
क्रिकेट के देश में फुटबॉल बेचारा !
दुनिया जून 2026 के FIFA World Cup 2026 की उलटी गिनती शुरू कर चुकी है। अमेरिका, कनाडा और मेक्सिको में होने वाला यह महाकुंभ केवल एक खेल प्रतियोगिता नहीं, बल्कि ग्लोबल पॉप-कल्चर, राजनीति, बिजनेस और भावनाओं का सबसे बड़ा मंच बनने जा रहा है। दुनिया की लगभग एक-चौथाई आबादी किसी न किसी स्क्रीन से जुड़ी होगी। लेकिन विडंबना देखिए — 140 करोड़ लोगों वाले भारत में अभी तक यह तय नहीं है कि लोग मैच देखेंगे कहां।
यह केवल ब्रॉडकास्टिंग राइट्स का विवाद नहीं है। यह भारत की खेल संस्कृति का एक्स-रे है।
भारत में फुटबॉल को लेकर जुनून दिखाई जरूर देता है।
कोलकाता के क्लब डर्बी हों, केरल की रातभर जागती स्क्रीनें हों या यूरोपियन लीग के लिए सुबह तक जागने वाले युवा — फुटबॉल का भावनात्मक बाजार यहां मौजूद है। लेकिन खेल की दुनिया केवल जुनून से नहीं चलती, वह अर्थव्यवस्था से भी चलती है। और भारत की खेल अर्थव्यवस्था आज लगभग पूरी तरह क्रिकेट केंद्रित हो चुकी है।
Indian Premier League ने भारतीय खेल बाजार को इतना बड़ा बना दिया कि बाकी खेल उसके साए में छोटे दिखने लगे। आज भारत में क्रिकेट सिर्फ खेल नहीं, एक समानांतर मनोरंजन उद्योग है। उसमें बॉलीवुड है, राजनीति है, विज्ञापन है, सेलिब्रिटी संस्कृति है और अरबों का निवेश है। ऐसे में फुटबॉल, हॉकी, एथलेटिक्स या दूसरे खेलों के लिए जगह बचती तो है, लेकिन अक्सर “सपोर्टिंग एक्ट” की तरह।
यही कारण है कि फीफा जैसी संस्था भी भारत में अपनी कीमत तय करने में संघर्ष कर रही है।
दरअसल, समस्या यह नहीं कि भारत में फुटबॉल फैंस नहीं हैं। समस्या यह है कि भारत में फुटबॉल देखने वाले करोड़ों लोग हैं, लेकिन फुटबॉल के लिए आर्थिक प्रतिबद्धता अभी भी सीमित है। यूरोप या दक्षिण अमेरिका में फुटबॉल स्थानीय पहचान और राष्ट्रीय गौरव से जुड़ा है। भारत में ज्यादातर लोग क्लब या स्टार खिलाड़ी से जुड़ते हैं, अपनी राष्ट्रीय टीम से नहीं।
जब आपकी राष्ट्रीय टीम विश्व मंच पर दिखाई ही नहीं देती, तो खेल का सामूहिक भावनात्मक निवेश अधूरा रह जाता है।
Lionel Messi और Cristiano Ronaldo भारत में सुपरस्टार हैं, लेकिन भारतीय फुटबॉल अभी भी संघर्ष की कहानी है। यही फर्क क्रिकेट और फुटबॉल के भारतीय अनुभव में सबसे बड़ा अंतर पैदा करता है। क्रिकेट में लोग खुद को विजेता संस्कृति का हिस्सा मानते हैं, फुटबॉल में वे दर्शक भर रह जाते हैं।
इस बार फीफा वर्ल्ड कप के सामने एक और बड़ी चुनौती टाइम ज़ोन की भी है। उत्तरी अमेरिका में होने वाले मैच भारत में रात और सुबह के बीच प्रसारित होंगे। विज्ञापन बाजार के लिए यह सबसे कमजोर समय माना जाता है। खेल भावना अपनी जगह है, लेकिन टीवी और डिजिटल प्लेटफॉर्म आखिरकार राजस्व से चलते हैं। कोई भी कंपनी केवल “वैश्विक प्रतिष्ठा” के नाम पर सैकड़ों करोड़ रुपये नहीं जलाना चाहती।
लेकिन इस पूरी कहानी में भारत के लिए सबसे असहज सवाल कुछ और है।
क्या हम सच में “स्पोर्टिंग नेशन” हैं?
क्योंकि खेल राष्ट्र वह नहीं होता जहां लोग केवल बड़े टूर्नामेंट देखकर सोशल मीडिया पर एक्सपर्ट बन जाएं। खेल राष्ट्र वह होता है जहां स्कूलों में खेल संस्कृति हो, स्थानीय लीगों में निवेश हो, खिलाड़ी छोटे शहरों से उभरें और दर्शक सिर्फ जीतने वाले खेलों के पीछे न भागें।
भारत में आज भी लाखों परिवारों के लिए खेल का मतलब “क्रिकेट में करियर” है।
फुटबॉल, तैराकी, जिम्नास्टिक्स, एथलेटिक्स या रेसलिंग अक्सर “जोखिम” माने जाते हैं। यही वजह है कि 140 करोड़ की आबादी के बावजूद भारत ओलंपिक और वैश्विक खेलों में अपनी क्षमता के अनुपात में पीछे दिखता है।
यह भी सच है कि दुनिया बदल रही है।
सऊदी अरब फुटबॉल में अरबों डॉलर झोंक रहा है। अमेरिका 2026 वर्ल्ड कप के जरिए फुटबॉल बाजार को और बड़ा करना चाहता है। यूरोप में फुटबॉल केवल खेल नहीं, सॉफ्ट पावर बन चुका है। वहीं भारत अब भी इस बहस में उलझा है कि फीफा वर्ल्ड कप दिखाना फायदे का सौदा है या नहीं।
शायद यही इस पूरे विवाद की सबसे बड़ी विडंबना है।
दुनिया फुटबॉल को भविष्य के ग्लोबल मनोरंजन मॉडल की तरह देख रही है, जबकि भारत अभी भी क्रिकेट की असाधारण सफलता के भीतर कैद दिखाई देता है। क्रिकेट ने भारत को बहुत कुछ दिया है — पहचान, आर्थिक ताकत और वैश्विक प्रभाव। लेकिन किसी एक खेल की अत्यधिक प्रभुता धीरे-धीरे बाकी खेलों की सांस भी रोक सकती है।
फुटबॉल वर्ल्ड कप 2026 के राइट्स का यह विवाद शायद एक चेतावनी है।
यह बताता है कि केवल दर्शक संख्या से खेल संस्कृति नहीं बनती।
उसके लिए संस्थागत निवेश, राष्ट्रीय महत्वाकांक्षा और खेलों के प्रति संतुलित दृष्टि भी चाहिए।
वरना हम हर चार साल में फुटबॉल का बुखार चढ़ाकर, मेसी और रोनाल्डो पर बहस करके, फिर अगले दिन वापस क्रिकेट की सुरक्षित दुनिया में लौटते रहेंगे।
अंकित अवस्थी





Leave A Comment
Don’t worry ! Your email address will not be published. Required fields are marked (*).