चुनावी मौसम में रामनगरी की याद! अखिलेश के अयोध्या दौरे पर राजभर का तंज, बोले- मथुरा और काशी की तारीख भी बताइए

लखनऊ। उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव की आहट के बीच अयोध्या एक बार फिर सियासी बयानबाजी के केंद्र में आ गई है। समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव के प्रस्तावित अयोध्या दौरे को लेकर प्रदेश सरकार के कैबिनेट मंत्री और सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी (सुभासपा) के अध्यक्ष ओम प्रकाश राजभर ने निशाना साधा है। राजभर ने सवाल उठाया कि क्या अखिलेश यादव को अब महसूस हो रहा है कि चुनाव करीब आ गया है, इसलिए उन्हें रामनगरी की याद आने लगी है?
राजभर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट करते हुए अखिलेश यादव को अयोध्या के साथ मथुरा और काशी जाने की तारीखें भी घोषित करने की सलाह दी। उनके इस बयान ने प्रदेश की राजनीति में धार्मिक स्थलों, राजनीतिक संदेश और आगामी चुनाव को लेकर नई बहस छेड़ दी है।
राजभर का तंज- देर से ही सही, सद्बुद्धि तो आई
ओम प्रकाश राजभर ने अखिलेश यादव को संबोधित करते हुए लिखा, ''अखिलेश जी, सुना है आप अयोध्या जा रहे हैं? क्या अब महसूस हो रहा है कि चुनाव बेहद करीब आ गया है? चलिए देर से सही लेकिन सद्बुद्धि तो आई। अब लगे हाथ मथुरा और काशी की तारीखों की भी घोषणा कर दीजिए।''
राजभर ने अपने संदेश का समापन जय श्रीराम, जय श्रीकृष्ण और जय बाबा विश्वनाथ के उद्घोष के साथ किया। उनके इस बयान को केवल अयोध्या दौरे पर टिप्पणी नहीं, बल्कि सपा प्रमुख की धार्मिक यात्राओं और राजनीतिक रुख को लेकर एनडीए की ओर से उठाए जा रहे सवालों की अगली कड़ी के तौर पर देखा जा रहा है।
https://x.com/oprajbhar/status/2118982662643953718?a=SmVX3tLd07nrn_13mKQ&s=19
12 दिसंबर को परिवार के साथ अयोध्या जाने की चर्चा
अखिलेश यादव के अयोध्या दौरे को लेकर समाजवादी पार्टी के नेता और अयोध्या से जुड़े सपा नेता पवन पांडेय ने जानकारी दी है कि सपा प्रमुख 12 दिसंबर 2026 को पत्नी डिंपल यादव और परिवार के साथ रामनगरी पहुंच सकते हैं। इस दौरान हनुमानगढ़ी और राम जन्मभूमि मंदिर में दर्शन तथा संतों से मुलाकात का कार्यक्रम बताया गया है।
इस प्रस्तावित यात्रा की चर्चा इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि अखिलेश यादव का अयोध्या से राजनीतिक और धार्मिक दोनों तरह का जुड़ाव रहा है। वह पहले भी रामनगरी पहुंच चुके हैं, लेकिन इस बार रामलला के दर्शन की संभावित योजना को लेकर राजनीतिक दलों के बीच बयानबाजी तेज हो गई है। फिलहाल यह दौरा घोषित कार्यक्रम और पार्टी नेताओं की ओर से दी गई जानकारी के आधार पर चर्चा में है।

अयोध्या दौरे को लेकर पहले भी उठ चुके हैं सवाल
अखिलेश यादव के अयोध्या जाने और राम मंदिर में दर्शन को लेकर ओम प्रकाश राजभर पहले भी सवाल उठा चुके हैं। अक्टूबर 2026 में अखिलेश यादव के अयोध्या दौरे के दौरान राजभर ने आरोप लगाया था कि सपा प्रमुख अल्पसंख्यक मतदाताओं की नाराजगी के डर से मंदिर में दर्शन करने से बचते हैं।
राजभर ने उस समय सोशल मीडिया पर पोस्ट कर पूछा था कि अखिलेश अयोध्या तो पहुंचे, लेकिन रामलला के दर्शन क्यों नहीं किए। उन्होंने कारसेवकों पर 1990 में हुई पुलिस फायरिंग का मुद्दा उठाते हुए अखिलेश से पश्चाताप करने की बात भी कही थी। ये राजभर के राजनीतिक आरोप हैं, जिन पर सपा प्रमुख की ओर से इस ताजा बयान के संदर्भ में कोई प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
राम मंदिर और 2027 की राजनीति का समीकरण
उत्तर प्रदेश की राजनीति में अयोध्या और राम मंदिर लंबे समय से महत्वपूर्ण मुद्दे रहे हैं। भाजपा राम मंदिर निर्माण को अपनी प्रमुख राजनीतिक उपलब्धियों और सांस्कृतिक एजेंडे के हिस्से के रूप में प्रस्तुत करती रही है। वहीं समाजवादी पार्टी भी धार्मिक-सांस्कृतिक आयोजनों में भागीदारी और अपने राजनीतिक संदेश के जरिए व्यापक सामाजिक समर्थन बनाने की कोशिश करती रही है।
अखिलेश यादव के प्रस्तावित रामलला दर्शन को इसी व्यापक राजनीतिक संदर्भ में देखा जा रहा है। भाजपा और उसके सहयोगी दलों के नेता इस यात्रा को चुनाव से जोड़कर सवाल उठा रहे हैं, जबकि सपा के लिए यह संदेश देने का अवसर हो सकता है कि उसकी राजनीति किसी धार्मिक आस्था के विरोध में नहीं है।
हालांकि, किसी नेता के मंदिर जाने या न जाने के आधार पर उसकी व्यक्तिगत आस्था अथवा मतदाताओं की प्रतिक्रिया का निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होगा। असली राजनीतिक बहस इस बात पर है कि धार्मिक प्रतीकों और यात्राओं को चुनावी विमर्श में किस तरह इस्तेमाल किया जा रहा है।
मथुरा-काशी का जिक्र कर राजभर ने बढ़ाई सियासी चर्चा
राजभर ने अपने बयान में केवल अयोध्या तक बात सीमित नहीं रखी, बल्कि मथुरा और काशी का नाम भी जोड़ दिया। यह टिप्पणी ऐसे समय आई है, जब प्रदेश में 2027 के चुनाव को लेकर राजनीतिक दल अपनी-अपनी रणनीति और मुद्दों को धार देने में जुटे हैं।
अयोध्या, मथुरा और काशी उत्तर प्रदेश के प्रमुख धार्मिक केंद्र हैं। इन तीनों का एक साथ जिक्र करके राजभर ने सपा प्रमुख के सामने धार्मिक स्थलों पर उनके रुख को लेकर राजनीतिक सवाल खड़ा किया है।
अब इस बयान पर समाजवादी पार्टी की प्रतिक्रिया और अखिलेश यादव के प्रस्तावित अयोध्या दौरे पर सभी की नजर रहेगी। आने वाले दिनों में यह देखना भी दिलचस्प होगा कि राम मंदिर दर्शन का मुद्दा 2027 के चुनावी विमर्श में कितना प्रमुख स्थान हासिल करता है और राजनीतिक दल इसे अपने-अपने तरीके से कैसे प्रस्तुत करते हैं।
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