गोविंदनगर कानपुर विधान सभा - ग्राउंड रिपोर्ट

कानपुर। गोविंदनगर विधानसभा को अगर कानपुर के बदलते शहरी चरित्र का आईना कहा जाए तो गलत नहीं होगा। एक तरफ मेट्रो, चौड़ी होती सड़कें और नए निर्माण हैं, दूसरी तरफ ऐसे मोहल्ले भी हैं जहां पानी, सीवर और जलनिकासी जैसी बुनियादी सुविधाएं आज भी पूरी तरह नहीं पहुंच सकी हैं।
2022 के विधानसभा चुनाव में भाजपा के सुरेंद्र मैथानी ने गोविंदनगर सीट पर 1,17,501 वोट, यानी 61.13 प्रतिशत मत हासिल कर बड़ी जीत दर्ज की थी। उन्होंने समाजवादी पार्टी के विकास यादव को 80,896 मतों के अंतर से हराया।
अब सवाल चुनाव परिणाम का नहीं, कामकाज का है।
2022 से अब तक के कार्यकाल को देखें तो तस्वीर न तो पूरी तरह विकास की सफलता की है और न ही पूरी तरह विफलता की। विधायक की सक्रियता कई जगह दिखाई देती है, लेकिन जिन समस्याओं को लेकर बार-बार अधिकारियों को बुलाना पड़ रहा है, वे यह भी बताती हैं कि स्थायी समाधान अभी अधूरा है।
सबसे बड़ा सवाल: पानी और सीवर
गोविंदनगर के लिए सबसे गंभीर मुद्दा कानून-व्यवस्था से ज्यादा रोजमर्रा की बुनियादी सुविधाओं का दिखाई देता है।
जनवरी 2025 में जलकल के काम के कारण गोविंदनगर विधानसभा क्षेत्र के लगभग 25 मोहल्लों में पानी की आपूर्ति प्रभावित हुई थी। लोगों को करीब एक सप्ताह तक परेशानी झेलनी पड़ी। विधायक सुरेंद्र मैथानी मौके पर पहुंचे और अधिकारियों को आपूर्ति बहाल करने के निर्देश दिए।
लेकिन इससे भी ज्यादा महत्वपूर्ण तस्वीर जनवरी 2026 में सामने आई।
नौरैयाखेड़ा में स्थानीय लोगों ने बताया कि क्षेत्र में 80 वर्षों से सीवर लाइन नहीं है और लगभग आधी आबादी को करीब 40 वर्षों से नियमित पानी की आपूर्ति नहीं मिल रही। निरीक्षण के दौरान विधायक ने जलकल अधिकारियों के साथ समस्या देखी और सीवर लाइन डालने का आश्वासन दिया।
यह तथ्य गोविंदनगर के विकास मॉडल पर बड़ा सवाल खड़ा करता है।
अगर महानगर के भीतर बसे इलाके में दशकों बाद भी सीवर और पानी की समस्या मौजूद है तो केवल सड़क और दूसरी निर्माण परियोजनाओं को विकास का पैमाना नहीं माना जा सकता।
रिपोर्ट कार्ड: सक्रियता अच्छी, स्थायी समाधान अभी बाकी।
बारिश आते ही खुल जाती है जलनिकासी की पोल
गोविंदनगर और आसपास के इलाकों में जलभराव भी लगातार सामने आने वाली समस्या है।
यह समस्या केवल नाली की सफाई तक सीमित नहीं है। कई जगह सीवर लाइन, सड़क की ऊंचाई, मेट्रो निर्माण और जलनिकासी व्यवस्था एक-दूसरे से जुड़ी हुई हैं।
जनवरी 2025 में विजयनगर और गल्लामंडी इलाके में मेट्रो निर्माण के कारण पेयजल और सीवर लाइन प्रभावित होने की शिकायत सामने आई थी। विधायक ने मौके का निरीक्षण किया और मेट्रो अधिकारियों से काम का तरीका बदलने को कहा।
जुलाई 2024 में लोहारन भट्ठा से विजय नगर के बीच बनी सड़क पर पानी के रिसाव और जलभराव की शिकायत पर भी विधायक ने जलकल और पीडब्ल्यूडी अधिकारियों को पत्र लिखा था।
यहां विधायक की भूमिका को सही संदर्भ में देखना जरूरी है।
सड़क बनाना, सीवर डालना या जलकल की पाइपलाइन चलाना सीधे विधायक का विभागीय काम नहीं है। लेकिन जनप्रतिनिधि के रूप में विभागों के बीच समन्वय और निगरानी उनकी राजनीतिक जिम्मेदारी का हिस्सा है।
समस्या यह है कि यदि हर बारिश में वही समस्या दोबारा लौटती है तो केवल निरीक्षण और अधिकारियों को निर्देश देना पर्याप्त नहीं माना जा सकता।
विधायक निधि: जहां आंकड़े उपलब्ध हैं, वहां तस्वीर कैसी है?
