13 लाख नाम किसके जोड़े गए, चुनाव आयोग पूरी सूची सार्वजनिक करे : संजय सिंह

स्वनिर्मित फॉर्म-7 कैसे बना, समयसीमा खत्म होने के बाद नाम काटने के 1,10,476 आवेदन कैसे आये? चुनाव है या मज़ाक
लखनऊ। आम आदमी पार्टी के उत्तर प्रदेश प्रभारी एवं राज्यसभा सांसद संजय सिंह ने शुक्रवार को लखनऊ स्थित पार्टी मुख्यालय में प्रेस वार्ता कर उत्तर प्रदेश की मतदाता सूची में कथित अनियमितताओं को लेकर भाजपा और चुनाव आयोग पर गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि दिल्ली और बंगाल की तरह उत्तर प्रदेश में भी वोट चोरी का खेल शुरू हो गया है। चुनाव आयोग के अनुसार, SIR से पहले प्रदेश में 15 करोड़ 44 लाख मतदाता थे और पुनरीक्षण में लगभग 2 करोड़ 90 लाख नाम काटे जाने की बात सामने आई। इसके बाद नाम जोड़ने के लिए 84 लाख और नाम काटने के लिए 4 लाख 30 हजार आवेदन आने की जानकारी दी गई।
13 लाख नाम किसके जोड़े गए, चुनाव आयोग पूरी सूची सार्वजनिक करे
संजय सिंह ने कहा कि चुनाव आयोग के नियमों के मुताबिक फॉर्म-6 के तहत जोड़े गए नामों की जानकारी सार्वजनिक होनी चाहिए, ताकि राजनीतिक दल बूथ और विधानसभा स्तर पर जांच कर सकें। उन्होंने सवाल उठाया कि 84 लाख आवेदनों के बीच सार्वजनिक जानकारी में 71 लाख 13 हजार नाम जोड़े जाने का उल्लेख है, तो बाकी 13 लाख नाम किसके हैं और कहां जोड़े गए? उन्होंने कहा कि नरेंद्र मोदी ने ज्ञानेश कुमार के माध्यम से उत्तर प्रदेश में 13 लाख फर्जी वोट जुड़वाए हैं। उन्होंने कहा कि 130 विधानसभा क्षेत्रों में 10-10 हजार या 260 विधानसभा क्षेत्रों में 5-5 हजार नाम बढ़ने से चुनाव का परिणाम बदल सकता है। चुनाव आयोग को बताना चाहिए कि ये नाम किसके कहने पर और किन बूथों पर जोड़े गए। क्या यह सूची नरेंद्र मोदी, योगी आदित्यनाथ या पंकज चौधरी ने दी थी? आयोग इस बारे में जानकारी सार्वजनिक क्यों नहीं कर रहा?

85 हजार नाम बिना कारण काटे जाने का आरोप, फॉर्म-7 पर उठाए सवाल
संजय सिंह ने कहा कि फॉर्म-6 के तहत नाम जोड़ने के आवेदन की BLO जांच करता है और ERO नाम जोड़ने का फैसला लेता है। इसी तरह फॉर्म-7 के तहत नाम हटाने के लिए भी निर्धारित प्रक्रिया और कारण जरूरी हैं। उन्होंने कहा कि नाम काटने के 4 लाख 30 हजार आवेदनों में से 85 हजार नाम बिना कारण बताए काट दिए गए। उन्होंने कहा कि ये फॉर्म ऑटो-जेनरेटेड यानी स्वतः तैयार किए गए बताए जा रहे हैं। सवाल है कि बिना कारण वाले फॉर्म के आधार पर नाम कैसे काटे गए? उन्होंने आशंका जताई कि इस प्रक्रिया का इस्तेमाल चुनाव से पहले विपक्षी मतदाताओं के नाम हटाने के लिए किया जा सकता है। प्रभावित लोग बाद में अपील और न्यायाधिकरणों के चक्कर लगाते रह जाएंगे, जबकि चुनाव खत्म हो चुका होगा।
तरबगंज में रेशमा के नाम से 188 नाम काटने के आवेदन, आवेदक का पता नहीं
संजय सिंह ने गोंडा जिले की तरबगंज विधानसभा का उदाहरण देते हुए कहा कि रेशमा नाम की महिला के नाम से 188 मतदाताओं के नाम हटाने के आवेदन दिए गए, लेकिन उसके बारे में जानकारी जुटाने पर उसका पता नहीं चल सका। उन्होंने सवाल किया कि एक व्यक्ति के नाम से इतनी बड़ी संख्या में आवेदन कैसे दिए गए और उसकी पहचान व आवेदनों की सत्यता की जांच क्यों नहीं हुई?
