काशी में अदाणी चेयरपर्सन प्रीति अदाणी ने प्राचीन ज्ञान को बताया आधुनिक चुनौतियों का समाधान

वाराणसी। आधुनिक दुनिया तकनीक, आर्थिक प्रतिस्पर्धा और तेजी से बदलती जीवनशैली के दौर से गुजर रही है। ऐसे समय में भारत की प्राचीन ज्ञान परंपराएं केवल इतिहास का हिस्सा नहीं, बल्कि वर्तमान की चुनौतियों से निपटने का रास्ता भी दिखा सकती हैं। अदाणी फाउंडेशन की चेयरपर्सन डॉ. प्रीति अदाणी ने सोमवार को वाराणसी में आयोजित अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी में यह विचार व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि विकास का वास्तविक अर्थ तभी पूरा होता है, जब उसका लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे और लोगों के जीवन में सकारात्मक बदलाव आए।
ताज गंगा में 2 से 4 नवंबर तक आयोजित 'अरिस्टोटल-कन्फ्यूशियस संगोष्ठी 2026' में देश-विदेश के विद्वान, दार्शनिक और विभिन्न ज्ञान परंपराओं से जुड़े विशेषज्ञ भाग ले रहे हैं। इस आयोजन का उद्देश्य प्राचीन सभ्यताओं के विचारों को आज की वैश्विक समस्याओं और भविष्य की जरूरतों से जोड़कर देखना है।
योग और मोटे अनाज को बताया प्राचीन ज्ञान की आधुनिक उपयोगिता
अपने संबोधन में प्रीति अदाणी ने भारतीय परंपरा के दो उदाहरणों के जरिए समझाया कि पुराने ज्ञान का महत्व आज भी बना हुआ है। उन्होंने योग को शरीर और मन के बीच संतुलन बनाने का माध्यम बताया। वहीं, मिलेट्स यानी मोटे अनाज का उल्लेख करते हुए कहा कि पारंपरिक भारतीय खानपान आज पोषण, खाद्य सुरक्षा और पर्यावरण के अनुकूल कृषि जैसे वैश्विक विषयों से जुड़ रहा है।
उनके अनुसार, प्राचीन ज्ञान को केवल धार्मिक या सांस्कृतिक विरासत मानकर सीमित नहीं करना चाहिए। इसमें ऐसे व्यावहारिक विचार भी हैं, जिन्हें आधुनिक जीवन की जरूरतों के अनुसार अपनाया जा सकता है।

बुद्ध, अरस्तू और कन्फ्यूशियस के विचारों में मानव कल्याण का सूत्र
प्रीति अदाणी ने अपने विचारों में अलग-अलग सभ्यताओं के दार्शनिकों का उल्लेख किया। उन्होंने भगवान बुद्ध के दुख और उससे मुक्ति के चिंतन, अरस्तू के मानवीय उत्कर्ष संबंधी विचारों और कन्फ्यूशियस की सामाजिक संबंधों एवं नैतिक जिम्मेदारियों पर आधारित शिक्षा का संदर्भ दिया।
उन्होंने भारतीय दर्शन के 'वसुधैव कुटुंबकम्' के विचार को भी रेखांकित किया, जो पूरी दुनिया को एक परिवार मानने की भावना देता है। उनके मुताबिक, अलग-अलग परंपराओं की भाषा और पृष्ठभूमि भले अलग हो, लेकिन मानव पीड़ा कम करने, नैतिकता और बेहतर समाज बनाने का उद्देश्य उन्हें एक सूत्र में जोड़ता है।
अस्पताल और स्कूल नहीं, लोगों के जीवन में बदलाव से मापा जाए विकास