विधायक निधि को लेकर उपलब्ध आधिकारिक आंकड़ा महत्वपूर्ण है।
वित्तीय वर्ष 2023-24 में गोविंदनगर के लिए ₹5 करोड़ की निधि दर्ज है। इसमें ₹4.9872 करोड़ के कार्य स्वीकृत हुए और ₹4.8207 करोड़ खर्च दर्ज किया गया। यानी उस वित्तीय वर्ष में स्वीकृत निधि का बड़ा हिस्सा वास्तव में खर्च हुआ। इससे एक बात साफ होती है—यह कहना सही नहीं होगा कि विधायक निधि का पैसा केवल पड़ा रहा या खर्च नहीं हुआ।
लेकिन यहां पत्रकारिता की ईमानदारी भी जरूरी है।
2022-23 से 2025-26 तक पांचों वित्तीय वर्षों का एक ही सार्वजनिक, आधिकारिक और कार्यवार consolidated ledger मुझे उपलब्ध नहीं मिला। इसलिए पूरे पांच वर्षों की कुल राशि जोड़कर कोई काल्पनिक आंकड़ा प्रकाशित करना गलत होगा।
पुराने उपलब्ध आंकड़ों में 2021-22 के दौरान गोविंदनगर विधायक की निधि से ₹1.9744 करोड़ के कार्य स्वीकृत होने और करीब ₹98 लाख के प्रस्ताव भेजे जाने की जानकारी थी, लेकिन वह वर्तमान पांच साल के कार्यकाल का आंकड़ा नहीं है।
इसलिए पांच साल का ईमानदार निष्कर्ष यही है:
जहां आधिकारिक आंकड़ा उपलब्ध है, वहां खर्च की स्थिति अच्छी दिखाई देती है; लेकिन पूरे कार्यकाल का वर्षवार, कार्यवार और भुगतानवार हिसाब सार्वजनिक रूप से एक जगह उपलब्ध होना अभी भी जरूरी है।
सड़क और निर्माण: काम भी हुए, शिकायतें भी
गोविंदनगर में सड़क निर्माण और मरम्मत के काम लगातार होते रहे हैं। लेकिन नई सड़क बनने के कुछ ही समय बाद पानी के रिसाव और खराब होने की शिकायत सामने आना निर्माण की गुणवत्ता और विभागों के बीच तालमेल पर सवाल खड़ा करता है।
जुलाई 2024 में लोहारन भट्ठा-विजयनगर सड़क के संबंध में ऐसी ही शिकायत पर विधायक ने संबंधित विभागों को पत्र लिखा था।
इससे यह निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता कि पूरी विधानसभा की सड़कें खराब हैं।
लेकिन यह जरूर पूछा जाना चाहिए कि सड़क बनने के बाद पाइपलाइन, सीवर या दूसरे विभागों की खुदाई से सड़क दोबारा क्यों टूटती है?
गोविंदनगर जैसे पुराने शहरी क्षेत्र में भविष्य की सड़क परियोजनाओं को पाइपलाइन और सीवर योजनाओं के साथ जोड़कर चलाना जरूरी है।
अपराध
गोविंदनगर की कानून-व्यवस्था पर रिपोर्ट बनाते समय सबसे ज्यादा सावधानी की जरूरत है।
पुलिस के अपराध आंकड़े थाना और पुलिस कमिश्नरेट के आधार पर दर्ज होते हैं, जबकि विधानसभा की सीमा अलग है। इसलिए थाना-वार आंकड़ों को जोड़कर बिना सीमांकन किए “गोविंदनगर विधानसभा में अपराध इतने प्रतिशत बढ़ा” कहना तथ्यात्मक रूप से गलत होगा। फिर भी क्षेत्र में गंभीर घटनाएं सामने आई हैं।
सितंबर 2024 में रतनलाल नगर में साहिल हत्याकांड के बाद गोविंदनगर थाने के प्रभारी को कथित पुलिस लापरवाही के मामले में हटाया गया था और चौकी प्रभारी को निलंबित किए जाने की भी रिपोर्ट सामने आई। फरवरी 2025 में गोविंदनगर थाने के मालखाने से ₹41 लाख से अधिक की नकदी और जेवरात गायब होने का मामला सामने आया और पूर्व मालखाना प्रभारी के खिलाफ एफआईआर दर्ज होने की रिपोर्ट प्रकाशित हुई। दूसरी ओर अपराध के मामलों में पुलिस कार्रवाई के उदाहरण भी हैं। 2025 में गोविंदनगर क्षेत्र में ₹60 लाख मूल्य के मोबाइल, लैपटॉप और दूसरी डिजिटल वस्तुओं की चोरी के मामले में पुलिस ने पांच आरोपियों को गिरफ्तार किया था।
विधायक का सदन में रिपोर्ट कार्ड
जनप्रतिनिधि का मूल्यांकन केवल सड़क और नाली से नहीं होना चाहिए। विधानसभा में उसकी उपस्थिति और सवाल पूछने की भूमिका भी महत्वपूर्ण है।
