बीबीडीयू में दो दिवसीय राष्ट्रीय कार्यशाला का आयोजन, वैज्ञानिक अनुसंधान को सामाजिक प्रभाव से जोड़ने पर जोर

लखनऊ। बाबू बनारसी दास विश्वविद्यालय (बीबीडीयू), लखनऊ के अनुसंधान एवं विकास प्रकोष्ठ ने PHSS Foundation for Science & Society के सहयोग से विश्वविद्यालय परिसर में “अनुसंधान उत्कृष्टता: वैज्ञानिक अन्वेषण से सामाजिक प्रभाव तक” विषय पर दो दिवसीय राष्ट्रीय कार्यशाला का आयोजन किया। कार्यशाला में अनुसंधान की गुणवत्ता बढ़ाने, नवाचार को प्रोत्साहित करने और वैज्ञानिक शोध को समाज के लिए उपयोगी बनाने पर जोर दिया गया।
कार्यशाला का उद्देश्य शिक्षकों और शोधार्थियों को अनुसंधान की विभिन्न प्रक्रियाओं से अवगत कराना था। इसमें वैज्ञानिक समस्याओं की पहचान, शोध की रूपरेखा तैयार करने, डेटा संग्रह, वैज्ञानिक लेखन, शोध-पत्र प्रकाशन, बौद्धिक संपदा अधिकार (आईपीआर) और नवाचार जैसे विषयों पर चर्चा की गई। साथ ही, शोध के निष्कर्षों को सामाजिक लाभ में परिवर्तित करने की संभावनाओं पर भी विचार-विमर्श हुआ।

कुलपति ने किया उद्घाटन सत्र में प्रतिभाग
कार्यशाला का आयोजन बीबीडीयू की चांसलर अलका दास गुप्ता, प्रो-चांसलर विराज सागर दास और वाइस प्रेसिडेंट सोनाक्षी दास की प्रेरणा से किया गया।
उद्घाटन सत्र में विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. एस. के. श्रीवास्तव मुख्य अतिथि, प्रो-कुलपति प्रो. एस. सी. शर्मा विशिष्ट अतिथि तथा PHSS Foundation for Science & Society के उपाध्यक्ष डॉ. आर. डी. त्रिपाठी सत्राध्यक्ष के रूप में उपस्थित रहे। संस्था के सचिव डॉ. राणा प्रताप सिंह विशेष अतिथि के रूप में शामिल हुए।
विश्वविद्यालय के अनुसंधान एवं विकास प्रकोष्ठ के प्रमुख डॉ. एस. अहमद अली ने स्वागत संबोधन दिया। कार्यशाला का समन्वय डॉ. अंजलि अवस्थी ने किया।

डेटा संग्रह से लेकर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस तक पर चर्चा
कार्यशाला के तकनीकी सत्रों में समकालीन अनुसंधान से जुड़े कई महत्वपूर्ण विषयों पर विशेषज्ञों ने व्याख्यान दिए। इनमें डेटा संग्रह एवं संकलन, साइबर जोखिम का आकलन और न्यूनीकरण, संपादक के दृष्टिकोण से प्रभावी शोध-पत्र लेखन, बौद्धिक संपदा अधिकार तथा नवाचार का संरक्षण प्रमुख रहे।
इसके अतिरिक्त, अनुसंधान आधारित कृषि समाधान, सतत विकास लक्ष्यों (एसडीजी) की प्राप्ति के लिए अनुप्रयुक्त अनुसंधान और कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) के दौर में अनुसंधान पद्धति एवं अकादमिक सत्यनिष्ठा पर भी विस्तार से चर्चा की गई। संवादात्मक सत्र के माध्यम से प्रतिभागियों को विशेषज्ञों के साथ विचार साझा करने और अपने सवालों के जवाब पाने का अवसर मिला।
प्रतिष्ठित संस्थानों के विशेषज्ञों ने साझा किए अनुभव
कार्यशाला में वैज्ञानिक तथा औद्योगिक अनुसंधान परिषद–राष्ट्रीय वनस्पति अनुसंधान संस्थान (सीएसआईआर-एनबीआरआई), भारतीय प्रबंधन संस्थान लखनऊ (आईआईएम लखनऊ), बाबासाहेब भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय (बीबीएयू), गिरि विकास अध्ययन संस्थान, डॉ. राममनोहर लोहिया अवध विश्वविद्यालय और डॉ. राममनोहर लोहिया राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय सहित कई प्रतिष्ठित संस्थानों के विशेषज्ञों ने सहभागिता की। PHSS Foundation for Science & Society के प्रतिनिधि भी कार्यक्रम में मौजूद रहे।
विशेषज्ञों ने समकालीन वैज्ञानिक और सामाजिक चुनौतियों के समाधान के लिए जिम्मेदार, बहुविषयक और परिणामोन्मुख अनुसंधान की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने वैज्ञानिक खोजों और उनके व्यावहारिक उपयोग के बीच की दूरी कम करने को महत्वपूर्ण बताया, ताकि शोध का लाभ समाज तक पहुंच सके।

