में नाराजगी बताई गई है। हालांकि, इस नाराजगी के बावजूद सीट पर मुकाबले की स्थिति पूरी तरह एकतरफा नहीं मानी गई है। बख्शी का तालाब (बीकेटी) विधानसभा सीट पर भी मौजूदा विधायक को लेकर मतदाताओं की प्रतिक्रिया मिली-जुली रही है।
पूर्वांचल और गोरखपुर में भी बीजेपी के लिए चुनौती
सर्वे रिपोर्ट में बीजेपी के लिए सबसे चिंताजनक तस्वीर पूर्वांचल क्षेत्र से सामने आने की बात कही गई है। यहां कई सीटों पर मौजूदा विधायकों के खिलाफ जबरदस्त एंटी इनकंबेंसी दर्ज होने का दावा है। खास बात यह है कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के गढ़ माने जाने वाले गोरखपुर रीजन की 33 विधानसभा सीटों पर भी बीजेपी के मौजूदा विधायकों को लेकर मतदाताओं में नाराजगी देखने को मिली है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संसदीय क्षेत्र वाराणसी को लेकर भी सर्वे के निष्कर्ष बीजेपी की चिंता बढ़ाने वाले बताए गए हैं। रिपोर्ट के अनुसार, वाराणसी की कैंट विधानसभा सीट को छोड़कर बाकी सीटों पर बीजेपी को चुनावी नुकसान उठाना पड़ सकता है। यदि यह आकलन सही साबित होता है तो पूर्वांचल में पार्टी के सामने बड़ी राजनीतिक चुनौती खड़ी हो सकती है।
कानपुर-बुंदेलखंड में नुकसान, ब्रज में बीजेपी की स्थिति बेहतर
क्षेत्रवार सर्वे के आकलन में कानपुर-बुंदेलखंड रीजन में बीजेपी को सबसे ज्यादा नुकसान होने के संकेत दिए गए हैं। वहीं, अवध क्षेत्र की 62 विधानसभा सीटों पर मतदाताओं की राय मिली-जुली बताई गई है। इस क्षेत्र में बीजेपी के प्रदर्शन को लेकर 50-50 की स्थिति सामने आने का दावा किया गया है।
इसके उलट पश्चिमी उत्तर प्रदेश में बीजेपी की स्थिति अपेक्षाकृत बेहतर रहने का अनुमान है। सर्वे में पश्चिम क्षेत्र की 41 सीटों पर पार्टी के प्रदर्शन को बेहतर बताया गया है। सबसे मजबूत स्थिति ब्रज क्षेत्र में सामने आने की बात कही गई है। यहां की कुल 53 विधानसभा सीटों पर बीजेपी के अच्छे प्रदर्शन का अनुमान लगाया गया है।
विधायकों के टिकट पर हो सकता है असर
इस सर्वे के निष्कर्षों का सबसे बड़ा असर आगामी विधानसभा चुनाव में टिकट वितरण पर पड़ सकता है। करीब 120 विधायकों के खिलाफ हाई एंटी इनकंबेंसी की बात सामने आने के बाद बीजेपी नेतृत्व के सामने मौजूदा विधायकों को दोबारा मैदान में उतारने या नए चेहरों पर दांव लगाने का विकल्प होगा। खासकर उन सीटों पर उम्मीदवार बदलने का दबाव बढ़ सकता है, जहां मौजूदा विधायक के खिलाफ जनता की नाराजगी ज्यादा बताई गई है।
कुल मिलाकर सर्वे के ये कथित निष्कर्ष बीजेपी के लिए एक चेतावनी की तरह हैं। पार्टी के सामने जहां ब्रज और पश्चिम क्षेत्र में अपनी मजबूत स्थिति बरकरार रखने की चुनौती होगी, वहीं पूर्वांचल, कानपुर-बुंदेलखंड और अवध में नाराजगी दूर करना भी बड़ी प्राथमिकता बन सकता है। 2027 के चुनाव से पहले यह आकलन पार्टी की चुनावी रणनीति और टिकट वितरण की दिशा तय करने में अहम साबित हो सकता है।
सिर्फ सरकार नहीं, विधायकों की व्यक्तिगत छवि भी जांच के दायरे में
इस सर्वे की खास बात यह है कि इसमें सरकार के कामकाज और मौजूदा विधायकों की व्यक्तिगत छवि को अलग-अलग कसौटियों पर परखने की कोशिश की गई है। राजनीतिक दलों के लिए चुनाव से पहले इस तरह का फीडबैक इसलिए महत्वपूर्ण होता है, क्योंकि कई बार सरकार के प्रति समर्थन होने के बावजूद स्थानीय विधायक के खिलाफ नाराजगी देखने को मिलती है।
बीजेपी के लिए यह आकलन टिकट वितरण के लिहाज से भी अहम माना जा रहा है। जिन विधानसभा क्षेत्रों में मौजूदा विधायकों के खिलाफ नाराजगी अधिक बताई गई है, वहां नए चेहरों को मौका देने पर भी विचार हो सकता है। हालांकि, सर्वे के आधार पर टिकट बदलने का कोई आधिकारिक निर्णय सामने नहीं आया है।

