CJI से जुड़े बयान पर संजय राउत के खिलाफ कार्रवाई की मांग

नई दिल्ली। शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) के सांसद संजय राउत की मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत और न्यायपालिका को लेकर की गई टिप्पणियों पर कानूनी विवाद बढ़ गया है। सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन (SCBA) ने राउत और पत्रकार निखिल वागले के खिलाफ आपराधिक अवमानना की कार्यवाही शुरू करने की मांग करते हुए याचिका दाखिल की है। भारत के अटॉर्नी जनरल आर. वेंकटरमणी ने 15 अक्टूबर को इस कार्यवाही के लिए सहमति दे दी। वहीं, एक अलग मामले में सुप्रीम कोर्ट ने संजय राउत से उनके बयान और आचरण को लेकर स्पष्टीकरण मांगा है।

क्या है पूरा मामला?
विवाद उस समय शुरू हुआ, जब विपक्षी दलों के एक प्रतिनिधिमंडल ने मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत से मुलाकात का समय मांगा था। रिपोर्टों के मुताबिक, मुख्य न्यायाधीश ने प्रतिनिधिमंडल से मिलने से इनकार करते हुए उन्हें अपनी शिकायतों के लिए न्यायिक प्रक्रिया अपनाने की सलाह दी थी।
इसके बाद संजय राउत ने न्यायपालिका को लेकर बयान दिए। उन्होंने आरोप लगाया कि न्यायाधीश भाजपा के राजनीतिक कार्यक्रमों में शामिल होते हैं और मुख्यमंत्रियों की ओर से उनके लिए रात्रिभोज आयोजित किए जाते हैं। उन्होंने लंदन में न्यायाधीशों के राजनीतिक हस्तियों के साथ बैडमिंटन खेलने से जुड़ी तस्वीरों का भी उल्लेख किया था। इन बयानों को लेकर न्यायपालिका की गरिमा और निष्पक्षता पर बहस शुरू हो गई।
सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन ने क्यों की कार्रवाई की मांग?
सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन ने 15 अक्टूबर को संजय राउत और पत्रकार निखिल वागले के खिलाफ आपराधिक अवमानना की कार्यवाही शुरू करने की मांग की। एसोसिएशन का आरोप है कि दोनों की टिप्पणियां न्यायपालिका की प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाने वाली हैं और सुप्रीम कोर्ट की संस्था के प्रति लोगों के सम्मान को प्रभावित कर सकती हैं।
अटॉर्नी जनरल ने अवमानना की कार्यवाही के लिए सहमति देते हुए कहा कि संबंधित टिप्पणियां प्रथम दृष्टया गंभीर प्रकृति की हैं। उन्होंने राउत के आरोपों के संदर्भ में यह भी कहा कि न्यायाधीशों के बारे में सार्वजनिक बयान देने से पहले तथ्यों की पुष्टि की जानी चाहिए।
बैडमिंटन की तस्वीरों को लेकर भी विवाद
इस मामले में लंदन में न्यायाधीशों के बैडमिंटन खेलने से जुड़ी बताई गई तस्वीरें भी चर्चा में हैं। अटॉर्नी जनरल ने दिल्ली हाईकोर्ट के 19 जून के आदेश का हवाला देते हुए कहा कि संबंधित तस्वीरें लंदन की नहीं, बल्कि नवंबर 2025 में दिल्ली के त्यागराज स्टेडियम में आयोजित एक कार्यक्रम की थीं।
अवमानना याचिका में आरोप लगाया गया है कि इस तरह के बयानों से न्यायपालिका की छवि प्रभावित हो सकती है। हालांकि, ये याचिकाकर्ता और अटॉर्नी जनरल की ओर से रखे गए तर्क हैं; अवमानना के आरोपों पर अंतिम न्यायिक निर्णय होना बाकी है।
अलग मामले में सुप्रीम कोर्ट ने भी मांगा जवाब
इस विवाद के बीच सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग की मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) से जुड़े विपक्षी नेताओं के मामले में संजय राउत से उनके आचरण पर स्पष्टीकरण मांगा है। इस मामले में राउत याचिकाकर्ताओं में शामिल हैं। अदालत ने स्पष्ट किया कि उनकी याचिका पर आगे विचार उनके स्पष्टीकरण के अधीन रहेगा।
ध्यान देने वाली बात यह है कि SIR मामले में स्पष्टीकरण मांगने की कार्यवाही और सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन की आपराधिक अवमानना याचिका अलग-अलग प्रक्रियाएं हैं। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार, अवमानना याचिका पर अटॉर्नी जनरल की सहमति मिल चुकी है, लेकिन इसे सुप्रीम कोर्ट द्वारा अवमानना का दोषी ठहराए जाने के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।
अब आगे क्या होगा?
अटॉर्नी जनरल की सहमति के बाद SCBA की अवमानना याचिका पर आगे की न्यायिक प्रक्रिया का रास्ता खुल गया है। मामले में अदालत की ओर से आगे की कार्रवाई और संबंधित पक्षों का जवाब महत्वपूर्ण होगा। फिलहाल संजय राउत के खिलाफ अवमानना का आरोप साबित नहीं हुआ है और इस संबंध में अंतिम फैसला अदालत को करना है।
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