PRS Legislative Research के उपलब्ध आंकड़े 10 मार्च 2022 से 5 मार्च 2025 तक की अवधि के हैं। इस अवधि में विधानसभा में 96.7 प्रतिशत उपस्थिति रही, जबकि उत्तर प्रदेश के विधायकों की औसत उपस्थिति 86.8 प्रतिशत थी।
यह उनका मजबूत पक्ष है।
लेकिन इसी अवधि में PRS के अनुसार उनके नाम 13 प्रश्न दर्ज हैं, जबकि राज्य विधायकों का औसत 222.3 प्रश्न था।इस अंतर को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
इसका अर्थ यह नहीं कि विधायक ने क्षेत्र के मुद्दे उठाए ही नहीं। स्थानीय स्तर पर उन्होंने पानी, सड़क, मेट्रो और जलभराव को लेकर अधिकारियों से कई बार हस्तक्षेप किया है।
लेकिन विधानसभा के मंच पर सवाल पूछने की संख्या उनके रिपोर्ट कार्ड का अपेक्षाकृत कमजोर पक्ष है।
जहां प्रदर्शन मजबूत दिखता है
विधानसभा में उपस्थिति: 96.7% — राज्य औसत से काफी ऊपर।
स्थानीय समस्याओं पर मौके पर हस्तक्षेप के कई उदाहरण।
2023-24 में विधायक निधि का खर्च अपेक्षाकृत ऊंचा रहा।
पानी, सीवर और मेट्रो से जुड़े विवादों में विभागीय अधिकारियों के साथ सीधे हस्तक्षेप।
जहां प्रदर्शन कमजोर या अधूरा दिखता है
विधानसभा में प्रश्न पूछने की संख्या: 13, राज्य औसत 222.3 से बहुत कम।
नौरैयाखेड़ा जैसे इलाके में दशकों पुरानी पानी और सीवर समस्या अब भी मौजूद। जलभराव और सीवर की समस्या बार-बार सामने आती रही।
नई बनी सड़क के क्षतिग्रस्त होने जैसी शिकायतें विभागीय समन्वय की कमजोरी दिखाती हैं।
पूरे पांच साल की विधायक निधि का एक consolidated, कार्यवार सार्वजनिक हिसाब आसानी से उपलब्ध नहीं है।
गोविंदनगर में विकास की रफ्तार तेज हुई है या सिर्फ विकास के कामों की संख्या बढ़ी है?
यही अंतर एक सक्रिय विधायक और सफल विधायक के बीच की दूरी तय करता है।
गोविंदनगर की कहानी इसलिए दिलचस्प है क्योंकि यहां काम होने से इनकार नहीं किया जा सकता, लेकिन समस्याओं के खत्म होने का दावा भी अभी नहीं किया जा सकता।
अगले चुनाव तक शायद सबसे महत्वपूर्ण रिपोर्ट कार्ड किसी सरकारी फाइल में नहीं, बल्कि बारिश के बाद गोविंदनगर की सड़कों पर लिखा जाएगा।
लेखक के बारे में
Ankit Awasthi
श्री अवस्थी स्वतंत्र पत्रकार, लेखक एवं कंटेंट राइटर हैं। पिछले करीब छह वर्षों से पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया के क्षेत्र में सक्रिय श्री अवस्थी ने न्यूज़ट्रैक सहित विभिन्न मीडिया संस्थानों के साथ कार्य किया है। समाचार एवं फीचर लेखन के अलावा डिजिटल कंटेंट, SEO और ऑनलाइन मीडिया प्रोडक्शन में भी उनका अनुभव रहा है। राजनीति विज्ञान में परास्नातक, पत्रकारिता एवं जनसंचार में स्नातकोत्तर डिप्लोमा तथा MBA (IT) की शिक्षा प्राप्त श्री अवस्थी की विशेष रुचि समसामयिक राजनीति, सामाजिक बदलाव, शासन-व्यवस्था और जनसरोकारों से जुड़े विषयों पर तथ्यपरक एवं खोजपरक लेखन में है। इंटरनेट और डिजिटल साधनों के माध्यम से किसी विषय की बारीक पड़ताल कर उसके विभिन्न पहलुओं को सामने लाना उनके लेखन की प्रमुख विशेषता है। श्री अवस्थी एक पुस्तक के लेखक भी हैं और लेखन के माध्यम से समकालीन सामाजिक एवं राजनीतिक प्रश्नों को समझने और उन पर विमर्श विकसित करने में सक्रिय हैं। पत्रकारिता के साथ डिजिटल मार्केटिंग, वेब कंटेंट और लीड जनरेशन के क्षेत्र में भी उन्होंने कार्य किया है। काम के अलावा उन्हें अध्ययन, संगीत और यात्रा में विशेष रुचि है। उनसे ई-मेल [email protected] पर संपर्क किया जा सकता है। Ankit Awasthi की सभी खबरें देखें →
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