समापन सत्र में शोध के सामाजिक योगदान पर जोर
कार्यशाला के दूसरे दिन आयोजित समापन सत्र में गिरि विकास अध्ययन संस्थान, लखनऊ के वरिष्ठ फेलो (आईसीएसएसआर) डॉ. मोहम्मद लतीफ खान विशेष अतिथि और यूनेस्को के पूर्व पर्यावरण विशेषज्ञ डॉ. राम बूझ विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। सत्र की अध्यक्षता डॉ. राणा प्रताप सिंह ने की।
इस दौरान प्रतिभागियों ने कार्यशाला से प्राप्त अनुभव और प्रतिक्रियाएं साझा कीं। अंत में समन्वयक डॉ. अंजलि अवस्थी ने सभी अतिथियों, विशेषज्ञों और प्रतिभागियों के प्रति आभार व्यक्त किया।
अनुसंधान और नवाचार की संस्कृति को बढ़ावा देने की पहल
बीबीडीयू का अनुसंधान एवं विकास प्रकोष्ठ विश्वविद्यालय में मजबूत अनुसंधान पारिस्थितिकी तंत्र विकसित करने के लिए निरंतर प्रयासरत है। प्रकोष्ठ का उद्देश्य वैज्ञानिक उत्कृष्टता, नवाचार, अकादमिक सत्यनिष्ठा और सामाजिक सरोकारों से जुड़े शोध को प्रोत्साहित करना है। इस कार्यशाला के माध्यम से अनुसंधान को केवल अकादमिक उपलब्धियों तक सीमित न रखकर सतत विकास और जनकल्याण से जोड़ने की दिशा में प्रयास किया गया।
लेखक के बारे में
Syed Fiza Khatoon
सैयद फ़िज़ा खातून ‘विजुअल लाइव’ की तकनीकी एवं डिजिटल टीम की महत्वपूर्ण सदस्य हैं। वर्ष 2014 में स्नातक की शिक्षा पूरी करने के बाद से उन्होंने मीडिया के तकनीकी और डिजिटल कार्यों में अपनी दक्षता विकसित की है। न्यूज के लेआउट और प्रस्तुतीकरण, कंटेंट के डिजिटल प्रसारण तथा सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर खबरों के अपडेट में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका रहती है। खबर को बेहतर तरीके से प्रस्तुत करने से लेकर उसके डिजिटल वितरण तक वह जिम्मेदारियों का कुशलतापूर्वक निर्वहन करती हैं। सौम्य और मिलनसार स्वभाव के साथ नई तकनीकों और बदलते डिजिटल मीडिया को सीखने की निरंतर ललक उनकी कार्यशैली की खास पहचान है। टीम के साथ बेहतर समन्वय बनाकर काम करना और हर कार्य में कुछ नया सीखना उनकी पेशेवर सोच को दर्शाता है। डिजिटल पत्रकारिता के तेजी से बदलते दौर में तकनीकी समझ और रचनात्मक सोच के साथ सटीक, आकर्षक और प्रभावी न्यूज प्रस्तुतीकरण* में उनका योगदान ‘विजुअल लाइव’ की डिजिटल टीम को मजबूती प्रदान करता है। Syed Fiza Khatoon की सभी खबरें देखें →
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