युवाओं के आंदोलनों के पीछे विदेशी ताकतों का हाथ! काशी में चंपत राय ने उठाया बड़ा सवाल, संत समाज को दी अहम जिम्मेदारी

संस्कृति संसद के दूसरे दिन बोले राम मंदिर ट्रस्ट के महासचिव, कहा- युवाओं को गुमराह कर सड़कों पर विरोध प्रदर्शन कराया जा रहा; भारत के इतिहास, सांस्कृतिक एकता और संत परंपरा पर भी रखे विचार
वाराणसी। काशी में चल रही तीन दिवसीय संस्कृति संसद 2026 के दूसरे दिन बुधवार को श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय ने युवाओं को लेकर बड़ा बयान दिया। उन्होंने आरोप लगाया कि विदेशी शक्तियां भारतीय युवाओं को गुमराह कर उन्हें सड़कों पर विरोध प्रदर्शन के लिए प्रेरित कर रही हैं। उन्होंने कहा कि देश को ऐसी ताकतों से सतर्क रहने की जरूरत है। चंपत राय ने समाज में सांस्कृतिक चेतना और एकता को मजबूत बनाने में संत समाज की भूमिका को भी महत्वपूर्ण बताया।
रुद्राक्ष अंतरराष्ट्रीय कन्वेंशन सेंटर में आयोजित इस कार्यक्रम में चंपत राय ने कहा कि देश की सामाजिक और सांस्कृतिक मजबूती बनाए रखने के लिए केवल सरकारी प्रयास पर्याप्त नहीं हैं। समाज के भीतर जागरूकता और वैचारिक एकता विकसित करने में संतों को भी आगे आना होगा। उनके अनुसार, त्योहारों और सांस्कृतिक परंपराओं से लोगों का जुड़ाव बढ़ाने में संत समाज प्रभावी भूमिका निभा सकता है।
भारत के इतिहास का किया उल्लेख
अपने संबोधन में चंपत राय ने भारत के ऐतिहासिक आर्थिक और राजनीतिक उतार-चढ़ाव का जिक्र किया। उन्होंने मौर्यकाल का उदाहरण देते हुए कहा कि प्राचीन समय में भारत आर्थिक रूप से समृद्ध था। उन्होंने अलग-अलग दौर में हुए विदेशी आक्रमणों और देश के सामने आई चुनौतियों का भी उल्लेख किया।
उन्होंने सिंध पर हुए आठवीं शताब्दी के आक्रमण, महमूद गजनवी के हमलों और मोहम्मद गौरी तथा पृथ्वीराज चौहान के संघर्ष का संदर्भ दिया। चंपत राय ने कहा कि भारत ने अपने इतिहास में अनेक कठिन परिस्थितियों का सामना किया, लेकिन उसकी सांस्कृतिक पहचान और परंपराएं बनी रहीं।

गोवा इनक्विजिशन और महापुरुषों का भी किया जिक्र
चंपत राय ने पुर्तगाली शासन के दौरान गोवा में हुए अत्याचारों का उल्लेख करते हुए गोवा इनक्विजिशन की चर्चा की। उन्होंने कहा कि इतिहास की घटनाओं को समझना और उनसे सीख लेना जरूरी है।
उन्होंने शिवाजी महाराज और महाराणा प्रताप जैसे ऐतिहासिक व्यक्तित्वों का उदाहरण देते हुए कहा कि समाज में महापुरुषों के प्रति सम्मान और श्रद्धा बनाए रखने की आवश्यकता है। उनके अनुसार, जागरूक समाज में ऐसे प्रयास सफल नहीं हो सकते जो महापुरुषों के सम्मान को कमजोर करने की कोशिश करें।
सरकार के साथ संत समाज की भी बड़ी जिम्मेदारी
चंपत राय ने कहा कि सरकार आर्थिक विकास और शिक्षा के विस्तार के लिए योजनाएं बना सकती है, लेकिन समाज में नैतिक मूल्यों, सांस्कृतिक चेतना और वैचारिक एकता को मजबूत करने का काम संत समाज भी कर सकता है। उन्होंने कहा कि कठिन परिस्थितियों में लोगों का मनोबल बनाए रखना और समाज को दिशा देना संत परंपरा की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है।
तुलसीदास और काशी की परंपरा का उदाहरण
अपने संबोधन में उन्होंने गोस्वामी तुलसीदास का भी उल्लेख किया। चंपत राय ने कहा कि जिस दौर में दिल्ली की सत्ता को सर्वोच्च माना जाता था, उस समय तुलसीदास ने काशी से भगवान श्रीराम की महिमा का संदेश दिया। उन्होंने वृंदावन के एक संत से जुड़े ऐतिहासिक प्रसंग का भी जिक्र किया।
संस्कृति संसद में संतों, विद्वानों और युवाओं के बीच भारतीय परंपरा, सांस्कृतिक पहचान और नई पीढ़ी की भूमिका पर चर्चा हो रही है। 3 से 5 नवंबर तक चल रहे इस आयोजन में जेन-जी कॉन्क्लेव भी प्रमुख आकर्षण है।
लेखक के बारे में
Ashutosh Kumar Sharma
मूल रूप से वाराणसी, उत्तर प्रदेश के रहने वाले आशुतोष कुमार शर्मा पेशे से स्कूल प्रधानाचार्य हैं। पिछले 8 वर्षों से पत्रकारिता एवं मीडिया क्षेत्र से जुड़े श्री शर्मा की डिजिटल मीडिया, नई तकनीकों और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स में विशेष रुचि है। उनका मानना है कि तकनीक और मीडिया का समन्वय ही भविष्य की पत्रकारिता की दिशा तय करेगा। मीडिया को समाज का चौथा स्तंभ मानते हुए वे सच्चाई, तथ्यपरकता और जनसरोकार से जुड़े मुद्दों को सामने लाने के लिए प्रतिबद्ध हैं। Ashutosh Kumar Sharma की सभी खबरें देखें →
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