विकास की परिभाषा पर बात करते हुए प्रीति अदाणी ने कहा कि केवल बड़े भवनों, संस्थानों या आर्थिक आंकड़ों से प्रगति का आकलन पर्याप्त नहीं है। किसी अस्पताल की सफलता इस बात से भी जुड़ी है कि वहां पहुंचने वाले मरीज को बेहतर उपचार और उम्मीद मिलती है या नहीं। इसी तरह विद्यालय खोलना तभी सार्थक है, जब वहां पढ़ने वाला बच्चा अपने भविष्य को बेहतर बनाने का अवसर हासिल कर सके।
उन्होंने समाजसेवा के अनुभवों का उल्लेख करते हुए आत्मनिर्भरता, शिक्षा, स्वास्थ्य और लोगों की गरिमा को विकास के महत्वपूर्ण आधार बताया। उनके विचार में किसी भी सामाजिक पहल की असली उपलब्धि उससे पैदा होने वाले अवसरों और लंबे समय तक मिलने वाले लाभ से तय होती है।
वैश्विक चुनौतियों पर विभिन्न विचार परंपराओं का संवाद
तीन दिवसीय संगोष्ठी में हिंदू, बौद्ध, जैन, अरस्तूवादी, कन्फ्यूशियस, कैथोलिक और इस्लामी सहित विभिन्न दार्शनिक परंपराओं के बीच संवाद और तुलनात्मक चर्चा हो रही है। इसमें नैतिकता, सुशासन, शक्ति के जिम्मेदार उपयोग, वैश्विक शांति और बदलती तकनीक जैसे विषय शामिल हैं।
आयोजन में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) के इस्तेमाल पर भी ध्यान दिया जा रहा है। इसका उद्देश्य अलग-अलग भाषाओं और संस्कृतियों के बीच संवाद को आसान बनाना तथा विचारों के आदान-प्रदान के नए तरीके तलाशना है। 4 नवंबर को प्रतिभागियों के लिए काशी की सांस्कृतिक और आध्यात्मिक विरासत से परिचित कराने वाले कार्यक्रम भी प्रस्तावित हैं। इनमें गंगा घाटों, प्रमुख मंदिरों और सारनाथ का भ्रमण शामिल है।
काशी में हो रही यह संगोष्ठी इस विचार को सामने रखती है कि आधुनिकता और परंपरा एक-दूसरे के विरोधी नहीं हैं। नैतिक मूल्यों, मानवीय संवेदनाओं और वैज्ञानिक-तकनीकी प्रगति के बीच संतुलन बनाकर ही विकास को व्यापक सामाजिक कल्याण से जोड़ा जा सकता है।
लेखक के बारे में
Anup Sharma
मूल रूप से वाराणसी, उत्तर प्रदेश के रहने वाले अनूप कुमार शर्मा पेशे से सॉफ्टवेयर इंजीनियर हैं और डिजिटल तकनीक एवं मीडिया के क्षेत्र में विशेष रुचि रखते हैं। तकनीकी दक्षता के साथ डिजिटल प्लेटफॉर्म की कार्यप्रणाली और बदलती मीडिया तकनीकों को समझने में उनकी गहरी दिलचस्पी है। डिजिटल मीडिया के तेजी से बदलते स्वरूप के बीच वे नई तकनीकों, वेब प्लेटफॉर्म, डिजिटल कंटेंट और ऑनलाइन मीडिया टूल्स को सीखने और उन्हें प्रभावी ढंग से इस्तेमाल करने के लिए निरंतर प्रयासरत रहते हैं। तकनीकी सोच और रचनात्मक दृष्टिकोण का बेहतर तालमेल उनकी कार्यशैली की प्रमुख विशेषता है। मीडिया और तकनीक के बीच बढ़ते संबंधों को वे भविष्य की पत्रकारिता का महत्वपूर्ण हिस्सा मानते हैं। तकनीकी नवाचारों के माध्यम से डिजिटल पत्रकारिता को अधिक तेज, प्रभावी और पाठक-केंद्रित बनाने में उनकी विशेष रुचि है। Anup Sharma की सभी खबरें देखें →
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