एक ही नाम से सैकड़ों मतदाताओं के नाम हटाने के आवेदन, मुस्लिम मतदाताओं पर निशाना बनाने का आरोप
संजय सिंह ने कई मामलों का उल्लेख करते हुए कहा कि अलग-अलग व्यक्तियों के नाम से बड़ी संख्या में नाम काटने के आवेदन दिए गए और उनमें मुस्लिम मतदाताओं की संख्या अधिक बताई गई। बाबूराम: 237 नाम, इनमें 212 मुस्लिम, रेशमा: 188 नाम, इनमें 174 मुस्लिम, निशा: 124 नाम, इनमें 109 मुस्लिम, धीरज कुमार भारती: 112 नाम, इनमें 97 मुस्लिम, कुमार कमलेश: 75 नाम, इनमें 65 मुस्लिम, बृज मोहन: 66 नाम, इनमें 63 मुस्लिम, देवदत्त: 62 नाम, इनमें 59 मुस्लिम, आदर्श कुमार पांडे: 61 नाम, इनमें 56 मुस्लिम, जसबंध: 59 नाम, इनमें 55 मुस्लिम और पीलीभीत में नरेंद्र कुमार तिवारी: 56 नाम, इनमें 50 मुस्लिम। उन्होंने कहा कि इन आंकड़ों की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। यदि किसी समुदाय के मतदाताओं के नाम बड़ी संख्या में हटाने के आवेदन आए हैं, तो इसकी वजह स्पष्ट होनी चाहिए।
बाबा और पंकज चौधरी के बयानों के बाद हर बूथ पर 200 नाम जोड़ने की बात, पारदर्शिता पर सवाल
संजय सिंह ने SIR के दौरान करीब 2 करोड़ 90 लाख नाम कटने का जिक्र करते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और केंद्रीय मंत्री पंकज चौधरी के बयानों पर सवाल उठाए। उन्होंने भाजपा कार्यकर्ताओं से हर बूथ पर 200-200 नाम जुड़वाने की बात का उल्लेख करते हुए चुनाव आयोग से बूथवार नए मतदाताओं की संख्या और संबंधित दस्तावेजों की जानकारी सार्वजनिक करने की मांग की। उन्होंने कहा कि आयोग को किसी भी राजनीतिक दबाव से मुक्त होकर निष्पक्ष चुनाव सुनिश्चित करना चाहिए।
दिल्ली में भी नाम काटने की शिकायतों पर कार्रवाई नहीं हुई, इसलिए हारे चुनाव
संजय सिंह ने कहा कि दिल्ली विधानसभा चुनाव के दौरान आम आदमी पार्टी ने एक-एक व्यक्ति के नाम से दो-दो हजार मतदाताओं के नाम काटने के आवेदन दिए जाने की शिकायतें उठाई थीं, लेकिन प्रभावी सुनवाई नहीं हुई इसलिए चुनाव हारे
यूपी में दिल्ली और बंगाल की पुनरावृत्ति का खतरा, समय रहते जागे विपक्ष और जनता
संजय सिंह ने चेतावनी दी कि यदि विपक्षी दल और उत्तर प्रदेश की जनता समय रहते नहीं जागे, तो बड़ी संख्या में लोग मताधिकार से वंचित हो सकते हैं। उन्होंने कहा, "यह बंगाल और दिल्ली की पुनरावृत्ति उत्तर प्रदेश में की जा रही है। अगर समय रहते विपक्षी राजनीतिक दल और उत्तर प्रदेश की जनता नहीं जागेगी, तो लोग मताधिकार से वंचित हो जाएंगे।" उन्होंने कहा कि कुछ हजार वोटों से चुनाव हार-जीत तय होती है। इसलिए सभी विपक्षी दलों को एकजुट होकर इस मुद्दे को उठाना चाहिए। यह केवल आम आदमी पार्टी का मामला नहीं, बल्कि हर नागरिक के मताधिकार की रक्षा का सवाल है।
