'बुलेटप्रूफ जैकेट पहनाकर यूपी भेजिए', एनकाउंटर की आशंका जताने वाले आरोपियों को कोर्ट से मिली राहत

नई दिल्ली/शामली। उत्तर प्रदेश के शामली में हरियाणवी गायक अंकित बालियान की हत्या के मामले में गिरफ्तार दो आरोपियों ने अदालत के सामने ऐसी मांग रखी, जिसने सबका ध्यान खींच लिया। आरोपियों ने आशंका जताई कि उन्हें उत्तर प्रदेश पुलिस फर्जी मुठभेड़ में मार सकती है। इसी डर से उन्होंने दिल्ली से शामली ले जाते समय हथकड़ी, पैरों में बेड़ियां और बुलेटप्रूफ जैकेट पहनाकर ले जाने की मांग की। दिल्ली की पटियाला हाउस कोर्ट ने उनकी अर्जी स्वीकार करते हुए जेल प्रशासन और पुलिस को सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम करने का निर्देश दिया है।
अदालत का आदेश 3 नवंबर 2026 का है, जो 7 नवंबर को सामने आया। अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश सौरभ प्रताप सिंह ललर ने तिहाड़ जेल प्रशासन और डीसीपी, नॉर्थ एवेन्यू को निर्देश दिया कि आरोपियों को दिल्ली से शामली की अदालत तक ले जाने और वापस लाने के दौरान पूरी सुरक्षा दी जाए। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि पेशी और यात्रा के दौरान कोई अप्रिय घटना नहीं होनी चाहिए।
आरोपियों ने खुद मांगी हथकड़ी और बेड़ियां
इस मामले में आरोपी दीपक उर्फ तीतर और योगेश उर्फ टुंडा फिलहाल दिल्ली की तिहाड़ जेल में बंद हैं। उनके वकीलों ने अदालत को बताया कि दोनों को उत्तर प्रदेश ले जाते समय फर्जी एनकाउंटर की आशंका है। इसलिए उनकी सुरक्षा के लिए विशेष इंतजाम किए जाएं।
अदालत के आदेश में दर्ज है कि वकील ने दोनों विचाराधीन कैदियों से बात की थी और उन्होंने खुद हाथों तथा पैरों में चेन कफ यानी हथकड़ी और बेड़ियां लगाने का अनुरोध किया था। इसके साथ ही बुलेटप्रूफ जैकेट पहनाने और पर्याप्त पुलिस सुरक्षा देने की मांग भी की गई थी।
कोर्ट ने आरोपियों की मांग को स्वीकार करते हुए तिहाड़ जेल प्रशासन को निर्देश दिया कि शामली की अदालत में पेशी के दौरान उन्हें इन सुरक्षा उपायों के साथ ले जाया जाए। आदेश की प्रति जेल अधीक्षक और संबंधित पुलिस अधिकारियों तक तत्काल पहुंचाने को भी कहा गया।

12 नवंबर को शामली कोर्ट में होनी है पेशी
दोनों आरोपियों को 12 नवंबर 2026 को शामली के मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (CJM) के समक्ष पेश किया जाना है। इसी पेशी के लिए उन्हें दिल्ली की तिहाड़ जेल से उत्तर प्रदेश ले जाया जाएगा।
अदालत ने केवल हथकड़ी और बुलेटप्रूफ जैकेट तक निर्देश सीमित नहीं रखे, बल्कि दिल्ली से शामली तक पूरे सफर और वापसी के दौरान सुरक्षा सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी भी संबंधित अधिकारियों को दी है। कोर्ट ने साफ कहा है कि आरोपियों की सुरक्षा में किसी तरह की लापरवाही नहीं होनी चाहिए।
26 अगस्त को जिम के बाहर हुई थी अंकित बालियान की हत्या
पूरा मामला 26 अगस्त 2026 का है। शामली के कोतवाली क्षेत्र में हरियाणवी गायक और यूट्यूबर अंकित बालियान की जिम से बाहर निकलने के बाद गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। हमलावर दो बाइकों पर आए थे और उन पर ताबड़तोड़ फायरिंग की थी। पोस्टमार्टम रिपोर्ट के अनुसार अंकित को पांच गोलियां लगी थीं, जिनमें दो सिर में थीं।
इस हत्याकांड की जांच में पुलिस ने इसे सुनियोजित साजिश बताया था। उत्तर प्रदेश के तत्कालीन डीजीपी राजीव कृष्ण ने कहा था कि हमलावरों ने वारदात से पहले अंकित की गतिविधियों की जानकारी जुटाई, हथियारों की व्यवस्था की और घटना के बाद भागने की योजना बनाई थी। पुलिस ने जांच में जितेंद्र मान उर्फ गोगी गैंग से जुड़े लोगों की संभावित भूमिका की भी बात कही थी।
दो कथित शूटर पुलिस मुठभेड़ में मारे गए थे
अंकित की हत्या के पांच दिन बाद, 31 अगस्त को शामली में पुलिस और एसटीएफ के साथ मुठभेड़ में दो कथित शूटर मोहिद और सुमित मारे गए थे। पुलिस के मुताबिक, दोनों पर 50-50 हजार रुपये का इनाम था और वे हत्या में शामिल चार कथित हमलावरों में से थे।
इस कार्रवाई के बाद जांच का दायरा केवल शूटरों तक सीमित नहीं रहा। पुलिस ने साजिश रचने, रेकी करने, हथियार उपलब्ध कराने और आरोपियों को मदद पहुंचाने वालों की भूमिका की भी जांच शुरू की।

गाने के बोल से गैंग की नाराजगी का एंगल
जांच एजेंसियों के मुताबिक, अंकित बालियान के एक गाने के बोल को लेकर गैंग के कुछ लोगों में नाराजगी थी। पुलिस इस आशंका की जांच कर रही थी कि गाने को गैंग के मारे जा चुके सरगना जितेंद्र गोगी की हत्या से जोड़कर देखा गया और इसी वजह से अंकित को निशाना बनाया गया।
इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, शामली पुलिस ने अक्टूबर में तिहाड़ जेल में बंद योगेश उर्फ टुंडा और दीपक बॉक्सर को इस हत्याकांड की कथित साजिश के सिलसिले में गिरफ्तार किया था। पुलिस की जांच में अन्य लोगों की भूमिका भी सामने आई थी। हालांकि, आरोपियों के खिलाफ लगाए गए आरोप अभी अदालत में साबित नहीं हुए हैं।
कोर्ट के आदेश का मतलब क्या है?
अदालत ने आरोपियों की सुरक्षा संबंधी मांग स्वीकार की है, लेकिन इसका अर्थ यह नहीं है कि कोर्ट ने उत्तर प्रदेश पुलिस पर फर्जी एनकाउंटर करने का आरोप सही मान लिया है। आदेश का उद्देश्य आरोपियों को सुरक्षित तरीके से एक अदालत से दूसरी अदालत तक पहुंचाना और उनकी पेशी सुनिश्चित करना है।
यह मामला एक बार फिर पुलिस हिरासत में आरोपियों की सुरक्षा, निष्पक्ष जांच और न्यायिक प्रक्रिया के दौरान मानवाधिकारों से जुड़े सवालों को चर्चा में ले आया है। अब 12 नवंबर को होने वाली पेशी के दौरान यह देखना होगा कि अदालत के निर्देशों के अनुसार सुरक्षा व्यवस्था किस तरह लागू की जाती है।
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