
12 फरवरी राष्ट्रीय हड़ताल को एआईपीएफ का समर्थन
विरोध कार्यक्रम में शामिल होंगे एआईपीएफ कार्यकर्ता
मजदूरों को आधुनिक गुलामी की तरफ धकेल रही मोदी सरकार
लखनऊ। 29 श्रम कानूनों को खत्म कर बनाए गए मजदूर विरोधी 4 लेबर कोड को वापस लेने, रोजगार के अधिकार के लिए कानून बनाने, किसान हितों के विरुद्ध किए गए भारत-अमेरिका समझौते को संसद के पटल पर रखने, सम्मानजनक वेतन और पक्की नौकरी देने, हर नागरिक के गरिमापूर्ण जीवन को सुनिश्चित करने जैसे सवालों पर 12 फरवरी को आयोजित हो रही अखिल भारतीय हड़ताल का ऑल इंडिया पीपुल्स फ्रंट ने समर्थन किया है। आज एआईपीएफ की राष्ट्रीय कार्य समिति की तरफ से जारी बयान में राष्ट्रीय अध्यक्ष एस. आर. दारापुरी ने बताया कि मोदी सरकार मजदूरों को आधुनिक गुलामी में ले जा रही है। 200 वर्षों के संघर्षों से हासिल काम के घंटे 8 के अधिकार को छीन कर 12 घंटे कर दिया गया है। फ्लोर लेवल वेज लाकर न्यूनतम मजदूरी से भी कम दर पर मजदूरी दर लेबर कोड में तय की गई है और फिक्सड टर्म इम्प्लॉयमेंट के जरिए जो सामाजिक सुरक्षा मजदूरों को हासिल थी वह भी उनसे छीन ली गई है। मजदूरों का सम्मानजनक जीवन सुनिश्चित किया जाए यह मांग इस राष्ट्रीय हड़ताल में उठाई गई है।
उन्होंने बताया कि भारत-अमेरिकी व्यापार समझौते में जो बातें निकल कर आ रही हैं उसे यह स्पष्ट है कि भारत के कृषक, पशुपालक समुदाय और भारतीय उद्योगों को बड़ा नुकसान होने जा रहा है।
इस ट्रेड डील से किसान तबाह हो जाएंगे और व्यापार बर्बाद होगा। इसलिए ट्रेड डील को संसद के पटल पर रखने की जो मांग की जा रही है एआईपीएफ उसके साथ है। उन्होंने बताया कि एआईपीएफ की सभी इकाइयां देश भर में आयोजित कार्यक्रमों में शामिल रहेंगी।





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