फैजुल्लागंज में बाढ़ के बाद बीमारी और भोजन का संकट, पीड़ितों की तत्काल मदद करे योगी सरकार
संजय सिंह ने लखनऊ के फैजुल्लागंज में बाढ़ के बाद बदहाल हालात पर चिंता जताते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से प्रभावित लोगों को तत्काल राहत देने की अपील की। उन्होंने एंबुलेंस, स्वास्थ्य सेवाओं, राशन, साफ-सफाई और आवागमन की व्यवस्था दुरुस्त करने की मांग की।
आम आदमी पार्टी की मांग है कि उत्तर प्रदेश में मतदाता सूची से जुड़े सभी आरोपों की निष्पक्ष जांच हो, नाम जोड़ने और हटाने की पूरी जानकारी सार्वजनिक की जाए तथा फैजुल्लागंज के बाढ़ प्रभावित परिवारों को तत्काल राहत पहुंचाई जाए। पार्टी ने कहा कि हर नागरिक के मताधिकार की रक्षा और संकट में फंसे लोगों की मदद सरकार की प्राथमिक जिम्मेदारी है।
लेखक के बारे में
Santosh Kumar Singh
श्री सिंह ‘विजुअल लाइव’ मासिक पत्रिका एवं न्यूज पोर्टल के संपादक के रूप में पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। वर्ष 2004 से उन्होंने प्रिंट और डिजिटल मीडिया में अपनी सेवाएं देते हुए पत्रकारिता का लंबा अनुभव अर्जित किया है। लखनऊ से प्रकाशित हिन्दी दैनिक राष्ट्रीय सहारा, डेली न्यूज एक्टिविस्ट, राष्ट्रीय स्वरूप और भारत प्रतिदिन सहित विभिन्न मीडिया संस्थानों के लिए उन्होंने रिपोर्टिंग की है। प्रधानमंत्री और राष्ट्रपति के लखनऊ आगमन से लेकर राजनीति, प्रशासन, जनसरोकार और शहर की महत्वपूर्ण घटनाओं की रिपोर्टिंग में उनकी सक्रिय भूमिका रही है। श्री सिंह की विशेष रुचि खोजी पत्रकारिता और डिजिटल माध्यमों के प्रभावी इस्तेमाल में है। इंटरनेट आधारित शोध, सूचना के स्रोतों की पड़ताल और खबर की बारीकियों तक पहुंचने की उनकी कार्यशैली उन्हें अलग पहचान देती है। बदलते मीडिया परिदृश्य में वे तथ्यपरक, विश्वसनीय और जनसरोकार से जुड़ी पत्रकारिता को प्राथमिकता देते हैं। पत्रकारिता के साथ उन्हें संगीत और यात्रा में विशेष रुचि है। उनका मानना है कि एक पत्रकार के लिए जिज्ञासा, निरंतर सीखने की प्रवृत्ति और तथ्यों के प्रति ईमानदारी सबसे महत्वपूर्ण गुण हैं। Santosh Kumar Singh की सभी खबरें देखें →
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