नेहा सिंह राठौर ही नहीं, बल्कि सभी बहन-बेटियों की इज्जत को कुछ मीडिया संस्थानों ने खिलौना बना रखा है : मोहम्मद आफाक

लखनऊ। राष्ट्रीय सामाजिक कार्यकर्ता संगठन ने सोमवार को हजरतगंज स्थित दारुलशफा के बाहर एबीपी न्यूज चैनल की तस्वीर जलाकर अपना विरोध दर्ज कराया। संगठन के कन्वीनर मोहम्मद आफाक, हां मुहम्म फ़हीम सिद्दीकी, परवेज़ आलम ने कहा कि आज एक तरफ सरकार ‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ’ का नारा लगा रही है, वहीं दूसरी तरफ देश में कुछ मीडिया संस्थानों और पत्रकारों के रवैये से बेटियों की इज्जत और सम्मान को ठेस पहुंचाने वाली घटनाएं सामने आ रही हैं। यह बेहद अफसोसजनक और निंदनीय है।
मोहम्मद आफाक ने कहा कि नेहा सिंह राठौर ही नहीं, बल्कि हर उस बहन और बेटी की इज्जत सम्मान के योग्य है, जो अपने विचार व्यक्त करती है, सामाजिक मुद्दों पर आवाज उठाती है या अपने अधिकारों के लिए संघर्ष करती है। किसी के विचारों से असहमति होना अलग बात है, लेकिन असहमति की आड़ में किसी महिला की इज्जत, चरित्र और निजी जीवन को निशाना बनाना किसी भी सूरत में उचित नहीं है।
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उन्होंने कहा कि पिछले कई वर्षों से हक की आवाज उठाने वाली महिलाओं के खिलाफ कुछ मीडिया संस्थानों, पत्रकारों और संगठनों द्वारा जिस तरह की भाषा का इस्तेमाल किया जा रहा है, उससे पत्रकारिता के मूल्यों और सामाजिक जिम्मेदारी पर गंभीर सवाल खड़े होते हैं। किसी भी महिला को ‘कॉल गर्ल’ या ‘जिस्मफरोश’ जैसे अपमानजनक शब्दों से संबोधित करना बेहद गैर-जिम्मेदाराना रवैया है। किसी व्यक्ति के विचारों या गतिविधियों की आलोचना करने के लिए तर्क, तथ्यों और सभ्य भाषा का इस्तेमाल किया जाना चाहिए, न कि किसी की इज्जत उछालने और चरित्र हनन का रास्ता अपनाया जाना चाहिए।

मोहम्मद आफाक ने कहा कि मीडिया लोकतंत्र का एक महत्वपूर्ण स्तंभ है और जनमत तैयार करने में उसकी अहम भूमिका होती है। ऐसे में मीडिया से जुड़े लोगों की जिम्मेदारी और भी बढ़ जाती है कि वे खबर और टिप्पणी के बीच अंतर समझें, तथ्यों की पुष्टि करें और किसी भी महिला के बारे में ऐसी भाषा का इस्तेमाल न करें, जिससे उसकी इज्जत और सम्मान को ठेस पहुंचे। पत्रकारिता का उद्देश्य जनता को जागरूक करना और समाज की समस्याओं को उजागर करना है, न कि किसी का अपमान करके सनसनी फैलाना।
उन्होंने आगे कहा कि जो लोग महिलाओं की इज्जत के मामले में दोहरा मापदंड अपनाते हैं, उन्हें अपने रवैये पर गंभीरता से विचार करना चाहिए। किसी भी महिला के खिलाफ अपमानजनक शब्दों का इस्तेमाल करने से पहले यह सोचना चाहिए कि यदि यही भाषा उनके अपने घर की बहन, बेटी या किसी करीबी रिश्तेदार के लिए इस्तेमाल की जाए, तो उन्हें कैसा महसूस होगा। महिलाओं की इज्जत केवल किसी एक परिवार या वर्ग का मामला नहीं है, बल्कि पूरे समाज की साझा जिम्मेदारी है।
मोहम्मद आफाक ने कहा कि सरकार और सामाजिक संगठन महिलाओं की सुरक्षा, शिक्षा और सशक्तीकरण की बात करते हैं, लेकिन इन नारों को हकीकत में बदलने के लिए जरूरी है कि महिलाओं के खिलाफ अपमानजनक भाषा, चरित्र हनन और उपहासपूर्ण अभियानों को हतोत्साहित किया जाए। महिलाओं को अपनी बात रखने और अपने विचार व्यक्त करने का पूरा अधिकार है। उनसे असहमति जताते समय भी शालीनता, सभ्यता और संवैधानिक मूल्यों का सम्मान किया जाना चाहिए।
उन्होंने मांग की कि मीडिया संस्थान अपनी पत्रकारिता संबंधी जिम्मेदारियों की गंभीरता से समीक्षा करें, महिलाओं के खिलाफ अपमानजनक टिप्पणियों से बचें और ऐसे मामलों में जिम्मेदार रवैया अपनाएं। समाज के हर वर्ग को महिलाओं की इज्जत और सम्मान की रक्षा के लिए आगे आना चाहिए, ताकि किसी भी बहन या बेटी को अपनी आवाज उठाने के कारण अपमान और चरित्र हनन का सामना न करना पड़े।
मोहम्मद आफाक ने कहा कि हमारा विरोध किसी एक महिला तक सीमित नहीं है, बल्कि देश की सभी बहन-बेटियों की इज्जत, सम्मान और अधिकारों की रक्षा के लिए है। विचारों में असहमति लोकतंत्र की खूबसूरती है, लेकिन किसी की इज्जत को निशाना बनाना न तो लोकतांत्रिक मूल्यों के अनुरूप है और न ही एक सभ्य समाज की पहचान।
लेखक के बारे में
Santosh Kumar Singh
श्री सिंह ‘विजुअल लाइव’ मासिक पत्रिका एवं न्यूज पोर्टल के संपादक के रूप में पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। वर्ष 2004 से उन्होंने प्रिंट और डिजिटल मीडिया में अपनी सेवाएं देते हुए पत्रकारिता का लंबा अनुभव अर्जित किया है। लखनऊ से प्रकाशित हिन्दी दैनिक राष्ट्रीय सहारा, डेली न्यूज एक्टिविस्ट, राष्ट्रीय स्वरूप और भारत प्रतिदिन सहित विभिन्न मीडिया संस्थानों के लिए उन्होंने रिपोर्टिंग की है। प्रधानमंत्री और राष्ट्रपति के लखनऊ आगमन से लेकर राजनीति, प्रशासन, जनसरोकार और शहर की महत्वपूर्ण घटनाओं की रिपोर्टिंग में उनकी सक्रिय भूमिका रही है। श्री सिंह की विशेष रुचि खोजी पत्रकारिता और डिजिटल माध्यमों के प्रभावी इस्तेमाल में है। इंटरनेट आधारित शोध, सूचना के स्रोतों की पड़ताल और खबर की बारीकियों तक पहुंचने की उनकी कार्यशैली उन्हें अलग पहचान देती है। बदलते मीडिया परिदृश्य में वे तथ्यपरक, विश्वसनीय और जनसरोकार से जुड़ी पत्रकारिता को प्राथमिकता देते हैं। पत्रकारिता के साथ उन्हें संगीत और यात्रा में विशेष रुचि है। उनका मानना है कि एक पत्रकार के लिए जिज्ञासा, निरंतर सीखने की प्रवृत्ति और तथ्यों के प्रति ईमानदारी सबसे महत्वपूर्ण गुण हैं। Santosh Kumar Singh की सभी खबरें देखें →
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