गरीबी पर बड़ी गिरावट: 12 साल में 49.6 करोड़ लोग गरीबी रेखा से ऊपर, पीएम मोदी बोले- ‘गरीबी हटाना हमारा संकल्प सिर्फ नारा नहीं’

नई दिल्ली। भारत में गरीबी कम होने को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ऐतिहासिक उपलब्धि बताया है। उन्होंने कहा कि गरीबी हटाना सिर्फ एक नारा नहीं, बल्कि सरकार की प्रतिबद्धता है। प्रधानमंत्री का यह बयान विश्व बैंक की अक्टूबर 2026 की Poverty and Equity Brief रिपोर्ट के बाद आया है, जिसमें भारत में गरीबी के स्तर में बड़ी गिरावट दर्ज की गई है।
विश्व बैंक के मुताबिक, वर्ष 2011 से 2023 के बीच भारत में प्रतिदिन 4.20 डॉलर (2021 की क्रय शक्ति समानता यानी PPP के आधार पर) से कम पर जीवनयापन करने वाली आबादी का अनुपात 57.7 प्रतिशत से घटकर 16.1 प्रतिशत रह गया। इस अवधि में अनुमानित 49.6 करोड़ लोग इस गरीबी रेखा से ऊपर आए।
रिपोर्ट में अत्यधिक गरीबी के आंकड़ों में भी बड़ी कमी दर्ज की गई है। प्रतिदिन 3 डॉलर की अंतरराष्ट्रीय गरीबी रेखा के आधार पर अत्यधिक गरीबी की दर 2011 में 27.1 प्रतिशत थी, जो 2023 में घटकर 2.6 प्रतिशत रह गई।
गरीबी घटने के पीछे ये वजहें
विश्व बैंक ने गरीबी में कमी के पीछे कई प्रमुख कारकों का उल्लेख किया है। इनमें घरेलू उपभोग में वृद्धि, रोजगार के अवसरों में विस्तार, विशेष रूप से महिलाओं की बढ़ती भागीदारी और खाद्य सब्सिडी सहित सरकारी सामाजिक सहायता योजनाएं शामिल हैं।
रिपोर्ट के अनुसार, 2017 से 2023 के बीच देश में रोजगार पाने वालों की संख्या में करीब 13.4 करोड़ की वृद्धि हुई। इस बढ़ोतरी में ग्रामीण महिलाओं की भागीदारी भी महत्वपूर्ण रही।

यूपी से पश्चिम बंगाल तक गरीबी की चुनौती बरकरार
गरीबी में गिरावट के बावजूद रिपोर्ट ने क्षेत्रीय असमानता और रोजगार की गुणवत्ता को लेकर चिंता जताई है। भारत के गरीबों में करीब 57 प्रतिशत आबादी उत्तर प्रदेश से पश्चिम बंगाल तक फैले राज्यों के समूह में रहती है।
रिपोर्ट के अनुसार, 2023 में ग्रामीण क्षेत्रों में 4.20 डॉलर प्रतिदिन वाली गरीबी रेखा के नीचे रहने वाली आबादी का अनुपात 19.3 प्रतिशत था, जबकि शहरी क्षेत्रों में यह 8.6 प्रतिशत रहा।
आय की असमानता भी एक बड़ी चुनौती है। 2023 में सबसे अधिक कमाई करने वाले शीर्ष 10 प्रतिशत श्रमिकों की औसत मध्य आय, सबसे कम कमाई करने वाले निचले 10 प्रतिशत श्रमिकों की तुलना में करीब 13 गुना थी। विश्व बैंक ने रोजगार की गुणवत्ता और वास्तविक वेतन में सुधार को आगे की बड़ी जरूरत बताया है।
आगे रोजगार और आय बढ़ाने पर जोर
विश्व बैंक का अनुमान है कि 4.20 डॉलर प्रतिदिन की गरीबी रेखा के आधार पर गरीबी दर 2026 के 14.2 प्रतिशत से घटकर 2028 तक 12.1 प्रतिशत हो सकती है। हालांकि, रिपोर्ट के अनुसार गरीबी में कमी की रफ्तार आगे कुछ धीमी रह सकती है।
भारत में गरीबी घटने के आंकड़े आर्थिक और सामाजिक बदलाव की अहम तस्वीर पेश करते हैं। लेकिन ग्रामीण क्षेत्रों में गरीबी का संकेंद्रण, वेतन का अंतर और स्थायी व बेहतर रोजगार की कमी बताती है कि इस दिशा में अभी और काम करने की जरूरत है।
लेखक के बारे में
Anup Sharma
मूल रूप से वाराणसी, उत्तर प्रदेश के रहने वाले अनूप कुमार शर्मा पेशे से सॉफ्टवेयर इंजीनियर हैं और डिजिटल तकनीक एवं मीडिया के क्षेत्र में विशेष रुचि रखते हैं। तकनीकी दक्षता के साथ डिजिटल प्लेटफॉर्म की कार्यप्रणाली और बदलती मीडिया तकनीकों को समझने में उनकी गहरी दिलचस्पी है। डिजिटल मीडिया के तेजी से बदलते स्वरूप के बीच वे नई तकनीकों, वेब प्लेटफॉर्म, डिजिटल कंटेंट और ऑनलाइन मीडिया टूल्स को सीखने और उन्हें प्रभावी ढंग से इस्तेमाल करने के लिए निरंतर प्रयासरत रहते हैं। तकनीकी सोच और रचनात्मक दृष्टिकोण का बेहतर तालमेल उनकी कार्यशैली की प्रमुख विशेषता है। मीडिया और तकनीक के बीच बढ़ते संबंधों को वे भविष्य की पत्रकारिता का महत्वपूर्ण हिस्सा मानते हैं। तकनीकी नवाचारों के माध्यम से डिजिटल पत्रकारिता को अधिक तेज, प्रभावी और पाठक-केंद्रित बनाने में उनकी विशेष रुचि है। Anup Sharma की सभी खबरें देखें →
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