गंगा पर बनने वाले सिग्नेचर ब्रिज को मिला नया नाम, अब ‘नमो ब्रिज’ के नाम से पहचानी जाएगी काशी की नई पहचान

वाराणसी। धर्म और संस्कृति की नगरी काशी के विकास से जुड़ी एक महत्वपूर्ण परियोजना को नया नाम मिल गया है। गंगा नदी पर निर्माणाधीन रेल-सड़क डबल डेकर सिग्नेचर ब्रिज अब ‘नमो ब्रिज’ के नाम से जाना जाएगा। शनिवार, 31 अक्टूबर को वाराणसी पहुंचे केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने इसकी घोषणा की। उन्होंने निर्माण कार्य का जायजा लेने के साथ काशी रेलवे स्टेशन के पुनर्विकास की प्रगति भी देखी।
रेल मंत्री ने बताया कि पुल के नजदीक नमो घाट स्थित है और यह पुल भी उसी क्षेत्र से होकर गुजरेगा। इसी वजह से इसका नाम नमो ब्रिज रखने का निर्णय लिया गया है।
एक पुल पर सड़क और रेलवे, डिजाइन है खास
गंगा पर बन रहे इस पुल की सबसे खास बात इसका डबल डेकर स्वरूप है। इसके ऊपरी हिस्से में छह लेन की सड़क बनाई जाएगी, जबकि निचले हिस्से में चार रेलवे ट्रैक होंगे। यानी सड़क और रेल यातायात के लिए एक ही संरचना का इस्तेमाल किया जाएगा।
इस परियोजना को आने वाले करीब 100 वर्षों की परिवहन जरूरतों को ध्यान में रखकर तैयार किया जा रहा है। इसके पूरा होने पर वाराणसी और चंदौली के बीच आवागमन के साथ रेल परिचालन की क्षमता बढ़ाने में मदद मिलेगी।

पुराने मालवीय ब्रिज पर भी घटेगा दबाव
गंगा पर बनने वाला नया रेल-सह-सड़क पुल मौजूदा मालवीय ब्रिज के आसपास रेल और सड़क परिवहन की बढ़ती जरूरतों को देखते हुए तैयार किया जा रहा है। करीब 139 वर्ष पुराने मालवीय ब्रिज पर यातायात का दबाव लगातार महत्वपूर्ण चुनौती बना हुआ है। नई संरचना से इस मार्ग पर रेल परिचालन और सड़क यातायात को अतिरिक्त क्षमता मिलने की उम्मीद है।
काशी रेलवे स्टेशन पर बनेंगे छह आधुनिक प्लेटफॉर्म
रेल मंत्री ने काशी रेलवे स्टेशन के पुनर्विकास कार्यों का भी निरीक्षण किया। स्टेशन को आधुनिक सुविधाओं के साथ विकसित किया जा रहा है। योजना के तहत यहां छह प्लेटफॉर्म बनाए जाएंगे। यात्रियों के लिए फुटबॉल मैदान के आकार का विशाल प्रतीक्षालय भी तैयार किया जा रहा है।
इसका उद्देश्य काशी विश्वनाथ मंदिर और शहर के अन्य धार्मिक स्थलों पर आने वाले श्रद्धालुओं को बेहतर सुविधाएं देना है। स्टेशन के विकसित होने से त्योहारों और धार्मिक आयोजनों के दौरान यात्रियों की भीड़ को व्यवस्थित करने में भी मदद मिल सकती है।
पूर्वांचल के परिवहन नेटवर्क को मिलेगा विस्तार
नमो ब्रिज और काशी रेलवे स्टेशन का विकास केवल वाराणसी तक सीमित नहीं रहेगा। इन परियोजनाओं से पूर्वांचल के रेल और सड़क नेटवर्क को अतिरिक्त क्षमता मिलने की उम्मीद है। माल ढुलाई, यात्री परिवहन और आसपास के जिलों से काशी पहुंचने वाले लोगों को भी इसका लाभ मिल सकता है।
गंगा के ऊपर बनने वाला यह नया पुल आने वाले समय में काशी के आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर की एक प्रमुख पहचान बन सकता है।
लेखक के बारे में
Anup Sharma
मूल रूप से वाराणसी, उत्तर प्रदेश के रहने वाले अनूप कुमार शर्मा पेशे से सॉफ्टवेयर इंजीनियर हैं और डिजिटल तकनीक एवं मीडिया के क्षेत्र में विशेष रुचि रखते हैं। तकनीकी दक्षता के साथ डिजिटल प्लेटफॉर्म की कार्यप्रणाली और बदलती मीडिया तकनीकों को समझने में उनकी गहरी दिलचस्पी है। डिजिटल मीडिया के तेजी से बदलते स्वरूप के बीच वे नई तकनीकों, वेब प्लेटफॉर्म, डिजिटल कंटेंट और ऑनलाइन मीडिया टूल्स को सीखने और उन्हें प्रभावी ढंग से इस्तेमाल करने के लिए निरंतर प्रयासरत रहते हैं। तकनीकी सोच और रचनात्मक दृष्टिकोण का बेहतर तालमेल उनकी कार्यशैली की प्रमुख विशेषता है। मीडिया और तकनीक के बीच बढ़ते संबंधों को वे भविष्य की पत्रकारिता का महत्वपूर्ण हिस्सा मानते हैं। तकनीकी नवाचारों के माध्यम से डिजिटल पत्रकारिता को अधिक तेज, प्रभावी और पाठक-केंद्रित बनाने में उनकी विशेष रुचि है। Anup Sharma की सभी खबरें देखें →
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