Gen Z में बीजेपी के खिलाफ नाराजगी, 40 वर्ष से अधिक उम्र के मतदाताओं की राय भी अहम
सर्वे का एक महत्वपूर्ण पहलू उम्र के आधार पर मतदाताओं की राजनीतिक पसंद भी है। रिपोर्ट के मुताबिक, जेन-जी (Gen Z) के 44 फीसदी मतदाताओं ने बीजेपी के खिलाफ अपनी राय दी है। यह आंकड़ा पार्टी के लिए इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि युवा मतदाताओं का रुझान आगामी विधानसभा चुनाव में अहम भूमिका निभा सकता है।
वहीं, 40 वर्ष से अधिक उम्र के मतदाताओं की राय में भी बीजेपी और समाजवादी पार्टी के बीच बहुत बड़ा अंतर सामने नहीं आया है। यानी बीजेपी के सामने चुनौती केवल युवा मतदाताओं को अपने पक्ष में लाने की नहीं, बल्कि अलग-अलग आयु वर्ग के मतदाताओं के बीच अपना समर्थन बनाए रखने की भी है।
लेखक के बारे में
Santosh Kumar Singh
श्री सिंह ‘विजुअल लाइव’ मासिक पत्रिका एवं न्यूज पोर्टल के संपादक के रूप में पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। वर्ष 2004 से उन्होंने प्रिंट और डिजिटल मीडिया में अपनी सेवाएं देते हुए पत्रकारिता का लंबा अनुभव अर्जित किया है। लखनऊ से प्रकाशित हिन्दी दैनिक राष्ट्रीय सहारा, डेली न्यूज एक्टिविस्ट, राष्ट्रीय स्वरूप और भारत प्रतिदिन सहित विभिन्न मीडिया संस्थानों के लिए उन्होंने रिपोर्टिंग की है। प्रधानमंत्री और राष्ट्रपति के लखनऊ आगमन से लेकर राजनीति, प्रशासन, जनसरोकार और शहर की महत्वपूर्ण घटनाओं की रिपोर्टिंग में उनकी सक्रिय भूमिका रही है। श्री सिंह की विशेष रुचि खोजी पत्रकारिता और डिजिटल माध्यमों के प्रभावी इस्तेमाल में है। इंटरनेट आधारित शोध, सूचना के स्रोतों की पड़ताल और खबर की बारीकियों तक पहुंचने की उनकी कार्यशैली उन्हें अलग पहचान देती है। बदलते मीडिया परिदृश्य में वे तथ्यपरक, विश्वसनीय और जनसरोकार से जुड़ी पत्रकारिता को प्राथमिकता देते हैं। पत्रकारिता के साथ उन्हें संगीत और यात्रा में विशेष रुचि है। उनका मानना है कि एक पत्रकार के लिए जिज्ञासा, निरंतर सीखने की प्रवृत्ति और तथ्यों के प्रति ईमानदारी सबसे महत्वपूर्ण गुण हैं। Santosh Kumar Singh की सभी खबरें देखें →
संबंधित लेख

दीपोत्सव का हर दीप कुम्हार के श्रम और किसान की उपज को दे रहा नई रोशनी: योगी

पिघलते हिमालय की चेतावनी: ग्लेशियरों का संकट, जंगलों का विनाश और विकास के नाम पर प्रकृति की कीमत

एक कानून, सभी नागरिक: UCC लागू होने पर बदलेंगे शादी, तलाक और संपत्ति से जुड़े नियम

पत्रकार से बने हजारों करोड़ के कारोबारी, आरके सिन्हा के निधन से शोक की लहर
टॉप रीड्स

सलेमपुर लोकसभा क्षेत्र में 1.30 करोड़ से होगा अंबेडकर व रविदास मंदिरों का सुंदरीकरण

2027 चुनाव से पहले AAP में बड़ी टूट, तीन विधायकों ने बीजेपी का दामन थामा

बलिया के डॉ. विनय यादव का केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय में चयन, सहायक प्राध्यापक बनकर बढ़ाया जिले का मान

योगी आदित्यनाथ देश के सर्वश्रेष्ठ मुख्यमंत्री, पुष्कर सिंह धामी दूसरे और हिमंत बिस्वा सरमा तीसरे स्थान पर

अखिलेश के दिल्ली पहुंचने पर ओपी राजभर का हमला, बोले- मुलायम की परंपरा भूले; राहुल गांधी पर भी कसा तंज

‘राहुल गांधी का झंडा उठाना बंद करिए’, कैबिनेट मंत्री ओपी राजभर ने अखिलेश को दी सलाह

खराब मौसम से टली जनसभा अब 3 नवंबर को! अखिलेश यादव के काशी दौरे की तैयारी में जुटी सपा, संजोई में जुटेंगे कार्यकर्ता






Leave a Comment
Don't worry! Your email address will not be published. Required fields are marked (*).